तेल कंपनियों को सितंबर तिमाही में 2748 करोड़ का नुकसान:पेट्रोल, डीजल और LPG की कीमतों में बढ़ोतरी न होने के कारण हो रहा घाटा

नई दिल्ली3 महीने पहले
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जुलाई-सितंबर तिमाही में देश की 3 सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑइल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) को कुल मिलाकर 2748.66 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। तेल कंपनियों के मुताबिक पेट्रोल, डीजल और घरेलू LPG की कीमतों में बढ़ोतरी न होने के कारण कंपनियों को ये नुकसान उठाना पड़ रहा है।

HPCL को सबसे ज्यादा नुकसान
कंपनियों के द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार IOCL को सितंबर तिमाही में 272 करोड़ रुपए का घाटा हुआ है जो कि पिछली तिमाही में 1995 करोड़ रुपए था। वहीं HPCL ने 2172 करोड़ रुपए का नुकसान दर्ज किया है, जो कि जून तिमाही में रिकॉर्ड 10196 करोड़ रुपए था। BPCL का दूसरी तिमाही में नुकसान 304 करोड़ रुपए था, पहली तिमाही में ये नुकसान 6263 करोड़ रुपए का था।

घाटे में तेल बेच रही कंपनियां
बीते कई महीनों से कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना हुआ है, लेकिन रिटेल पंप की पेट्रोल-डीजल के दाम लगभग 85-86 डॉलर प्रति बैरल के हिसाब से थीं। इससे कंपनियों को नुकसान हुआ। सरकार ने बीते दिनों कहा था कि तेल कंपनियां खुदरा कीमतों में संशोधन करने के लिए स्वतंत्र हैं। हालांकि तीनों सरकारी तेल कंपनियों ने दरों को फ्रीज करने के कारणों के बारे में जानकारी नहीं दी है।

तेल कंपनियों को सरकार ने दी 22,000 करोड़ रुपए की राहत
पिछले महीने तेल कंपनियों को राहत देते हुए केंद्र सरकार ने बड़ा बोनांज देने का ऐलान किया था। तक सरकारी ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को रसोई गैस के घाटे की भरपाई के लिए 22,000 करोड़ रुपए के आवंटन को मंजूरी दी गई थी। तब सरकार ने कहा था ये कंपनियां LPG गैस मार्केट रेट से नीचे बेचकर नुकसान उठा रही हैं, ऐसे में यह सब्सिडी देकर सरकार उन्हें राहत दे रही है।

कैसे तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें?
जून 2010 तक सरकार पेट्रोल की कीमत निर्धारित करती थी और हर 15 दिन में इसे बदला जाता था। 26 जून 2010 के बाद सरकार ने पेट्रोल की कीमतों का निर्धारण ऑयल कंपनियों के ऊपर छोड़ दिया। इसी तरह अक्टूबर 2014 तक डीजल की कीमत भी सरकार निर्धारित करती थी, लेकिन 19 अक्टूबर 2014 से सरकार ने ये काम भी ऑयल कंपनियों को सौंप दिया।

अभी ऑयल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय मार्केट में कच्चे तेल की कीमत, एक्सचेंज रेट, टैक्स, पेट्रोल-डीजल के ट्रांसपोर्टेशन का खर्च और बाकी कई चीजों को ध्यान में रखते हुए रोजाना पेट्रोल-डीजल की कीमत निर्धारित करती हैं।

चुनाव में लग जाता है पेट्रोल-डीजल की कीमतों पर ब्रेक
एक्सपर्ट्स के अनुसार सरकार भले ही पेट्रोल-डीजल की कीमत निर्धारित करने में अपनी भूमिका से इनकार करती हो, लेकिन बीते सालों में ऐसा देखा गया है कि चुनाव के दौरान सरकार जनता को खुश करने के लिए पेट्रोल-डीजल के दाम नहीं बढ़ाती है। पिछले सालों का ट्रेंड बता रहा है कि चुनावी मौसम में जनता को पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों से राहत मिली है।

पेट्रोल-डीजल के आज के दाम
देश में तेल के दाम लगभग पिछले 5 महीने से स्थिर हैं। हालांकि जुलाई में महाराष्ट्र में पेट्रोल जरूर पांच रुपए और डीजल तीन रुपए प्रति लीटर सस्ता हुआ था, लेकिन बाकी राज्यों में दाम जस के तस बने हुए हैं।