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IPO की नैया पार लगाने की कोशिश:कर्मचारियों को LIC दे सकती है शेयर, विदेशों में निवेशकों से लिया जा रहा है फीडबैक

मुंबई2 महीने पहलेलेखक: अजीत सिंह
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देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी LIC अपने IPO की नैया पार लगाने की कोशिश में हरसंभव प्रयास कर रही है। खबर है कि कंपनी IPO से पहले अपने कर्मचारियों को कुछ शेयर्स दे सकती है। साथ ही यह विदेशी निवेशकों से भी फीडबैक ले रही है।

LIC के पास 1.14 लाख कर्मचारी हैं
भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) के पास 1.14 लाख कर्मचारी हैं। सभी कर्मचारियों को एक समान संख्या में शेयर मिलेंगे। हालांकि पॉलिसीधारकों के लिए IPO का 10% हिस्सा रिजर्व रखा गया है। इस तरह से कर्मचारियों के साथ पॉलिसीधारकों का भी LIC IPO में ध्यान रखा गया है। उधर, LIC के अधिकारी लगातार IPO के लिए विदेशी निवेशकों से फीडबैक ले रहे हैं। हाल में LIC के अधिकारी 3 बार विदेश दौरे पर गए हैं। उन्होंने वहां पर विदेशी निवेशकों को IPO को लेकर जानकारी दी है। उनका फीडबैक मांगा और साथ ही निवेश के लिए उन्हें तैयार कर रहे हैं।

सरकार कोई कोताही नहीं बरतना चाहती
दरअसल LIC के IPO में सरकार कोई कोताही नहीं बरतना चाहती है। इसलिए इस IPO को पार लगाने की पहले ही तैयारी हो रही है। हाल में पेंशन फंड के रेगुलेटर PFRDA ने भी पेंशन का पैसा IPO में लगाने की मंजूरी दी है। जबकि दूसरी ओर, LIC अभी से निवेशकों के साथ बात कर रही है। हाल में जिन 10 मर्चेंट बैंकर्स को चुना गया है, वे भी विदेशी निवेशकों के साथ-साथ घरेलू निवेशकों के साथ भी बात करेंगे। इन 10 मर्चेंट बैंकर्स को भी यह जिम्मेदारी दी गई है।

LIC के 12 लाख एजेंट हैं
LIC के 12 लाख एजेंट हैं। साथ ही इसकी 32 करोड़ पॉलिसी हैं। ऐसे में LIC के पास करोड़ों निवेशक तो बहुत ही आसानी से मिल जाएंगे। सवाल यह है कि अगर 10% हिस्सेदारी बेची गई तो इसके लिए LIC को ज्यादा निवेशकों की जरूरत होगी। इसलिए रिटेल निवेशकों के लिए कम हिस्सा रिजर्व रखकर बड़े निवेशकों को ज्यादा हिस्सा दिया जा सकता है। सरकार ने हाल ही में फैसला किया है कि सरकारी कंपनियों में जो सेबी का कम से कम पब्लिक होल्डिंग का नियम है, उसे खत्म कर दिया जाए।

25% हिस्सेदारी जनता के पास होनी चाहिए
अभी तक सेबी के नियमों के मुताबिक, किसी भी लिस्टिंग कंपनी में कम से कम 25% हिस्सेदारी जनता के पास होनी चाहिए। 2010 तक यह नियम 10% का था, पर उसी साल इसे बढ़ाकर 25% कर दिया गया था। हालांकि यह हिस्सेदारी कंपनी के लिस्ट होने के 3 साल के भीतर करनी होती थी। लेकिन जैसे ही LIC IPO की तैयारी शुरू हुई, सरकार ने हाल में इस नियम को सरकारी कंपनियों के लिए बदल दिया। नए नियम में यह कहा गया है कि इसे 5 साल में पूरा करना होगा, न कि तीन साल में।

सरकार की कैपिटल महज 100 करोड़ रुपए है
LIC में सरकार की कैपिटल महज 100 करोड़ रुपए है। हालांकि पिछले 50 साल से यह केवल 5 करोड़ रुपए थी और 2012 में इसे बढ़ाकर 100 करोड़ रुपए किया गया। लिस्ट होने के बाद LIC का मार्केट कैप 10-12 लाख करोड़ रुपए होने की उम्मीद है। यह देश की सबसे बड़ी मार्केट कैप वाली कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को भी पीछे छोड़ सकती है। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप 16.15 लाख करोड़ रुपए है।

LIC IPO से पहले मुख्य वित्तीय अधिकारी (CFO) की नियुक्ति भी करना चाहती है। इस संबंध में मंगलवार को LIC ने एक नोटिस जारी किया था। इसमें कांट्रैक्ट आधार पर CFO को नियुक्त करने की जानकारी दी गई थी। साथ ही इसके इच्छुक उम्मीदवारों से एप्लिकेशन मंगाई गईं हैं।