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सेमीकंडक्टर की कमी का असर:ऑटो कंपनियों का फायदा सितंबर तिमाही में 52% घट सकता है, मारुति और टाटा पर सबसे बुरा असर दिखेगा

मुंबई2 महीने पहले
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सेमीकंडक्टर की कमी का असर ऑटो कंपनियों के मुनाफे पर दिखेगा। सितंबर तिमाही के फाइनेंशियल रिजल्ट आने शुरू हो गए हैं। ऐसा अनुमान है कि ऑटो सेक्टर का फायदा सितंबर 2020 की तुलना में 52% घट कर सितंबर 2021 में 35,174 करोड़ रुपए रह सकता है।

शेयर्स को खरीदने की सलाह

हालांकि बावजूद इसके ब्रोकरेज हाउस ने ज्यादातर कंपनियों के शेयर्स को खरीदने की सलाह दी है। ऐसा इसलिए क्योंकि उनका मानना है कि जैसे ही यह समस्या खत्म होगी कंपनियों का फायदा सुधरेगा और इसका पॉजिटिव असर कंपनियों के शेयर्स पर दिखेगा।

सितंबर में बिक्री में आई थी कमी

हाल में जब सितंबर महीने में गाड़ियों की बिक्री के आंकड़े आए थे तो उसमें ज्यादातर कंपनियों की बिक्री घटी थी। मारुति की बिक्री सितंबर में 86,380 रही जो सितंबर 2020 में 1.47 लाख थी। महिंद्रा की बिक्री में 21.7% की गिरावट थी। इसने सितंबर 2021 में 28,112 गाड़ियां बेची जबकि सितंबर 2020 में 35,920 गाड़ियां बेची थी।

फायदा में भारी गिरावट आ सकती है

ब्रोकरेज हाउसेस का अनुमान है कि ऑटो और ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों के फायदे में भारी गिरावट आ सकती है। दर्जन भर कंपनियां दूसरी तिमाही में अपने फायदे में सालाना आधार पर 97% की गिरावट देख सकती हैं। सेमीकंडक्टर की कमी की वजह से ऑटो कंपनियों का प्रोडक्शन आधा हो गया है। एनालिस्ट्स के मुताबिक, सेमीकंडक्टर की कमी से पर्सनल गाड़ियों, प्रीमियम दोपहिया वाहनों और लाइट कमर्शियल व्हीकल (LCV) की सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। इससे कंपनियों की त्योहारी सीजन में होने वाली बिक्री पर भी असर हो रहा है।

पर्सनल और कमर्शियल व्हीकल की मांग मजबूत

यस सिक्योरिटीज ने कहा कि पर्सनल और कमर्शियल व्हीकल की मांग काफी मजबूत है। लेकिन ग्लोबल चिप की कमी से अगस्त और सितंबर में कंपनियों की बिक्री पर असर दिखा है। इन कंपनियों के वॉल्यूम में 40-45% की कमी का असर दिखा है। बड़ी कंपनियों ने सितंबर में अपने प्रोडक्शन में कमी करने की घोषणा की थी।

पर्सनल व्हीकल की मांग ज्यादा

पिछली बार के त्योहारी सीजन की तुलना में इस बार पर्सनल व्हीकल की इन्क्वायरी में 18-20% की तेजी आई है। डीलर्स या कंपनियों के पास 2 हफ्ते से भी कम की इन्वेंटरी है। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेस का मानना है कि पर्सनल व्हीकल के लिए तेजी से मांग बढ़ी है। लेकिन दो पहिया गाड़ियों की मांग में रिकवरी में धीमापन है। ट्रैक्टर की मांग में तेजी दिख रही है।

मारुति का फायदा 45% घट सकता है

ब्रोकरेज हाउस का अनुमान है कि मारुति सुजुकी के फायदा में सालाना आधार पर 45.2% की गिरावट आ सकती है। इसका फायदा 751.20 करोड़ रुपए रह सकता है। टाटा मोटर्स 3,146.60 करोड़ रुपए का घाटा पेश कर सकती है। हालांकि इसका शेयर 3 दिनों में 25% से ज्यादा बढ़ चुका है। अशोक लेलैंड 95 करोड़ रुपए का घाटा पेश कर सकती है।

हीरो मोटो कॉर्प के फायदा में 28.3% की गिरावट

दोपहिया वाहन बनाने वाली हीरो मोटो कॉर्प के फायदा में 28.3% की गिरावट आ सकती है। यानी इसका फायदा 683 करोड़ रुपए के करीब रह सकता है। एस्कॉर्ट का फायदा 34% गिर कर 152 करोड़ रुपए रह सकता है। बजाज ऑटो हालांकि पिछले साल की समान तिमाही जैसा ही फायदा दे सकती है।

सिएट को 73% का घाटा हो सकता है

ऑटो का पार्ट्स बनाने वाली कंपनियों की बात करें तो सिएट को सितंबर तिमाही में 73% का घाटा हो सकता है। सालाना आधार पर इसका फायदा 50 करोड़ रुपए रह सकता है। अमार राजा बैटरीज के फायदे में 28% की गिरावट आ सकती है। इसका फायदा 146 करोड़ रुपए रह सकता है। मदरसन सूमी का फायदा 224 करोड़ रुपए रहने की उम्मीद है। इसके फायदे में 40% की गिरावट आ सकती है।

टाटा मोटर्स को 4,412 करोड़ का घाटा हो सकता है

ब्रोकरेज हाउस एमके ग्लोबल का अनुमान है कि ऑटो कंपनियों का फायदा सितंबर तिमाही में गिर सकता है। टाटा मोटर्स के बारे में इसने कहा है कि इसका घाटा 4,412 करोड़ रुपए रह सकता है। अशोक लेलैंड को 108 करोड़ रुपए का घाटा हो सकता है। जबकि मारुति का फायदा 50% घट कर 687 करोड़ रुपए रह सकता है। मदरसन सूमी, अपोलो टायर्स, अमार राजा, मिंडा और एक्साइड जैसी कंपनियों का फायदा 97% तक गिर सकता है।

यस सिक्योरिटीज ने भी घाटे का अनुमान लगाया

यस सिक्योरिटीज ने अनुमान लगाया है कि मारुति का फायदा सालाना आधार पर 70% गिर सकता है। हीरो मोटो कॉर्प का फायदा 40%, एस्कार्ट का फायदा 38%, महिंद्रा एंड महिंद्रा का फायदा 24% और आयशर का फायदा 19% कम हो सकता है। टाटा मोटर्स 5,501 करोड़ रुपए का घाटा दिखा सकती है।

इक्रा ने डाउनग्रेड किया

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने ऑटो पार्ट इंडस्ट्री को डाउनग्रेड कर दिया है। इसने कहा कि ऑटो पार्ट्स इंडस्ट्री की ग्रोथ 17 से 20% रह सकती है। हालांकि पहले के अनुमान की तुलना में इसमें 3% का ज्यादा डाउनग्रेड हुआ है। क्योंकि सेमीकंडक्टर की कमी की वजह एक बड़ी समस्या बन चुकी है। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि ऑटो पार्ट बनाने वाली कंपनियों का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन सामान्य स्तर से कम रहेगा।

इसके मुताबिक, ऑटो पार्ट्स बनाने वाली कंपनियां वित्त वर्ष 2021-22 में 12,500 करोड़ रुपए का निवेश कर सकती हैं। जबकि वित्तवर्ष 2020 में इन्होंने 18,200 करोड़ रुपए का निवेश किया था। यानी कंपनियां निवेश में कमी कर सकती हैं।