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अमेरिका / रघुराम राजन ने कहा- नोटबंदी, जीएसटी से डगमगाई भारत की अर्थव्यवस्था



Notes Ban, GST Held Back India's Economic Growth: Raghuram Rajan
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Notes Ban, GST Held Back India's Economic Growth: Raghuram Rajan

  • पूर्व गवर्नर ने कहा- सात फीसदी की विकास दर देश की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं
  • एनपीए से निपटना जरूरी, जिससे बैलेंस शीट क्लियर हों और बैंक पटरी पर आ सकें

Dainik Bhaskar

Nov 11, 2018, 09:15 AM IST

वॉशिंगटन. नोटबंदी और जीएसटी से पिछले साल भारत की आर्थिक विकास दर में गिरावट आई। वहीं, सात फीसदी की मौजूदा विकास दर भारत की जरूरतों के लिए पर्याप्त नहीं है। ये बातें भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन ने शुक्रवार को कहीं। वे बर्कले स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफॉर्निया में मौजूद थे।

फ्यूचर ऑफ इंडिया पर बोले रघुराम राजन

  1. राजन ने ‘फ्यूचर ऑफ इंडिया’ पर लोगों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘2012 से 2016 तक भारत की विकास दर काफी तेज रही। नोटबंदी और जीएसटी विकास दर के लिए बड़े झटके साबित हुए, जिसका गंभीर असर पड़ा। इससे विकास दर ऐसे वक्त गिरी, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था काफी तेज थी।’’

  2. उन्होंने कहा, ‘‘सच यही है कि सात फीसदी की विकास दर उन लोगों के लिए पर्याप्त नहीं है, जो श्रम बाजार में आ रहे हैं। उन्हें रोजगार देने की जरूरत है। इस वजह से हमें अधिक विकास दर की जरूरत है। सात फीसदी की विकास दर से हम संतुष्ट नहीं हो सकते।’’

  3. तेल की बढ़ती कीमतें बड़ा मसला

    राजन ने कहा कि भारत की विकास दर फिर रफ्तार पकड़ रही है, लेकिन तेल की कीमतें इसमें रुकावट डाल रही हैं। तेल आयात में होने वाली दिक्कतें भारतीय अर्थव्यवस्था को थोड़ा मुश्किल बना सकती हैं।

  4. एनपीए के लिए प्लानिंग जरूरी

    एनपीए में बढ़ोतरी पर राजन ने कहा कि कर्ज से निपटना जरूरी है, जिससे बैलेंस शीट क्लियर हों और बैंक की स्थिति सुधरें। बैंकों के फंसे कर्ज की समस्या दूर करने के लिए केवल बैंक करप्सी कोड से मदद नहीं मिलेगी। देश में एनपीए की समस्या को दूर करने के लिए प्लानिंग की जरूरत है।

  5. आरबीआई के पूर्व गवर्नर ने कहा कि कि भारत में विकास की अपार क्षमता है। अगर विकास दर सात फीसदी से नीचे जाती है तो इसमें हमारी ही गलती है। यह वह आधार है, जिसकी मदद से भारत को अगले 10-15 साल तक विकास करना है।

  6. देश के सामने तीन बड़ी बाधाएं

    राजन ने कहा कि इस वक्त देश तीन महत्वपूर्ण बाधाओं से गुजर रहा है। पहला इंफ्रास्ट्रक्चर है, जो प्रारंभिक स्तर पर अर्थव्यवस्था को प्रेरित करता है। दूसरा, बिजली क्षेत्र की बाधाओं को दूर करने के लिए अल्पकालिक लक्ष्य बनना चाहिए। तीसरी बाधा बैंकों का एनपीए है।

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