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पॉजिटिव ग्रोथ:20 लाख करोड़ रुपए के आत्मनिर्भर पैकेज के बाद नई कंपनियों के खुलने की रफ्तार बढ़ी, 2019 की तुलना में 2020 में 11% ज्यादा रजिस्ट्रेशन हुए

अहमदाबाद6 महीने पहलेलेखक: विमुक्त दवे
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साल 2020 में आई कोरोना महामारी और उसके बाद लॉकडाउन ने देश और दुनिया की अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचाया। धंधे-रोजगार ही चौपट नहीं हुए, बल्कि लाखों लोग बेरोजगार भी हो गए। लेकिन, आपको जानकार आश्चर्य होगा कि इस दौरान पिछले साल की तुलना में ज्यादा कंपनियां अस्तित्व में आईं। इसी को लेकर दैनिक भास्कर ने भारत सरकार के कॉर्पोरेट अफेयर्स मिनिस्ट्री के आंकड़ों की जांच की तो यह जानकारी मिली कि देश में वर्ष 2019 के दौरान 1.28 लाख नई कंपनियां अस्तित्व में आई थीं तो वर्ष 2020 में यह आंकड़ा 1.42 लाख पर पहुंच गया। यानी की 2019 की तुलना में 2020 में 11% ज्यादा कंपनियों की रजिस्ट्री हुई।

अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए सरकार की कई योजनाओं के चलते नई कंपनियों की संख्या में वृद्धि हुई है। खासतौर पर आत्मनिर्भर भारत पैकेज की घोषणा के बाद से इस एक्टिविटी में उल्लेखनीय रूप से वृद्धि हुई है। वर्ष 2020 में जनवरी से मई के दौरान 37,010 नई कंपनियों का रजिस्ट्रेश हुई, वहीं वहीं मई महीने में केंद्र सरकार ने राहत पैकेज की घोषणा की, तो उसका असर जून से ही दिखाई देना शुरू हो गया था और इसी के चलते जून से दिसंबर के बीच, 1,04,989 नई कंपनियां रजिस्टर्ड हुईं। कोरोना काल में खासतौर पर सर्विस और टेक्नोलॉजी बेस्ड सर्विसीज सेक्टर में सबसे ज्यादा नई कंपनियां रजिस्टर्ड हुईं।

अनलॉक के बाद रजिस्ट्रेशन में वृद्धि
पूरे देश में मार्च के अंत में लॉकडाउन लगा दिया गया था। इससे नई कंपनियों के रजिस्ट्रेशन का आंकड़ा एकदम घट गया था। लेकिन, जब सरकार ने सुस्त अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए मई महीने में 20 लाख रुपए के राहत पैकेज के ऐलान के साथ कई तरह की पॉलिसी में सुधार किया तो इसके पॉजीटिव रिस्पांस आने शुरू हो गए। इसके परिणास्वरूप जून से जब अनलॉक की प्रक्रिया शुरू हुई तो नई कंपनियों के रजिस्ट्रेशन में तेजी से उछाल आया और जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में हर महीने 16000 से ज्यादा नई कंपनियों का रजिस्ट्रेशन हुआ। वहीं, गुजरात में ही इस समय के दौरान हर महीने करीब 850 नई कंपनियों का रजिस्ट्रेशन हुआ।

लॉकडाउन ने नए आइडियाज को रफ्तार दी

चार्टर्ड एकाउंटेंट फर्म पी.के. मोदी एंड कंपनी के प्रदीप मोदी बताते हैं कि दो महीने के लॉकडाउन ने लोगों को कुछ नया सोचने का समय और अवसर दिया। आमतौर पर ऐसा होता है कि हमारे पास नए प्लान तो होते हैं, लेकिन व्यस्तता के कारण उसे एग्जीक्यूट करना संभव नहीं हो पाता। वहीं, लॉकडाउन के चलते खासतौर पर अप्रैल और मई महीने में तो लगभग सभी तरह की एक्टिविटीज शून्य हो गई थीं। लोग घरों में कैद थे और इसी स्थिति ने उन्हें कुछ नया करने के लिए प्रोत्साहित किया। इसी के चलते लोग नए बिजनेस की ओर बढ़े और नई कंपनियों के रजिस्ट्रेशन में तेजी आई।

