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चौंकाने वाली तेजी:रुचि सोया, आलोक इंडस्ट्रीज के रास्ते आर्किड फार्मा का शेयर, 18 से 2680 रुपए गया अब 1400 पर आया

मुंबई4 महीने पहले
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  • आर्किड फार्मा के शेयरों में नवंबर से लेकर अप्रैल तक हर दिन अपर सर्किट लगा
  • अप्रैल के बाद से लगातार इस शेयर में गिरावट आ रही है और अब तक 1000 रुपए टूट गया है

पिछले साल नवंबर में आर्किड फार्मा का शेयर 18 रुपए पर कारोबार कर रहा था। इसी साल अप्रैल में यह 2600 रुपए पर चला गया। अब यह 1400 रुपए पर आ गया है। यह ठीक उसी तरह से है जैसे इसके पहले रुचि सोया, आलोक इंडस्ट्रीज और बाफना फार्मा के शेयरों में उतार-चढ़ाव देखा गया था।

हर दिन अपर सर्किट लगा

आर्किड फार्मा में नवंबर के बाद से लगातार हर दिन 5% का अपर सर्किट लग रहा था। यानी एक दिन में इससे ज्यादा इसकी कीमत नहीं बढ़ सकती थी। रुचि सोया की बात करें तो यह 30 रुपए से शेयर बढ़ना शुरू हुआ था और 1535 रुपए तक जा पहुंचा था। हालांकि बीच में यह 400 रुपए गया और अब एक हफ्ते में 50% बढ़ कर 600 से 1100 रुपए पर चला गया है।

बाफना इंडस्ट्रीज की बात करें तो इसका शेयर 10 रुपए पर कारोबार कर रहा था। इसी साल यह 195 रुपए पर चला गया और अब 135 रुपए पर है। आलोक इंडस्ट्रीज का शेयर 5 रुपए में ट्रेड करता था। 61 रुपए तक जाने के बाद यह अब 20 रुपए पर कारोबार कर रहा है।

शेयरों की संख्या काफी कम है

शेयरों की संख्या में कमी के चलते पिछले सात महीनों में आर्किड फार्मा के शेयरों में लगभग 77 गुना का उछाल दिखा है। अब यह उछाल आखिरी पड़ाव पर आ चुका है। इसके नए मालिक को फर्म में लगभग 98% की अपनी हिस्सेदारी बेचनी होगी। दिवालियापन से उबरने के बाद नवंबर में यह कंपनी फिर से लिस्ट हुई थी।

नए मालिकों को बेचनी होती है हिस्सेदारी

दरअसल रेगुलेटर के नियमों के मुताबिक, इस तरह की कंपनी में नए मालिकों को हिस्सेदारी बेचनी होती है। इस मामले में धानुका लेबोरेटरीज नई मालिक है। अगले कुछ महीनों में वह कम से कम 10% हिस्सेदारी बेच सकती है। आर्किड उन चंद मुट्ठी भर कंपनियों में से है जिसने दिवालियापन की कार्रवाइयों से बाहर निकलने के बाद अच्छा प्रॉफिट कमाया है और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।

जोखिम भरी तेजी होती है

बाजार पर निगाह रखने वाले कुछ मार्केट एक्सपर्ट्स की माने तो इस तरह की तेजी निवेशकों के लिए जोखिम भरी साबित हो सकती है क्योंकि ऐसी कंपनियों का फंडामेंटल कुछ ज्यादा अच्छा नहीं होता है। भविष्य में ऐसी घटनाओं को कम करने के लिए दिसंबर में सेबी ने 18 महीने के समय को कम करके 12 महीने करने का फैसला किया। मतलब मालिकों को 12 महीनों में हिस्सेदारी घटानी होगी।

यह सही निवेश नहीं है

विश्लेषकों के मुताबिक, यह वास्तव में कोई इन्वेस्टमेंट नहीं है। यह फन और एक्साइटमेंट है। धानुका ने तीन साल की कानूनी तकरार के बाद आर्किड में अपनी दावेदारी जीती है। रिस्ट्रक्चरिंग में क्रेडिटर्स को 1% मिला, जबकि अन्य 1% हिस्सा मौजूदा शेयरधारकों के पास जा रहा है। 22 मई को कंपनी ने कहा कि सार्वजनिक होल्डिंग को बढ़ावा देने के अलावा आर्किड का बोर्ड कंपनी के साथ धानुका लैबोरेटरीज को मर्ज करने के प्रस्ताव का भी मूल्यांकन कर रहा है।

इसके 99% शेयर मालिकों और उधारदाताओं के बीच हैं। इसके महज दो हजार शेयर ही प्रतिदिन ट्रेड किए जाते हैं।

निवेश करने के लिए लोग आ रहे हैं

कंपनी के जो भी बचे खुचे शेयर किसी के पास हैं अब उनमें निवेश करने वाले काफी ज्यादा लोग आ रहे हैं। नवंबर के बाद से तो इसका डेली लिमिट 100 गुना तक बढ़ गया है। जैसे-जैसे हिस्सेदारी बेचने का समय नजदीक आ रहा है इसकी कीमतें घटती जा रही हैं। अप्रैल में 2680 रुपए पर इसका शेयर रिकॉर्ड बनाया था।

अभी शेयर 1419 रुपए पर कारोबार कर रहा है

आर्किड का शेयर आज 1419 रुपए पर कारोबार कर रहा है। 3 नंवबर को यह केवल 18 रुपए पर कारोबार कर रहा था। कई महीनों से सस्पेंशन के बाद 3 नवंबर को इसकी ट्रेडिंग फिर से शुरू हुई थी। आर्किड फार्मा को एंटी बैक्टीरियल दवाओं के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले एक्टिव फार्मक्यूटिकल इंग्रेडिएंट्स ज्यादातर रेवेन्यू प्राप्त होता है। लक्ष्मी विलास बैंक लिमिटेड ने इसे 2017 में दिवालियापन कोर्ट (bankruptcy court) में घसीटा था। क्योंकि कंपनी लगभग 50 करोड़ रुपए का लोन वापस देने में विफल रही थी।

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