जॉनसन एंड जॉनसन नहीं बेचेगी बेबी टैल्कम पाउडर:अगले साल से दुनियाभर में बिक्री बंद होगी, अमेरिका-कनाडा में 2020 से ही बंद

नई दिल्ली4 महीने पहले

जॉनसन एंड जॉनसन 2023 तक पूरी दुनिया में अपने बेबी टैल्कम पाउडर को बेचना बंद कर देगी। J&J का टैल्कम ​​​​​​पाउडर अमेरिका और कनाडा में 2020 में ही बंद हो चुका है। अब कंपनी टैल्क बेस्ड पाउडर की जगह कॉर्न स्टार्च बेस्ड पाउडर बेचेगी।

दरअसल, दुनियाभर में दावे किए जाते रहे हैं कि इस बेबी पाउडर के इस्तेमाल से कैंसर होने का खतरा रहता है। कैंसर की आशंका वाली रिपोर्ट सामने आने के बाद प्रोडक्ट की बिक्री में भी भारी गिरावट दर्ज की गई थी। हालांकि कंपनी ने हमेशा इस पाउडर को सेफ बताया।

J&J ने गुरुवार को कहा कि 'उसने अपने पोर्टफोलियो का असेसमेंट करने के बाद अपने सभी बेबी पाउडर प्रोडक्ट को टैल्कम पाउडर के बजाय कॉर्नस्टार्च का इस्तेमाल करके बनाने का कॉमर्शियल डिसीजन लिया है।' फर्म ने कहा कि कॉर्नस्टार्च आधारित बेबी पाउडर पहले से ही दुनिया के कई देशों में बेचा जा रहा है।

जॉनसन एंड जॉनसन 60 से ज्यादा देशों में अपने प्रोडक्ट तैयार करती है जबकि इसकी करीब 250 सब्सिडियरी हैं। इसके प्रोडक्ट 175 से ज्यादा देशों में बेचे जाते हैं। भारत में इसका कॉम्पिटिशन डाबर, हिन्दुस्तान यूनिलीवर और हिमालय जैसे ब्रांड से है।

टैल्क से कैंसर का खतरा
टैल्क से कैंसर के खतरे के आरोप लगते रहे हैं। दरअसल, जहां से टैल्क को माइन करके निकाला जाता है, वहीं से एस्बेस्टस भी निकलता है। एस्बेस्टस (अभ्रक) भी एक प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला सिलिकेट मिनरल है। ये शरीर को नुकसान पहुंचाता है। जब टैल्क की माइनिंग की जाती है तो उसमें एस्बेस्टस के भी मिलने का खतरा रहता है।

अमेरिका और कनाडा में 2020 से ब्रिक्री बंद
J&J का बेबी पाउडर 1894 से बेचा जा रहा है। हालांकि 2020 में J&J ने अमेरिका और कनाडा में अपने टैल्क बेबी पाउडर की बिक्री बंद करने का ऐलान किया था। कंपनी ने कहा था कि कानूनी चुनौतियों के बीच उत्पाद की गलत जानकारी के कारण मांग गिर गई है।

कंपनी पर 38,000 से ज्यादा केस
कंपनी के खिलाफ 38,000 से ज्यादा केस दर्ज हो चुके हैं। कई महिलाओं ने दावा किया कि बेबी पाउडर को यूज करने के बाद उन्हें ओवेरियन कैंसर हो गया। अमेरिकन रेग्युलेटर्स ने भी दावा किया था कि उन्हें कंपनी के बेबी पाउडर में कैंसर पैदा करने वाले तत्व मिले हैं।

भारत में भी बंद करना पड़ा था प्रोडक्शन
J&J को भारत में भी 2019 में पाउडर में एस्बेस्टस के आरोपों के बाद प्रोडक्शन बंद करना पड़ा था। हालांकि ड्रग कंट्रोलर ने टेस्टिंग में पाउडर में एस्बेस्टस नहीं पाया। इसके बाद कंपनी ने बद्दी और मुलुंड प्लांट में अपने बेबी पाउडर का उत्पादन फिर से शुरू किया था।

पाउडर में एस्बेस्टस का टेस्ट पॉजिटिव
2018 की रॉयटर्स की जांच में पाया गया था कि J&J दशकों से जानता था कि एस्बेस्टस उसके टैल्क उत्पादों में मौजूद था। कंपनी के इंटरनल रिकॉर्ड, ट्रायल टेस्टिमोनी और अन्य सबूतों से पता चला था कि कम से कम 1971 से 2000 के दशक की शुरुआत तक, J&J के रॉ टैल्क और तैयार पाउडर में कभी-कभी एस्बेस्टस की थोड़ी मात्रा का पॉजिटिव टेस्ट आता था।

28 हजार करोड़ रुपए का पेमेंट किया
J&J को सेटलमेंट के मामलों को सुलझाने के लिए अब तक करीब 3.5 बिलियन डॉलर (28 हजार करोड़ रुपए) का पेमेंट करना पड़ा है। 2018 में J&J को उन 20 महिलाओं को 2.5 अरब डॉलर (20 हजार करोड़ रुपए) का पेमेंट करना पड़ा था, जिन्होंने उनके ओवरी कैंसर के लिए जॉनसन बेबी पाउडर को जिम्मेदार बताया था। सेंट लुईस कोर्ट ने ये फैसला सुनाया था।