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महाराष्ट्र / विप्रो की पहली फैक्ट्री वाले गांव के लोगों के पास ~4750 करोड़ के शेयर

Dainik Bhaskar

Mar 17, 2019, 10:45 AM IST


People of Wipro's first factory village have shares of Rs 4750 crores
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People of Wipro's first factory village have shares of Rs 4750 crores
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  • दुनिया में 36वें सबसे अमीर व्यक्ति रहे अजीम प्रेमजी ने हाल ही में 34% शेयर दान किए
  • इससे उनका 80% पैसा कम हुआ, लेकिन वे दुनिया के तीसरे सबसे बड़े दानी बन गए

अमलनेर. महाराष्ट्र के जलगांव जिले का अमलनेर कस्बा करोड़पतियों से भरा हुआ है। 2.88 लाख आबादी वाले इस कस्बे में विप्रो कंपनी के करीब तीन फीसदी शेयर हैं। मौजूदा बाजार पूंजी देखें तो इनका मूल्य करीब 4,750 करोड़ रुपये है। खास बात यह है कि 1970 के दशक में इनमें से ज्यादातर शेयर कम कीमत पर दिए गए थे। हजारों शेयर तो उपहार में बांटे गए थे। अजीम प्रेमजी के पिता ने विप्रो की शुरुआत इसी गांव में फैक्ट्री लगाकर की थी।

प्रेमजी ने दान किए 21 अरब डॉलर

  1. हाल ही में एक बार फिर प्रेमजी ने 34% शेयर दान कर दिए हैं। ब्रिटेन की वेबसाइट कम्पेयर द मार्केट के अनुसार दान करने के मामले में वॉरेन बफेट (46.6 अरब डॉलर) और बिल गेट्स (41 अरब डॉलर) के बाद तीसरा नंबर माइकल ब्लूमबर्ग (6 अरब डॉलर) का था। अब 21 अरब डॉलर के साथ प्रेमजी तीसरे नंबर पर आ गए हैं। इससे उनका 80% पैसा कम हुआ, लेकिन वे दुनिया के तीसरे सबसे बड़े दानी बन गए।

  2. प्रेमजी ने खुद बांटे थे शेयर: सुनील

    2013 में प्रेमजी ने अमलनेर फैक्ट्री का दौरा किया था। उन्होंने हर कर्मचारी को खुद इंडक्शन कुकर दिए थे। अमलनेर में रहने वाले सुनील माहेश्वरी बताते हैं कि उस जमाने में सेठजी ने 100 रुपए अंकित मूल्य वाले शेयर कर्मचारियों, व्यापारियों को बांटे थे। करीब 55 से 60 हजार शेयर बांटे गए थे। उस समय के ज्यादातर कर्मचारियों की अगली पीढ़ियां अब करोड़पति हैं। 
     

  3. अरविंद मुथे को तो पता ही नहीं था कि उनके पिता उनके लिए करोड़ों रुपए के शेयर छोड़ गए हैं। उनके दोस्त ने जब उनका नाम विप्रो की एनुअल रिपोर्ट में शेयरहोल्डर्स की सूची में देखा तो उन्हें इसकी जानकारी दी।

  4. डागा परिवार में दो भाई और तीन बहनें हैं और उनके पिता विप्रो के कंज्यूमर प्रोडक्ट्स (बल्ब, साबुन) के एजेंट थे। 1970 के दशक में उनके पास 5 लाख रु. के शेयर थे, जिनकी मौजूदा कीमत 40 करोड़ रुपए के आसपास है। इसके अलावा जो शेयरहोल्डर्स हैं, उनमें किसान, किराना दुकान मालिक और सेवानिवृत्त लोग हैं। उस समय कुछ लोगों के लिए 100 रु. जुटा पाना भी मुश्किल था। 

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