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लॉकडाउन का असर:दिल्ली की थोक मंडियों में एक रुपया प्रति किलोग्राम से नीचे के भाव पर बिक रहा है टमाटर

नई दिल्ली2 वर्ष पहले
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थोक मंडियों में पहले से काफी कम खुदरा व्यापारी आ रहे, इससे सब्जियों की मांग घट गई, टोकन प्रणाली के कारण ग्राहकों को लंबे समय तक करना पड़ता है इंतजार, इसलिए भी वे मंडी आने से कतरा रहे - Dainik Bhaskar
थोक मंडियों में पहले से काफी कम खुदरा व्यापारी आ रहे, इससे सब्जियों की मांग घट गई, टोकन प्रणाली के कारण ग्राहकों को लंबे समय तक करना पड़ता है इंतजार, इसलिए भी वे मंडी आने से कतरा रहे
  • टमाटर और प्याज सहित सभी सब्जियों की कीमतों में इस महीने भारी गिरावट आई
  • लॉकडाउन की घोषणा के बाद लाखों लोगों के गांच चले जाने से घट गई सब्जियों की मांग

दिल्ली की थोक मंडियों में टमाटर और प्याज सहित सभी सब्जियों की कीमतों में इस महीने भारी गिरावट दर्ज की गई है। फल और सब्जियों के लिए एशिया की सबसे बड़ी थोक मंडी आजादपुर मंडी में टमाटर एक रुपया प्रति किलोग्राम से कम भाव पर बिका। मंडी के व्यापारियों ने कहा कि सब्जियों के खुदरा व्यापारी थोक बाजार में कम आ रहे हैं, इसलिए मांग कम होने से कीमत इतने नीचे चली गई है।

आजादपुर मंडी एपीएमसी के रेट चार्ट के मुताबिक एक मई को टमाटर का थोक भाव 6-15.25 रुपए प्रति किलो था। पिछले तीन दिनों में यह दर 0.75-5.25 रुपए प्रति किलो चल रहा है। इसी तरह से प्याज का भाव एक मई को 4.50-11.25 रुपए प्रति किलो था। शनिवार को इसकी कीमत 2.50-8.50 रुपए प्रति किलो थी। हालांकि कि दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों की विभिन्न कॉलोनियों में टमाटर प्रति किला 15-20 रुपए के भाव से बिक रहा है।

ओखला मंडी के ऑडीटर विजय आहूजा ने कहा कि टमाटर ही नहीं, अन्य हरी सब्जियों की कीमतें भी घटकर एक चौथाई रह गई हैं। उन्होंने कहा कि घीया की कीमत 2-3 रुपए प्रति किलोग्राम भाव से बढ़ा है, जबकि तोरी 6 रुपए प्रति किलोग्राम के भाव पर बिक रहा है। प्याज की कीमत इस महीने प्रति किलोग्राम डेढ़ रुपए घट गई है। आहूजा ने कहा कि दिल्ली से लाखों लोगों के गांव चले जाने के कारण कीमत में गिरावट आई है।

आजादपुर मंडी के कारोबारी और इंडियन मर्चेंट एसोसिएशन कके प्रेसिडेंट राजेंद्र शर्मा ने कहा कि रेस्तरां और ढाबा के बंद होने से सब्जियों की खपत घट गई। इसके अलावा टोकन प्रणाली के कारण ग्राहकों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है। इसके कारण भी वे बाजार आने से कतराते हैं। एक अन्य व्यापारी ने हालांकि कहा कि फल की मांग कम नहीं हुई है। इसलिए उनकी कीमत पहले के स्तर पर बनी हुई है।

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