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कोविड-19 लोन रिजॉल्यूशन फ्रेमवर्क:सिर्फ वे लोन ही रिस्ट्रक्चर किए जाएंगे, जो 1 मार्च तक स्टैंडर्ड थे और जिनमें कोई डिफॉल्ट नहीं हुआ था : आरबीआई

नई दिल्ली7 महीने पहले
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1 मार्च को जिन लोन अकाउंट में 30 दिनों से ज्यादा समय से भुगतान नहीं हुआ था, लेकिन उन्हें रेगुलराइज कर दिया गया, ऐसे अकाउंट 7 जून 2019 को जारी प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क के तहत रिजॉल्व होंगे - Dainik Bhaskar
1 मार्च को जिन लोन अकाउंट में 30 दिनों से ज्यादा समय से भुगतान नहीं हुआ था, लेकिन उन्हें रेगुलराइज कर दिया गया, ऐसे अकाउंट 7 जून 2019 को जारी प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क के तहत रिजॉल्व होंगे
  • 6 अगस्त को जारी हुआ था कोविड-19 रिजॉल्यूशन फ्रेमवर्क
  • आरबीआई ने कई प्रकार के लोन को लेकर स्पष्टीकरण दिया

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने स्पष्ट किया है कि कोरोनावायरस महामारी से संबंधित रिजॉल्यूशन फ्रेमवर्क के तहत सिर्फ वे लोन ही रिस्ट्रक्चर किए जाएंगे, जो 1 मार्च को स्टैंडर्ड थे और जिनमें कोई डिफॉल्ट नहीं हुआ था। यह रिजॉल्यूशन फ्रेमवर्क 6 अगस्त में जारी हुआ था। आरबीआई ने कई अन्य प्रकार के लोन के रिजॉल्यूशन को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की।

आरबीआई ने कहा कि 1 मार्च 2020 को जिन लोन अकाउंट में 30 दिनों से ज्यादा समय से भुगतान नहीं हुआ था, लेकिन उन्हें बाद में रेगुलराइज कर दिया गया, वे कोविड-19 रिजाल्यूशन फ्रेमवर्क के तहत रिजॉल्यूशन के योग्य नहीं होंगे। क्योंकि रीस्ट्रक्चवरिंग फ्रेमवर्क सिर्फ योग्य बॉरोअर पर ही लागू होगा, जो 1 मार्च 2020 को स्टैंडर्ड श्रेणी में थे। हालांकि ऐसे अकाउंट 7 जून 2019 को जारी प्रूडेंशियल फ्रेमवर्क के तहत रिजॉल्व किए जा सकेंगे।

अंडर-इंप्लीमेंटेशन प्रोजेक्ट लोन

रेगुलेटर ने कहा कि ऐसे अंडर-इंप्लीमेंटेशन प्रोजेक्ट लोन, जिनमें डेट ऑफ कमेंसमेंट ऑफ ऑपरेशंस (डीसीसीओ) आगे बढ़ाया गया है, वे रिजॉल्यूशन फ्रेमवर्क के दायरे से बाहर होंगे। ऐसे लोन अकाउंट 7 फरवरी 2020 को जारी निर्देश और निश्चित कैटेगरी के कर्जदाताओं के लिए लागू अन्य प्रासंगिक निर्देशों से गवर्न होंगे। मल्टीपल लेंडर्स द्वारा किसी एक बॉरोअर को दिए गए जिन लोन का रिजॉल्यूशन हो चुका है, उन मामलों में सभी लेंडिंग संस्थानों को एक इंटर-क्रेडिट एग्रीमेंट करना होगा।

100 करोड़ रुपए से ज्यादा के लोन

क्या 100 करोड़ रुपए या इससे ज्यादा के लोन का किसी एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी से इंडिपेंडेंट क्रेडिट इवेल्यूएशन कराना होगा। इस बारे में आरबीआई ने कहा कि यदि एक से अधिक रेटिंग एजेंसी से क्रेडिट ओपिनियन लिया गया है, तो वे भी क्रेडिट ओपिनियन निश्चित रूप से आरपी4 या उससे ऊपर की रेटिंग के होने चाहिएं।

एमएसएमई डिफिनीशन का असर

आरबीआई ने यह भी स्पष्टट किया कि माइक्रो, स्मॉल एवं मीडियम एंटरप्राइजेज (एमएसएमई) के लिए 26 जून से लागू नए डिफिनीशन से रिजॉल्यूशन की उनकी योग्यता प्रभावित नहीं होगी। उनका रिजॉल्यूशन 1 मार्च 2020 के डिफिनीशन के आधार पर होगा।

किसी भी सेक्टर की किसी भी कंपनी का लोन रीकास्ट हो सकेगा

आरबीआई ने कहा कि 6 अगस्त के सर्कुलर के एनेक्स के पैरा 2 में दिए गए एक्सक्लूजन को छोड़ कर और 7 सितंबर के सर्कुलर में जिन सेक्टर स्पेशिफिक थ्रशोल्ड का जिक्र नहीं है उन्हें छोड़कर बाकी किसी भी सेक्टर की किसी भी कंपनी के लोन का रिजॉल्यूशन हो सकता है। हालांकि लेंडर्स लोन रिजॉल्यूशन की योग्यता को लेकर अपना खुद का इंटरनल असेसमेंट करेंगे।

प्रॉपर्टी पर दिए गए लोन को भी रीकास्ट किया जा सकेगा

प्रॉपर्टी के अगेंस्ट दिए गए लोन को भी रीकास्ट किया जा सकेगा, बशर्ते वे पर्सनल लोन की श्रेणी में नहीं आते हों। कितने के लोन का रीकास्ट हो सकेगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इनवोकेशन (1 मार्च 2020) के दिन बकाया कितना था। शर्त यह भी है कि ये लोन स्टैंडर्ड होने चाहिएं।

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