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रिलायंस में मुकेश अंबानी के बाद कौन?:तय करने के लिए बनेगी फैमिली काउंसिल; ईशा को भी मिलेगा आकाश और अनंत के बराबर हिस्सा

नई दिल्लीएक महीने पहले
देश के कॉर्पोरेट घरानों में यह इस तरह का हाल में पहला मामला है जहां पहले ही सब कुछ तय किया जा रहा है।
  • काउंसिल में मुकेश अंबानी के तीनों बच्चों ईशा, आकाश और अनंत को उत्तराधिकारी बनाया जाएगा
  • इस काउंसिल में परिवार के सभी सदस्यों को बराबर का प्रतिनिधित्व मिलेगा

देश के सबसे बड़े कॉर्पोरेट घराने रिलायंस इंडस्ट्रीज समूह में अब भविष्य के उत्तराधिकारी को लेकर तैयारी शुरू हो गई है। खबर है कि कंपनी के मालिक मुकेश अंबानी फैमिली काउंसिल बनाकर आनेवाले समय में अपने बच्चों के लिए सब कुछ स्पष्ट रखना चाहते हैं। अंबानी इस काउंसिल में जिन लोगों को उत्तराधिकारी बनाएंगे उसमें उनके तीनों बच्चों आकाश, अनंत और ईशा अंबानी होंगी। इसी में एक बाहरी व्यक्ति भी होगा जो मेंटर और सलाहकार के रूप में काम करेगा। देश के कॉर्पोरेट घरानों में यह इस तरह का हाल में पहला मामला है जहां पहले ही सब कुछ तय किया जा रहा है।

...ताकि उनके बच्चों में न हो पारिवारिक विवाद

मुकेश अंबानी की इस योजना के पीछे दरअसल वह कारण है जो उन्होंने कंपनी की स्थापना करनेवाले धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद देखा था। उनके निधन के बाद मुकेश और अनिल अंबानी का विवाद पूरी दुनिया ने देखा और दोनों भाई अलग हो गए। इसलिए मुकेश अंबानी उस तरह की स्थितियों को किनारे कर पहले ही सब कुछ तय कर देना चाहते हैं। 63 वर्षीय अंबानी दुनिया के चौथे सबसे अमीर बिजनेसमैन हैं। उनकी संपत्ति 80 अरब डॉलर से ज्यादा है। इस योजना के पीछे आसानी से कारोबार को चलाने का उद्देश्य है। इस तरह उनका कारोबार हमेशा की तरह बिना किसी पारिवारिक झंझट के चलता रहेगा।

परिवार के सभी सदस्य होंगे काउंसिल में शामिल

लाइव मिंट की खबर के मुताबिक, मामले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने बताया है कि अंबानी यह फैसला इसलिए लेने का विचार कर रहे हैं ताकि रिलायंस के बिजनेस अंपायर के लिए उत्तराधिकारी तय किया जा सके। इस काउंसिल में परिवार के सभी सदस्यों को बराबर की हिस्सेदारी मिलेगी। इसमें अंबानी के बेटे आकाश अंबानी, अनंत अंबानी और बेटी ईशा अंबानी भी शामिल होंगी।

काउंसिल में परिवार के अलावा एक सदस्य बाहर का होगा

खबर के मुताबिक, काउंसिल में परिवार के बाहर का भी एक सदस्य शामिल होगा। जो कि मेंटर और सलाहकार का काम करेगा। हालांकि, अभी इस पर रिलायंस इंडस्ट्रीज ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

आरआईएल में निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी काउंसिल

काउंसिल आरआईएल में निर्णय लेने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। यह प्लेटफॉर्म सहमत तरीके से प्रत्येक ब्रांच को एक प्रतिनिधित्व प्रदान करेगा और परिवार या उसके व्यवसायों से संबंधित महत्वपूर्ण निर्णय लेने में मदद करेगा। रिलायंस ने एक फाइलिंग में एक्सचेंज को बताया कि यह लेनदेन प्रमोटर ग्रुप की रिस्ट्रक्चरिंग का हिस्सा है। इसके तहत प्रमोटर और प्रमोटर ग्रुप से जुड़े लोग आपस में लेनदेन कर सकेंगे। मिंट की खबर के मुताबिक लेनदेन के बाद अंबानी परिवार के हर एक सदस्य के पास बराबर संख्या में शेयर होंगे।

क्या है फैमिली काउंसिल कैसे यह काम करेगी ?

सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील सुमित वर्मा बताते हैं कि फैमिली काउंसिल एक तरीके से फैमिली सेटलमेंट की तरह ही है। इसमें फैमिली की बात, उनके कानूनी मसले फैमिली तक ही सीमित रहेंगे बाहर नहीं जाएंगे। फैमिली काउंसिल में जितने भी सदस्य शामिल होंगे वे आपसी सूझबूझ के साथ फिर चाहे प्राॅपर्टी हो या बिजनेस, बराबर की हिस्सेदारी कर लेंगे। उदाहरण के लिए, आज मुकेश अंबानी के तीन बच्चें हैं। कल इन तीन बच्चों के भी बच्चे होंगे। दूसरी तरफ आज मुकेश अंबानी की संपत्ति 80 अरब डॉलर से ज्यादा है। आज से पांच साल या दस साल बाद यह बदल जाएगी। हो सकता है अभी के मुकाबले यह दोगुना हो जाए या कम भी हो सकती है। ऐसे में उस समय जो जिस कारोबार को प्रतिनिधित्व करेगा, वह उसकी हिस्सेदारी में जाएगा। फिर चाहे उस समय कारोबार प्रॉफिट में हो लाॅस में।

वहीं, लॉ फर्म SNG एंड पार्टनर्स के मैनेजिंग पार्टनर राजेश नारायण गुप्ता ने कहा कि काउंसिल में शामिल सदस्य आपस में अपने विचार और सिफारिशें रख सकेंगे और उसके आधार पर लोकतांत्रिक तरीके से निर्णय पर पहुंच सकेंगे। यहां पूरी तरह ट्रांसपेरेंसी और भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

मुकेश अंबानी और अनिल अंबानी में हो चुका है विरासत को लेकर विवाद

गौरतलब है कि भारत के सबसे बड़े उद्योगपतियों में एक धीरूभाई अंबानी की मौत के बाद उनके दोनों बेटों में कारोबार के बंटवारे को लेकर बहुत संघर्ष चला था। मुकेश अंबानी और उनके भाई अनिल अंबानी के बीच रिलायंस की विरासत को लेकर काफी लंबे समय तक विवाद चला था। हालत ऐसी हो गई थी कि दोनों भाइयों में बोलचाल तक बंद हो गई थी। मुकेश अंबानी नहीं चाहते हैं कि भविष्य में उनके बच्चों के साथ वो हो जो कि उनके साथ हो चुका है।

जून 2005 में मुकेश और अनिल अंबानी के बीच बंटवारा हुआ था

मुकेश अंबानी 1981 और अनिल अंबानी 1983 में रिलायंस से जुड़े थे। जुलाई 2002 में धीरूभाई अंबानी के निधन के बाद मुकेश अंबानी रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन बने। अनिल मैनेजिंग डायरेक्टर बने। नवंबर 2004 में पहली बार मुकेश और अनिल का झगड़ा सामने आया। जून 2005 में दोनों के बीच बंटवारा हुआ था। लेकिन, किस भाई को कौन सी कंपनी मिलेगी? इसका बंटवारा 2006 तक हो पाया था। दोनों भाइयों के बीच विवाद करीब 4 सालों तक चलता रहा था।

दोनों भाइयों के विवाद की पूरी कहानी यहां पढ़ें...

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मां कोकिलाबेन ने सुलझाया था दोनों बेटों का विवाद

परिवार में चल रहे इस विवाद से धीरूभाई अंबानी की पत्नी कोकिलाबेन परेशान थीं। कोकिलाबेन चाहती थीं कि किसी तरह दोनों भाइयों में समझौता हो जाए। बाद में कोकिला बेन ने कंपनी को दो हिस्सों में बांट कर दोनों बेटों को दे दिया। बंटवारे के बाद मुकेश अंबानी के हिस्से में पेट्रोकेमिकल के कारोबार रिलायंस इंडस्ट्रीज, इंडियन पेट्रो केमिकल्स कॉर्प लिमिटेड, रिलायंस पेट्रोलियम, रिलायंस इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड जैसी कंपनियां आईं। तो छोटे भाई ने अनिल धीरूभाई अंबानी ग्रुप बनाया। इसमें आरकॉम, रिलायंस कैपिटल, रिलायंस एनर्जी, रिलायंस नेचुरल रिसोर्सेस जैसी कंपनियां थीं।

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