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लगातार दूसरे साल मुश्किल:केंद्र सरकार को उधार लेना पड़ सकता है 1.58 लाख करोड़ रुपए, राज्यों को देना है 2.7 ट्रिलियन रुपए

मुंबईएक वर्ष पहले
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कोरोना महामारी के बीच केंद्र सरकार की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही है। राज्यों के रेवेन्यू लॉस के भुगतान के लिए सरकार को लगातार दूसरे साल उधार लेना पड़ सकता है। क्योंकि देशभर से उपभोग टैक्स कलेक्शन में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसकी बड़ी वजह कोरोना की वापसी को माना जा रहा है।

28 मई को काउंसिंल की बैठक होगी
ऐसी स्थिति में केंद्र को फाइनेंशियल इयर में अतिरिक्त उधार 1.58 लाख करोड़ रुपए लेना पड़ सकता है। न्यूज वेबसाइट लाइव मिंट के मुताबिक केंद्र द्वारा राज्यों को 2.7 लाख करोड़ रुपए का भुगतान करना है। सरकार 1.1 लाख करोड़ रुपए जुटाने की प्रयास करेगी, लेकिन इस पर अभी सरकार की ओर से कोई बयान नहीं जारी हुआ है। राज्यों को मुआवजे सहित अन्य मामलों पर चर्चा के लिए शुक्रवार को GST काउंसिल की बैठक होने वाली है।

महामारी से टैक्स कलेक्शन बुरी तरह प्रभावित
केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दी जाने वाली यह राशि उस मुआवजे का हिस्सा है, जिस पर केन्द्र ने देशभर में GST लागू करते समय सहमति जताई है। इसके तहत केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को किसी भी रेवेन्यू लॉस का भुगतान करने को कहा है। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने मुश्किलें बढ़ा दी, जिसका असर टैक्स कलेक्शन पर पड़ा है। अब इसे चुकाने के लिए सरकार को एक्सट्रा कर्ज लेना पड़ सकता है।

कोरोना की वजह से GDP ग्रोथ की रफ्तार धीमी पड़ने की आशंका
विदेशी और घरेलू रेटिंग एजेंसियां बिगड़ती आर्थिक हालात पर GDP ग्रोथ के आंकड़ों पर अनुमान घटाना शुरू कर दिया है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बार्कलेज के मुताबिक फाइनेंशियल इयर 2021-22 की GDP ग्रोथ पर 80 बेसिस पॉइंट की कटौती करते हुई ग्रोथ दर 9.2% रहने की आशंका जताई है। 3 मई को यह 11% से घटाकर 10% किया गया था।

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