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कार्रवाई / एनएसई ने कार्वी ब्रोकिंग का लाइसेंस निलंबित किया, रेग्युलेटरी नियम तोड़ने का आरोप

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  • बीएसई ने भी इक्विटी और डेट सेगमेंट में कार्वी के ट्रेडिंग टर्मिनल निष्क्रिय किए
  • कार्वी पर क्लाइंट्स के फंड के दुरुपयोग का आरोप, पिछले दिनों सेबी ने भी रोक लगाई थी
  • ग्राहकों की इजाजत के बिना शेयर बेचने के मामले में ब्रोकरेज फर्म के खिलाफ जांच चल रही

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2019, 12:13 PM IST

मुंबई. नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) ने कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग का लाइसेंस सोमवार को निलंबित कर दिया। कार्वी अब कैपिटल मार्केट, फ्यूचर एंड ऑप्शंस, करंसी डेरिवेटिव्स, डेट, म्यूचुअल फंड सर्विस सिस्टम और कमोडिटी डेरिवेटिव्स में ट्रेडिंग नहीं कर पाएगी। नियामक (रेग्युलेटरी) प्रावधानों का पालन नहीं करने की वजह से कार्वी के खिलाफ कार्रवाई की गई। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) ने भी इक्विटी और डेट सेगमेंट में कार्वी के ट्रेडिंग टर्मिनल निष्क्रिय कर दिए। साथ ही इक्विटी डेरिवेटिव्स, करंसी डेरिवेटिव्स और कमोडिटी सेगमेंट को रिस्क रिडक्शन मोड (आरआरएम) में डाल दिया। कार्वी के क्लाइंट्स अन्य ब्रोकरेज फर्मों की सेवाएं ले सकते हैं।

सेबी ने नए ग्राहक जोड़ने पर रोक लगाई थी
दो हजार करोड़ रुपए के क्लाइंट फंड डिफॉल्ट की वजह से सेबी ने पिछले दिनों कार्वी को बैन कर दिया था। बाद में यह घोटाला करीब 2800 करोड़ का बताया गया। सेबी ने नए ग्राहक जोड़ने और पुराने ग्राहकों के लिए सौदे करने पर रोक लगा दी गई थी। कार्वी पर ग्राहकों की रकम के दुरुपयोग का आरोप है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की जांच के आधार पर सेबी ने कार्वी पर कार्रवाई की। शुरुआती जांच में पता चला था कि कंपनी ने कई ग्राहकों की इजाजत के बिना उनके शेयर बेच दिए। कार्वी ने ग्राहकों की 2,000 करोड़ रुपए की रकम में से 1,096 करोड़ रुपए अपनी रिएल एस्टेट कंपनी में ट्रांसफर कर दिए।

कार्वी पर ग्राहकों की पावर ऑफ एटॉर्नी का दुरुपयोग करने का आरोप
विशेषज्ञों का कहना है कि शॉर्ट टर्म के लिए ट्रेडिंग करने वालों या मार्जिन पर ट्रेडिंग करने वालों के लिए पावर ऑफ एटॉर्नी (पीओए) व्यवस्था ठीक है, क्योंकि ब्रोकर को विशेष परिस्थितियों में आपकी मंजूरी के बिना निवेश बेचने की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन सबके लिए यह व्यवस्था सही नहीं है। इससे निवेशकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
 

देश का सबसे बड़ा इक्विटी ब्रोकर डिफॉल्ट हो सकता है
कार्वी ब्रोकिंग पर आरोप साबित हुए तो ये देश में सबसे बड़ा इक्विटी ब्रोकर डिफॉल्ट हो सकता है। ब्रोकिंग फर्म पर 2800 करोड़ के घोटाले के आरोप लगे हैं। सेबी ने कार्वी को नए क्लाइंट्स बनाने से भी रोक दिया है। मौजूदा क्लाइंट्स की ट्रेडिंग पर पाबंदी लगा दी है। सेबी के मुताबिक कार्वी पर आरोप हैं कि उसने क्लाइंट्स के अकाउंट में रखे शेयर बेचकर पैसे अपनी कंपनी कार्वी रियल्टी में ट्रांसफर किए हैं।

तुरंत कदम उठाए जाने से 90% निवेशकों को राहत मिली
सेबी के तत्काल कदम उठाए जाने से करीब 83,000 निवेशकों को सिक्यूरिटीज वापस मिल गई हैं। एनएसडीएल के मुताबिक करीब 90 प्रतिशत निवेशकों को उनकी सिक्यूरिटीज मिल गई हैं और शेष को यह उनके बकाए के निपटान के बाद मिल जाएंगी। कार्वी ने 95,000 ग्राहकों के 2,300 करोड़ रुपए से अधिक मूल्य की सिक्यूरिटीज को कर्जदाताओं के पास गिरवी रखकर 600 करोड़ रुपए का कर्ज लिया था।

निवेशक ऐसे कर सकते हैं कार्वी स्टॉक ब्रोकिंग से शेयर ट्रांसफर
विशेषज्ञों के मुताबिक निवेशकों को मौजूदा ब्रोकर कार्वी से डेबिट इंस्ट्रक्शन स्लिप लेकर भरवाना होगा। स्लिप में आईएसएन नंबर भरना होगा। इसके बाद जिस ब्रोकर के पास शेयर ट्रांसफर करना है उसका 16 कैरेक्टर वाला टारगेट क्लाइंट कोड भरना होगा। इसमें डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट और ब्रोकर दोनों का ही कोड शामिल होता है। अगर पुराने और नए ब्रोकर दोनों ही एनएसडीएल के मेंबर हैं तो इसमें इंट्रा डिपॉजिटरी ट्रांसफर होगा। ऐसे में डेबिट इंस्ट्रक्शन स्लिप में ऑफ मार्केट ट्रांसफर लिखना होगा। स्लिप को भरकर उसमें साइन करके मौजूदा ब्रोकर यानि कार्वी को देना होगा। आमतौर पर 5-6 दिन में शेयर ट्रांसफर हो जाता है। अगर आप ऑनलाइन शेयर ट्रांसफर करते हैं तो इसके लिए सीडीएसएल, एनएसडीएल की वेबसाइट पर जा सकते हैं। यहां रजिस्ट्रेशन करना होगा। पूरा फॉर्म भरकर सबमिट करना होगा।

पीएमसी बैंक जैसी स्थिति को टालने में मदद मिली
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार मामले में समय पर कार्रवाई अहम है। इस कदम से पीएमसी बैंक जैसी स्थिति को टालने में मदद मिली है। कार्वी ने ग्राहकों की पावर ऑफ एटार्नी का दुरूपयोग किया। कंपनी ने डिमैट खाते का शेयर बाजारों के समक्ष खुलासा नहीं किया। सेबी ने कहा कि एनएसई, केएसबीएल के फोरेंसिक आडिट की शुरूआत की है और ग्राहकों की सिक्यूरिटीज के दुरूपयोग का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद चलेगा।

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