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‘घरेलू’ सपोर्ट जरूरी:परिवारों में खपत जारी रहने से टिकाऊ बनेगी डिमांड, त्योहारी सीजन से दिसंबर तिमाही में निकली दबी मांग

16 दिन पहले
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  • चौथी तिमाही में अब तक आए PMI और GST कलेक्शन के आंकड़े दे रहे फेस्टिव सीजन से शुरू हुई इकोनॉमिक रिकवरी जारी रहने के संकेत
  • ICICI सिक्योरिटीज के मुताबिक सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर पर फोकस वाली फिस्कल पॉलिसी से बदल रहा है आर्थिक माहौल

कोरोना के चलते जो मांग दब गई थी, वह धीरे-धीरे लॉकडाउन उठने और त्योहारी सीजन की खरीदारी के चलते सामने आई है। इसकी झलक कंस्ट्रक्शन, मैन्युफैक्चरिंग और कुछ कंजम्पशन सेक्टर की मजबूत डिमांड के रूप में दिखी है। मौजूदा वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में कंपनियों की आमदनी में तेज उछाल आई। बाजार की उम्मीद से बेहतर और कमजोर परफॉर्मेंस देने वाली कंपनियों का अनुपात 4.3 का रहा।

मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर दोनों की डिमांड मजबूत बनी रह सकती है

ICICI सिक्योरिटीज का कहना है कि पिछली तिमाही में रिटेल सेक्टर की डिमांड में कमी आई लेकिन, वहां दबती रही मांग कोरोनावायरस संक्रमण घटने के साथ धीरे-धीरे सामने आ सकती है। चौथी तिमाही में आए PMI और GST कलेक्शन के आंकड़े बताते हैं कि फेस्टिव सीजन से शुरू हुई इकोनॉमिक रिकवरी जारी है। इससे यह भी पता चलता है कि मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज सेक्टर दोनों की डिमांड मजबूत बनी रह सकती है।

कैपिटल एक्सपेंडिचर पर फोकस वाली फिस्कल पॉलिसी से बदल रहा है आर्थिक माहौल

ब्रोकेरज फर्म के मुताबिक सरकार के कैपिटल एक्सपेंडिचर पर फोकस वाली फिस्कल पॉलिसी से आर्थिक माहौल बदल रहा है। इसको कम इंटरेस्ट रेट, बैंकिंग सिस्टम में पर्याप्त नकदी और कोरोना वायरस के संक्रमण में कमी से इकोनॉमी के पूरी तरह पटरी पर आ जाने की उम्मीद से बढ़ावा मिल रहा है। इन सब कारणों से बने सकारात्मक माहौल में कंपनियों और घर परिवारों की वह मांग टिकाऊ बन सकती है जो दबी मांग के तौर पर तीसरी तिमाही में बाहर निकली थी।

कंस्ट्रक्शन, कंजम्पशन, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की एक्टिविटी में डबल डिजिट ग्रोथ

इंडिया इंक के फाइनेंशियल रिजल्ट बताते हैं कि दिसंबर तिमाही में टोटल डिमांड कंस्ट्रक्शन, कंजम्पशन (कुछ FMCG प्रॉडक्ट, ऑटो और पेंट), मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (सीमेंट, बिल्डिंग मैटेरियल और केमिकल) की एक्टिविटी में डबल डिजिट ग्रोथ के रूप में सामने आई। सबसे ज्यादा रेवेन्यू ग्रोथ टेलीकॉम सेक्टर (20% से ज्यादा) की रही जबकि यूटिलिटी सेक्टर की ग्रोथ सामान्य (10% से कम) रही। घरेलू फार्मा कंपनियों की सेल्स ग्रोथ (5-25%) सालाना आधार पर सामान्य से मजबूत के बीच रही। रिटेल, लीजर, ट्रैवल और रेस्टोरेंट सेक्टर के अलावा रीजनल सीमेंट मैन्युफैक्चरिंग और पावर सेक्टर में कमजोरी के चलते की कुल मांग पर दबाव बना।

एक्सपोर्ट के मोर्चे पर बेहतर स्थिति; ऑटो, सेरामिक्स, केमिकल का निर्यात बढ़ा

एक्सपोर्ट के मोर्चे पर मांग की स्थिति बेहतर रही। ऑटो, सेरामिक्स, केमिकल का निर्यात बढ़ा। IT सर्विसेज के एक्सपोर्ट में स्थिरता रही। फार्मा सेक्टर की तरफ से अमेरिका को होने वाले निर्यात में कमी आई। मेटल और सीमेंट सेक्टर को दाम में होने वाली बढ़ोतरी का फायदा मिला। ऑयल कंपनियों को इनवेंटरी गेन हुआ।

बढ़े सरकारी खर्च से निजी क्षेत्र के निवेश में हुई बढ़ोतरी दिखना बाकी

ग्रोथ को टिकाऊ बनाने में निजी निवेश और खपत का अहम रोल होगा। सरकारी क्षेत्र के बढ़े खर्च के चलते निजी क्षेत्र के निवेश में कितनी बढ़ोतरी हुई है, वह दिखना बाकी है। फिलहाल यह भी पता नहीं चल पाया है कि लोगों में बचत की प्रवृत्ति बढ़ने से अब तक दबी हुई मांग के निकलने के बावजूद घर परिवारों की खपत कितनी टिकाऊ रह सकती है।

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