सरकार की पॉलिसी ने लोगों को प्रोत्साहित किया

इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया (ICAI) के सेंट्रल काउंसिल के मेंबर अनिकेत तलाटी बताते हैं कि 2019 और 2020 में केंद्र सरकार ने कंपनी फॉर्मेशन, कॉर्पोरेट कम्पलायन्सेस, छोटी और नई कंपनियों के लिए टैक्स स्ट्रक्चर समेत कई मामलों में आवश्य संशोधन किए। इससे नई कंपनियों के लिए धन जुटाने के नए रास्ते खुले। अब विदेशों से भी निवेश आ रहा है और इससे लोग खराब आर्थिक स्थिति में भी नई कंपनियां खोलने का साहस दिखा रहे हैं।

तकलीफों के बीच नए अवसर तलाशने का समय

लीगलविज के संस्थापक श्रीजय शेठ के अनुसार, ऐसा नहीं है कि कोरोना ने अर्थव्यवस्था को नुकसान नहीं पहुंचाया। इस अवधि के दौरान कई छोटी और बड़ी कंपनियां अपेक्षाकृत बुरी तरह से प्रभावित हुई हैं और आज भी बहुत से लोग इससे पूरी तरह उबर नहीं सके हैं। दूसरी ओर, कई ऐसे लोग भी हैं जो बीते समय को भुलाकर नई शुरुआत में जुट गए हैं। हमारे पास बहुत सारे पुराने ग्राहक हैं, जिन्होंने अपनी नई कंपनी बना ली है। इनमें से करीब 30% कंपनियां सर्विस सेक्टर में शुरू हुई हैं। इसके अलावा, मैन्यूफैक्चरिंग और ट्रेंडिंग सेग्मेंट में भी उल्लेखनीय शुरुआत हुई है। साल 2019 में शुरू हुई कंपनियों में से करीब 4% कृषि संबंधित कंपनियां थीं, जिसका अनुपात बढ़कर 2020 में 7-8% हो गया।

देश में गुजरात की ग्रोथ सबसे ज्यादा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, नई कंपनियों के रजिस्ट्रेशन में गुजरात देश भर में नंबर वन पर रहा। देश भर में नई कंपनियों के रजिस्ट्रेशन की ग्रोथ 2020 में 11% थी। वहीं, गुजरात में यह आंकड़ा 26% से ज्यादा रहा। वर्ष 2020 के दौरान गुजरात में 7324 नई कंपनियां पंजीकृत हुईं, जबकि 2019 में 5784 नई कंपनियां पंजीकृत हुईं थीं। लॉकडाउन के चलते मार्च, अप्रैल और मई में सबसे कम रजिस्ट्रेशन हुए, जबकि इसके बाद के महीनों में हर महीने 500 से ज्यादा कंपनियों का रजिस्ट्रेशन हुआ।

कंपनियां खड़ी करने के लिए प्रमोटर्स ने 7000 करोड़ रुपए का निवेश किया
वर्ष 2020 के दौरान जो नई कंपनियां अस्तित्व में आईँ, उसके लिए प्रमोटर्स ने करीब 7,000 करोड़ रुपए का निवेश किया है। इस हिसाब से भारत में नवगठित कंपनियों का औसत निवेश लगभग 5 लाख रुपए होता है। चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के अनुसार, प्रमोटर्स नई कंपनियों के लिए औसतन 1 लाख से 20 लाख रुपए तक का निवेश करते हैं। जबकि, मीडियम और बड़ी कंपनियों के लिए पेडअप केपिटल 50 लाख से लेकर 25 करोड़ रुपए तक के बीच होता है।

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