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नई शुरुआत:निर्मला सीतारमण ने गिफ्ट सिटी में बीएसई, एनएसई के अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजेज पर रुपया-डॉलर वायदा व विकल्प कांट्रैक्ट्स लांच किए

नई दिल्ली2 वर्ष पहले
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पिछले एक दशक में भारत से जुड़ी वित्तीय सेवाओं के बाजार का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों में चला गया है। गिफ्ट-आईएफएस में रुपया-डॉलर एफएंडओ कांट्रैक्ट लांच होने से ये कारोबार वापस भारत आएंगे। - Dainik Bhaskar
पिछले एक दशक में भारत से जुड़ी वित्तीय सेवाओं के बाजार का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों में चला गया है। गिफ्ट-आईएफएस में रुपया-डॉलर एफएंडओ कांट्रैक्ट लांच होने से ये कारोबार वापस भारत आएंगे।
  • रुपया-डॉलर कांट्रैक्ट्स की ट्रेडिंग से दूसरे देशों में चले गए अधिकांश कारोबार वापस भारत आ जाने की उम्मीद
  • पूरी दुनिया के कारोबारियों के लिए सभी समय जोन में हर दिन 22 घंटे के लिए उपलब्ध रहेंगे ये कांट्रैक्ट्स

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को दो अंतरराष्ट्र्रीय एक्सचेंजेज पर रुपया-डॉलर वायदा एवं विकल्प कांट्रैक्ट्स लांच किए। ये दो अंतरराष्ट्रीय एक्सचेंजेज हैं- बीएसई का इंडिया आईएनएक्स और एनएसई का एनएसई-आईएफएससी। सीतारमण ने वीडिया कान्फ्रेंस के जरिये गांधीनगर के गुजरात इंटरनेशनल फाइनेंस सेंटर टेक-सिटी (गिफ्ट सिटी) के इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर (आईएफएससी) में ये कांट्रैक्ट्स लांच किए।

आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, रोजगार में होगा इजाफा
पिछले करीब एक दशक में भारत से जुड़ी वित्तीय सेवाओं के बाजार का एक बड़ा हिस्सा दूसरे देशों के अंतरराष्ट्रीय वित्तीय केंद्रों में चला गया है। इन कारोबारों को भारत लाना देश के लिए फायदेमंद है, क्योंकि इससे देश में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी और रोजगार में भी इजाफा होगा। इसके लिए गिफ्ट-आईएफएससी के एक्सचेंजेज में रुपया-डॉलर कांट्र्रैक्टर लांच करना एक सही दिशा में उठाया गया कदम है।

पूरी दुनिया के कारोबारियों के लिए 22 घंटे के लिए उपलब्ध रहेंगे ये कांट्रैक्ट्स
ये सौदे गिफ्ट-आईएफएससी से पूरी दुनिया के कारोबारियों के लिए सभी समय जोन में हर दिन 22 घंटे के लिए उपलब्ध रहेंगे। गिफ्ट-आईएफएससी में ट्र्रेडिंग का विश्वस्तरीय माहौल है और इसकी टैक्स प्रणाली भी प्रतिस्पर्धी है। इसलिए माना जा रहा है कि रुपया-डॉलर कांट्रैक्ट्स की ट्रेडिंग से दूसरे देशों में चले गए कारोबार का एक बड़ा हिस्सा भारत आ जाएगा। इससे बड़े वैश्विक ट्रेडर्स भारत में ट्र्रेड करने लगेंगे और भारत का आईएफएससी पूरी दुनिया से जुड़ जाएगा।

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