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पेटीएम IPO पर संकट:पूर्व डायरेक्टर ने IPO रोकने की मांग की, 27,500 डॉलर का किया था निवेश, एक भी शेयर नहीं मिला

मुंबई4 महीने पहले
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  • पेटीएम इश्यू के जरिए 16,600 करोड़ रुपए जुटाना चाहती है
  • इसके इश्यू का भाव 3500 रुपए से ज्यादा हो सकता है

देश के अब तक के सबसे बड़े IPO की तैयारी कर रही पेटीएम पर संकट का बादल मंडरा रहा है। इस IPO को इसके एक पूर्व डायरेक्टर ने रोकने की मांग की है। डायरेक्टर का आरोप है कि उसने 20 साल पहले इस कंपनी में 27,500 डॉलर का निवेश किया था, पर उसे एक भी शेयर नहीं दिया गया।

सक्सेना का दावा, वे को-फाउंडर हैं

71 वर्षीय अशोक कुमार सक्सेना का कहना है कि वे कंपनी के को-फाउंडर यानी सह संस्थापक हैं। उन्होंने 20 साल पहले 27,500 डॉलर का निवेश किया था। आज की तारीख में इसकी रुपए में कीमत 20.35 लाख रुपए है। इस मामले में सक्सेना ने दिल्ली पुलिस में मामला भी दर्ज कराया है। पेटीएम ने दिल्ली पुलिस को दिए जवाब में कहा कि सक्सेना उसे परेशान कर रहे हैं। सक्सेना ने इस आरोप को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि पेटीएम जैसी हाई प्रोफाइल कंपनी को परेशान करने की उनकी हैसियत नहीं है।

जुलाई में DRHP जमा कराया था

पेटीएम ने IPO की मंजूरी के लिए जुलाई में सेबी के पास जो ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रोसपेक्टस (DRHP) जमा कराया है, उसमें इसकी जानकारी दी है। इसे क्रिमिनल प्रोसिडिंग के कॉलम में बताया गया है। सक्सेना ने इस मामले में सेबी का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने कहा है कि इस IPO को रोका जाना चाहिए। अगर नहीं रोका गया तो निवेशकों का इससे नुकसान हो सकता है।

सेबी मंजूरी देने में देरी कर सकती है

इस बारे में एक निवेश फर्म के अधिकारी का कहना है कि हो सकता है कि सेबी इस मामले में IPO को मंजूरी देने में देरी कर दे। इससे IPO में देरी हो सकती है। पेटीएम का वैल्यू इस समय 25 अरब डॉलर का है। इस अधिकारी का कहना है कि सेबी को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इससे न तो कंपनी पर असर हो और न ही लिस्टिंग के बाद पब्लिक शेयरहोल्डर्स पर असर हो।

कानूनी पचड़े में फंस सकती है पेटीएम

हालांकि इसमें सेबी क्या फैसला करेगी, यह बाद की बात है। पर उससे पहले पेटीएम कानूनी पचड़े में फंस सकती है। पेटीएम के सीईओ विजय शेखर शर्मा और सक्सेना के बीच 2001 में एक पेज का हस्ताक्षर किया हुआ डॉक्यूमेंट सक्सेना के पास है। इसके मुताबिक, सक्सेना को पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन97 में 55% शेयर मिलेगा। बाकी का शेयर शर्मा के पास रहेगा।

पेटीएम ने कहा, एग्रीमेंट नहीं, लेटर ऑफ इंटेंट है

दिल्ली पुलिस को दिए जवाब में 29 जून को पेटीएम ने कहा है कि सक्सेना और पेटीएम के बीच जो डॉक्यूमेंट साइन किया गया है, वह केवल एक लेटर ऑफ इंटेंट है। यह कोई एग्रीमेंट नहीं है। पेटीएम ने यह भी दावा पुलिस को दिए जवाब में किया है कि सक्सेना को-फाउंडर नहीं हैं। देश भर में पेटीएम इस समय जाना माना नाम है। पेटीएम ने कंपनी को बनाने के समय साल 2000 से 2004 के बीच जो डॉक्यूमेंट सरकार के पास जमा किया है, उसके मुताबिक, सक्सेना कंपनी के डायरेक्टर थे।

पेटीएम ने माना, सक्सेना डायरेक्टर थे

पेटीएम ने पुलिस को दिए जवाब में यह माना है कि सक्सेना कंपनी के पहले डायरेक्टर थे। पर बाद में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं रही। साल 2003-04 के करीब पेटीएम ने सक्सेना के शेयरों को एक भारतीय कंपनी को ट्रांसफर कर दिया था। इसके लिए सक्सेना भी राजी थे। हालांकि सक्सेना का कहना है कि उन्हें कोई शेयर मिला ही नहीं और इस तरह की कोई अंडरस्टैंडिंग भी नहीं थी। सक्सेना ने रॉयटर्स को दिए जवाब में कहा है कि वे इतने सालों तक इसलिए चुप थे क्योंकि एक तो मेडिकल का मामला उनके परिवार में था और दूसरा वो डॉक्यूमेंट गायब हो गया था, जो एक पेज का था। हालांकि पिछले साल गर्मी में यह डॉक्यूमेंट मिल भी गया।

जुलाई में दिल्ली पुलिस में मामला पहुंचा

पेटीएम और सक्सेना का यह मामला जुलाई में दिल्ली कोर्ट में पहुंच गया था। सक्सेना ने कोर्ट से अपील की थी कि दिल्ली पुलिस को मामला दर्ज करने के लिए आदेश दिया जाए। इस मामले की सुनवाई अब 23 अगस्त को होगी।

1.45 लाख करोड़ रुपए है वैल्यूएशन

पेटीएम का अभी का वैल्यूएशन 1.45 लाख करोड़ रुपए आंका जा रहा है। पर आगे चलकर यह वैल्यूएशन 1.80 लाख करोड़ रुपए तक हो सकता है। यानी इस नए वैल्यूएशन पर इसके शेयरों का भाव 3200 से 3800 रुपए के बीच होगा। IPO में रिटेल निवेशकों के लिए केवल 10% हिस्सा है। QIB को 75% जबकि एचएनआई को 15% हिस्सा मिलेगा। पेटीएम की पैरेंट कंपनी वन97 कम्युनिकेशन स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट होगी। पेटीएम कंपनी का ब्रांड है।

कंपनी 8,300 करोड़ रुपए के फ्रेश शेयर जारी करेगी जबकि 8,300 करोड़ रुपए के शेयर वर्तमान शेयरधारक बेचेंगे।