खुदरा महंगाई जुलाई में 4.17 फीसदी, 9 महीने में सबसे कम; फल-सब्जियों समेत खाने-पीने की चीजें सस्ती

जून में रिटेल महंगाई दर 5% से संशोधित कर 4.92% की गई

July Inflation Slows To 9 Month Low Of 4.17 Percent
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July Inflation Slows To 9 Month Low Of 4.17 Percent

Dainik Bhaskar

Aug 21, 2018, 02:06 PM IST

नई दिल्ली. खुदरा महंगाई दर जुलाई में घटकर 4.17% रह गई। यह 9 महीने में सबसे कम है। इससे पहले अक्टूबर 2017 में महंगाई 3.58% थी। जून की महंगाई दर 5% से संशोधित कर 4.92% की गई। अप्रैल से जून के दौरान महंगाई में लगातार इजाफा हुआ था। फलों के साथ ही प्रोटीन युक्त खाद्य वस्तुएं जून के मुकाबले सस्ती हुईं।

 

 

सामग्री जून में महंगाई दर जुलाई में महंगाई दर
खाद्य 2.9%

1.37%

फल 10% 6.98%
कपड़े,फुटवियर 5.67%

5.28%

हाउसिंग 8.45% 8.3%
ईंधन और बिजली 7.14% 7.96% 

 

 

महंगाई आरबीआई के लक्ष्य के करीब :सरकार और आरबीआई ने रिटेल महंगाई के लिए 4% का लक्ष्य तय कर रखा है। हालांकि, यह लगातर नौवें महीने इससे ज्यादा रही। लेकिन, इस बार के आंकड़ों को देखते हुए कहा जा सकता है कि यह लक्ष्य के करीब है।

 

 

महंगाई का अर्थव्यवस्था पर असर : अर्थव्यवस्था पर महंगाई का असर दो तरह से होता है। महंगाई दर बढ़ने से बाजार में वस्तुओं की कीमतें बढ़ जाती हैं और लोगों की खरीदने की क्षमता कम हो जाती है। महंगाई दर घटती है तो खरीदने की क्षमता बढ़ जाती है, जिससे बाजार में नगदी की आवक भी बढ़ जाती है। महंगाई बढ़ने और घटने का असर सरकारी नीतियों पर भी पड़ता है। रिजर्व बैंक ब्याज दरों की समीक्षा में खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है। महंगाई पर चिंता जताते हुए आरबीआई ने एक अगस्त की समीक्षा बैठक में रेपो रेट में लगातार दूसरी बार 0.25% बढ़ोतरी की।

 

 

दो सूचकांकों के आधार पर तय होती है महंगाई : पहला- उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) है, जो रिटेल महंगाई का इंडेक्स है। रिटेल महंगाई वह दर है, जो जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। यह खुदरा कीमतों के आधार पर तय की जाती है। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य पदार्थों की हिस्सेदारी करीब 45% है। दुनिया भर में ज्यादातर देशों में खुदरा महंगाई के आधार पर ही मौद्रिक नीतियां बनाई जाती हैं। दूसरा- थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई), जो थोक महंगाई का इंडेक्स है। डब्ल्यूपीआई में शामिल वस्तुएं अलग-अलग वर्गों में बांटी जाती हैं। थोक बाजार में इन वस्तुओं के समूह की कीमतों में हर बढ़ोतरी का आंकलन थोक मूल्य सूचकांक के जरिए होता है। इसकी गणना प्राथमिक वस्तुओं, ईंधन और अन्य उत्पादों की महंगाई में बदलाव के आधार पर की जाती है।

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