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बदल सकता है वर्क कल्चर:ऑफिस में 5-डे वर्क वीक की फिर से लौटने की संभावना नहीं, 4 दिन काम बन सकता है न्यू नॉर्मल

नई दिल्ली19 दिन पहले
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नितिन परांजपे ने कहा कि सभी प्रथाओं में तेजी से बदलाव हो रहा है। यह औपचारिक शिक्षा को बहुत जल्दी अप्रासंगिक कर देता है। - Dainik Bhaskar
नितिन परांजपे ने कहा कि सभी प्रथाओं में तेजी से बदलाव हो रहा है। यह औपचारिक शिक्षा को बहुत जल्दी अप्रासंगिक कर देता है।
  • यूनीलिवर के COO ने कहा- वर्क-डे में बदलाव सामाजिक परिवर्तन का हिस्सा
  • भविष्य में सीखने की क्षमता के जरिए कर्मचारियों की परिभाषा तय की जाएगी

भविष्य में काम और वर्कप्लेस समान रहने वाला नहीं है। अनिवार्य 5-डे वर्क वीक की फिर से लौटने की संभावना नहीं है। यह बात ग्लोबल कंज्यूमर गुड्स कंपनी यूनीलीवर के चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर (COO) नितिन परांजपे ने कही है।

4-डे वर्क वीक में न्यू नॉर्मल बनने की संभावना

IT इंडस्ट्री बॉडी नैस्कॉम की ओर से आयोजित वार्षिक NTLF इवेंट में परांजपे ने कहा कि 4-डे वर्क वीक में न्यू नॉर्मल बनने की संभावना है। इसका कारण यह है कि अब लोग वर्क-लाइफ बैलेंस को ज्यादा महत्व दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऑफिस में फिर से 5-डे वर्क वीक के लौटने की संभावना नहीं है। परांजपे हिन्दुस्तान यूनीलीवर में भी कई सालों तक काम कर चुके हैं।

10 महीने से कर्मचारियों से बातचीत कर रही है यूनीलीवर

नितिन परांजपे ने कहा कि यूनीलीवर आगे बढ़ने के व्यावहारिक तरीकों को लेकर पिछले 10 महीने से कर्मचारियों से बातचीत कर रही है। उन्होंने कहा कि आगे बढ़ने वाली कंपनियों के लिए कर्मचारियों से जुड़ाव के विभिन्न तरीके होंगे। बीती बातों को याद करते हुए परांजपे ने कहा कि कंपनियां अपने करियर के शुरुआती दिनों में सप्ताह में 6 दिन काम करती थीं, जो घटकर 5 दिन हो गया है। उन्होंने कहा कि सप्ताह में 4 दिन काम न्यू नॉर्मल हो सकता है। इस प्रक्रिया को सामाजिक परिवर्तन का हिस्सा करते हैं।

सीखने की क्षमता कर्मचारियों को परिभाषित करेगी

उन्होंने कहा कि भविष्य में सीखने की क्षमता के जरिए कर्मचारियों को परिभाषित किया जाएगा। क्योंकि सभी प्रथाओं में तेजी से बदलाव हो रहा है। यह औपचारिक शिक्षा को बहुत जल्दी अप्रासंगिक कर देता है। यह हर किसी को अनजान बनने और फिर तेजी से सीखने के लिए मजबूर करता है। नितिन परांजपे ने स्पष्ट किया कि भारत में आईटी इंडस्ट्री की शुरुआत करने वाली दिहाड़ी मजदूरी अब पुरानी बात हो गई है। अब विविधता को गले लगाने का भविष्य है। साथ ही कर्मचारी आने वाली चुनौतियों से निपटने में सक्षम होना चाहिए।

हम कई मोर्चों पर पिछड़े हुए हैं: गुरनानी

इसी कार्यक्रम में बोलते हुए टेक महिंद्रा के CEO सीपी गुरनानी ने कहा कि स्किल डेवलपमेंट के लिए सरकार की ओर से 400 करोड़ रुपए के आवंटन के बावजूद हम कई मोर्चों पर पिछड़े हुए हैं। 5G का उदाहरण देते हुए गुरनानी ने कहा कि इस सेक्टर में हम दुनिया से पीछे हैं। इसका कारण यह है कि सरकार ने अभी तक स्पेक्ट्रम का आवंटन नहीं किया है। साथ ही 800 से ज्यादा यूनिवर्सिटी के पास आर्टिफिशियल इंटेलीजेंसी जैसी महत्वपूर्ण तकनीक पर आधारित करिकुलम नहीं है।

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