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बेहतर प्रदर्शन वाली स्कीम:मिरै म्यूचुअल फंड ने एजेंट के कमीशन में की कटौती, एजेंट अब नहीं बेचेंगे स्कीम

मुंबई8 महीने पहले
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  • 3 स्कीम पर पहले डिस्ट्रीब्यूटर को 120-140 पैसा मिलता था कमीशन
  • अब इन तीनों स्कीम पर इसे घटाकर 60 से 70 पैसा कर दिया है

मिरै असेट म्यूचुअल फंड ने वितरकों (एजेंट) को दिए जाने वाले कमीशन में अपनी 3 स्कीम में कटौती की है। इससे इसके एजेंट नाराज हैं। हालांकि जिन स्कीम के कमीशन में कटौती की गई है, उनका प्रदर्शन पिछले 1 साल में बेहतर रहा है।

मिड कैप, फोकस्ड फंड और टैक्स फंड पर कमीशन कम हुआ

मिरै ने जिन स्कीम के कमीशन में कटौती की है, उसमें मिड कैप फंड रहा है जिसे करीबन 20 महीने पहले लांच किया गया था। इसका असेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 4,224 करोड़ रुपए है। इसने 1 साल में 90% का रिटर्न निवेशकों को दिया है। इसी तरह मिरै असेट फोकस्ड फंड के भी कमीशन में कटौती की गई है। इस फंड ने 1 साल में निवेशकों को 79% का रिटर्न दिया है। इसका AUM 5,472 करोड़ रुपए रहा है।

तीसरा फंड मिरै असेट टैक्स सेवर है जो पांच साल पुरानी स्कीम है। इसने 1 साल में 77% का फायदा निवेशकों को दिया है। इसका AUM 6,934 करोड़ रुपए रहा है।

60-70 पैसा मिलेगा कमीशन

मिरै अब इन स्कीम में नए आने वाले निवेश पर 60-70 पैसा कमीशन देगा जबकि पहले वह 120 से 140 पैसा देता था। इसने वितरकों और बैंक तथा फाइनेंशियल एडवाइजर्स से पूछा है कि वे अपनी लिस्ट से इस स्कीम को हटा दें जिसमें वे इसे निवेशकों को खरीदने की सलाह दे रहे हैं। मिरै दरअसल चाहती है कि इन स्कीम्स में अब निवेशक कम निवेश करें।

एजेंट तेजी से न बेचें इस स्कीम को

मिरै का कहना है कि ऐसा इसलिए किया गया है ताकि एजेंट इन स्कीम को बहुत तेजी से न बेचें। वितरकों का कहना है कि वे अब मिरै की स्कीम को नहीं बेचेंगे। मध्यप्रदेश के एक बड़े वितरक ने कहा कि मिरै के इस फैसले का मतलब है कि आगे चलकर इसमें जोखिम हो सकता है। साथ ही निवेशक का डाटा आ जाने के कारण वे डायरेक्ट सेलिंग को भी बढ़ावा दे सकते हैं।

इस स्कीम में ज्यादा निवेश नहीं चाहिए

मिरै का कहना है कि इन स्कीम में अब उसे ज्यादा निवेश नहीं चाहिए। जबकि वितरकों का कहना है कि फंड हाउस ने इसलिए कमीशन में कटौती की है, ताकि उसका फायदा बढ़ जाए। हालांकि फंड हाउस के इस फैसले से निवेशकों की जो सालाना इस पर लागत लगती है, उस पर कोई असर नहीं होगा। फंड हाउस का मानना है कि बाजार में ज्यादा लिक्विडिटी नहीं है खासकर मिड कैप सेक्टर में।

रिटर्न पर असर हो सकता है

विश्लेषकों का मानना है कि किसी भी स्कीम में ज्यादा पैसा आने का मतलब यह है कि आगे चलकर उसके रिटर्न प्रभावित हो सकते हैं। या निवेशकों द्वारा पैसे निकालने पर उस पर असर हो सकता है। वितरकों का कहना है कि हमारा कमीशन जब कम हो रहा है तो हम क्यों बेचें ऐसे प्रोडक्ट को। हालांकि कोई निवेशक अगर पूछता है तो जरूर हम उसे इस स्कीम को देंगे।

पहले भी ऐसा किया गया है

इससे पहले एसबीआई और मिरै ने एसआईपी और एकमुश्त निवेश पर कुछ स्कीम में एक सीमा लगा दी थी। जब भी मिड और स्मॉल कैप चलते हैं तब फंड हाउस नए निवेश पर इस तरह की योजना बना देते हैं। फोकस्ड का एक्सपोजर इंफोसिस में 9.79%,एचडीएफसी बैंक में 9.28%, आईसीआईसीआई बैंक में 7.70%, रिलायंस इंडस्ट्रीज में 7.39%, एक्सिस बैंक में 5.16%, भारती एयरटेल में 3.95% रहा है। बैंकों और सॉफ्टवेयर सेक्टर में इसका निवेश 36% रहा है।

मिड कैप का निवेश एसआरएफ में 4.36%, फेडरल बैंक में 4.25%, एक्सिस बैंक में 4%, एसबीआई में 3.23% रहा है। बैंक सेक्टर में 14.25%, कंज्यूमर ड्यूरेबल में 12% और फार्मा में 8.28% निवेश रहा है।