आर्थिक सुधार / नीति आयोग ने कहा- नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सांख्यिकीय ढांचे में बदलाव जरूरी



राजीव कुमार। राजीव कुमार।
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राजीव कुमार।राजीव कुमार।

  • वाइस चेयरमैन बोले- रियल टाइम डेटा मिलेगा तभी नीतियों की सही समीक्षा हो सकेगी
  • सांख्यिकीय ढांचे को तब्दील करने के लिए वर्ल्ड बैंक से सलाह ली जा रही हैः राजीव कुमार
     

Dainik Bhaskar

May 26, 2019, 01:50 PM IST

नई दिल्ली. नीति आयोग के वाइस चेयरमैन राजीव कुमार ने कहा है कि नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सांख्यिकीय ढांचे में बदलाव जरूरी है। उनका मानना है कि भारत के सांख्यिकीय ढांचे को वर्ल्ड बैंक से भी संबद्ध करना होगा, जिससे बाहर हो रही हलचल के मुताबिक खुद को तैयार किया जा सके।

 

विश्व बैंक कर रहा मार्गदर्शन

उनका कहना है कि सांख्यिकीय ढांचे को तब्दील करने के लिए वर्ल्ड बैंक से सलाह ली जा रही है। जब रियल टाइम डेटा मिलेगा तभी नीतियों की सही समीक्षा हो सकेगी।
 
एक्सपर्ट्स भी बदलाव पर सहमत
रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन और आर्थिक सलाहकार रहे अरविंद सुब्रमण्यम ने भी सांख्यिकीय ढांचे में बदलाव का समर्थन किया है। उनका कहना है कि जीडीपी के आंकड़े सही तस्वीर को नहीं दिखा रहे हैं। आंकड़ों की वैधता तय करने का काम किसी निष्पक्ष संस्था को दिया जाना चाहिए। 

 

बीमार सरकारी कंपनियों का निजीकरण हो सकता है
एक सवाल के जवाब में राजीव कुमार ने कहा कि खस्ताहाल सरकारी कंपनियों की सूची तैयार की जा रही है। इन सभी का निजीकरण किया जा सकता है। प्रधानमंत्री कार्यालय ने नीति आयोग से खस्ताहाल सरकारी कंपनियों की व्यावहारिकता परखने को कहा था। आयोग पहले ही 34 खस्ताहाल सार्वजनिक कंपनियों के निजीकरण की सलाह केंद्र को दे चुका है। इनमें एयर इंडिया भी शामिल है। 

 

विनिवेश से 90 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य 
राजीव ने कहा, निवेश एवं सार्वजनिक संपत्ति प्रबंधन विभाग इस पर काम कर रहा है और यह काफी आगे बढ़ चुका है। सरकार का 2019-20 में सार्वजनिक कंपनियों के विनिवेश से 90 हजार करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य है। जबकि चालू वित्त वर्ष में विनिवेश से एक लाख करोड़ रुपए की प्राप्ति होने का अनुमान है जो बजट अनुमान से अधिक है।

 

खेती की लागत कम होगी, तभी दोगुनी हो सकती है आय
2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के मोदी सरकार के वायदे पर राजीव कुमार का कहना है कि खेती की लागत कम होगी, तभी किसानों की आय दोगुनी हो सकती है। किसानों को मत्स्य पालन, पोल्ट्री और फूल उत्पादन जैसे व्यवसायों की तरफ भी ध्यान देना होगा।

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