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मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की रफ्तार में मामूली गिरावट:PMI 0.2% घटकर फरवरी में 57.5 पर आई लेकिन यह लंबी अवधि के औसत से ऊपर है

नई दिल्ली4 महीने पहले
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फरवरी का इंडेक्स लंबी अवधि के औसत 53.6 से ऊपर बना हुआ है - Dainik Bhaskar
फरवरी का इंडेक्स लंबी अवधि के औसत 53.6 से ऊपर बना हुआ है
  • जनवरी 2020 में मैन्यूफैक्चरिंग PMI 57.7 पर थी
  • मांग में बढ़ोतरी से कंपनियों में उत्साह का माहौल

देश के मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर की गतिविधियों में फरवरी 2020 में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई। हालांकि सेक्टर में उत्साह का माहौल दिखा, क्योंकि नए ठेकों में बढ़ोतरी के कारण कंपनियों ने उत्पादन और खरीदारी बढ़ा दी है। यह बात सोमवार को जारी एक मासिक सर्वेक्षण में कही गई।

IHS मार्किट इंडिया मैन्यूफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) फरवरी में थोड़ी गिरावट के साथ 57.5 पर आ गया। जनवरी में मैन्यूफैक्चरिंग PMI 57.7 पर था। इंडेक्स का यह स्तर बता रहा है कि उद्योग क्षेत्र की रफ्तार भले ही जनवरी के मुकाबले कम है, लेकिन यह रफ्तार अब भी काफी तेज है। फरवरी का इंडेक्स लंबी अवधि के औसत 53.6 से ऊपर बना हुआ है।

कंपनियों के पास समुचित संसाधन होता, तो उत्पादन और तेजी से बढ़ता

IHS मार्किट की इकॉनोमिक्स एसोसिएट डायरेक्टर पॉलियाना डि लीमा ने कहा कि कंपनियों के पास वर्कलोड को हैंडल करने के लिए यदि समुचित संसाधन होता, तो उत्पादन में और ज्यादा बढ़ोतरी होती। PMI की परिभाषा के मुताबिक यदि इंडेक्स 50 से ऊपर रहता है, तो उसका मतलब यह है कि संबंधित क्षेत्र के उत्पादन में बढ़ोतरी हुई है। वहीं, इंडेक्स के 50 से नीचे रहने का मतलब यह होता है कि संबंधित क्षेत्र में गिरावट दर्ज की गई है।

कोरोना की पाबंदियों के कारण बेरोजगारी में और बढ़ोतरी

सर्वेक्षण रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कोरोना महामारी के कारण वर्क शिफ्ट से जुड़ी पाबंदियों के कारण बेरोजगारी में और बढ़ोतरी हुई। लीमा ने कहा कि अधिकतर लोगों को उम्मीद है कि वैक्सीनेशन कार्यक्रम में विस्तार होने के कारण जल्द ही ऐसी पाबंदियों के हटा ली जाएंगी। कंपनियों ने यह भी उम्मीद जताई कि अधिकांश आबादी को वैक्सीन लग जाने और पाबंदियां हटा ली जाने के बाद आर्थिक स्थिति सुधरेगी और उत्पादन में और बढ़ोतरी होगी।

अगले 12 महीने में उत्पादन में बढ़ोतरी जारी रहने की उम्मीद

मैन्यूफैक्चरिंग कंपनियों ने अगले 12 महीने में भी उत्पादन में बढ़ोतरी जारी रहने की उम्मीद दिखाई। कारोबारी माहौल में उत्साह के कारण कच्चे माल की खरीदारी में गत करीब एक दशक की सबसे ज्यादा तेजी दिखी, क्योंकि कंपनियों ने मांग पूरी करने के लिए कच्चे माल जमा करने पर ध्यान दिया। इस सर्वेक्षण के अब तक के इतिहास में प्री-प्रॉडक्शन इन्वेंटरी में सबसे तेज मासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई।

कच्चे माल की महंगाई बढ़कर 32 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंची

कच्चे माल और सेमि फिनिश्ड आइटम्स की मांग बढ़ने से कच्चे माल की महंगाई बढ़ी और यह 32 महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गई। गौरतलब है कि पिछले सप्ताह जारी सरकारी आंकड़े के मुताबिक अक्टूबर-दिसंबर 2020 तिमाही में देश की आर्थिक विकास दर 0.4% रही। इससे पहले लगातार दो तिमाही GDP में गिरावट दर्ज की गई थी। सरकार के मुताबिक कृषि, मैन्यूफैक्चरिंग, सर्विस और कंस्ट्रक्शन सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन के कारण अर्थव्यवस्था मंदी से बाहर निकली।