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  • Petrol And Diesel Can Be Brought Under GST, May Be Taxed At Max Rate Of 28%, Govt To Lose 1 Lakh Crore Rupees In Revenue

ईंधन को सस्ता करने की तैयारी:GST के दायरे में लाए जा सकते हैं पेट्रोल-डीजल, 28% के मैक्सिमम रेट पर भी होंगे काफी सस्ते, सरकार का राजस्व करीब 1 लाख करोड़ घटेगा

नई दिल्ली14 दिन पहले
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ज्यादा टैक्स लगने की वजह से पेट्रोल और डीजल महंगा होने की शिकायत जल्द दूर हो सकती है। गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) पर मंत्रियों की समिति पेट्रोलियम उत्पादों के लिए देशभर में एक टैक्स रेट तय करने पर इसी हफ्ते विचार करेगी। पेट्रोल और डीजल को GST के दायरे में लाए जाने पर 28% के मैक्सिमम रेट पर भी इनके दाम काफी घटेंगे, लेकिन सरकार को इनसे मिलने वाले राजस्व में अच्छी-खासी कमी आएगी।

शुक्रवार को लखनऊ में GST काउंसिल की 45वीं बैठक में होगा विचार

पेट्रोलियम उत्पादों को GST के दायरे में लाने के प्रस्ताव पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता वाली समिति शुक्रवार को लखनऊ में GST काउंसिल की 45वीं बैठक में विचार करेगी। यह कोविड का प्रकोप शुरू होने के बाद से GST काउंसिल की पहली फिजिकल बैठक होगी। पिछली बैठक 12 जून को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई थी, जिसमें कोविड-19 पर रोकथाम लगाने या उसके इलाज में काम आने वाले सामान के टैक्स रेट को 30 सितंबर तक के लिए घटाया गया था।

GST पर मंत्रियों की समिति के तीन चौथाई सदस्यों की मंजूरी जरूरी

जानकारों के मुताबिक, पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को GST के दायरे में लाने के लिए उसके (GST के) सिस्टम में बदलाव करना होगा। इसके लिए GST पर मंत्रियों की समिति के तीन चौथाई सदस्यों यानी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों की मंजूरी जरूरी होगी। हालांकि, कुछ राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के प्रतिनिधि पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को GST के दायरे में लाने का विरोध कर रहे हैं। क्योंकि इससे उनकी कमाई का बड़ा जरिया केंद्र के कंट्रोल में आ जाएगा।

अप्रैल-जुलाई के दौरान पेट्रोलियम उत्पादों से 48% ज्यादा उत्पाद शुल्क

इस वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में यानी अप्रैल से जुलाई के बीच सरकार को पेट्रोलियम उत्पादों से हासिल होने वाले उत्पाद शुल्क में 48% का इजाफा हुआ है। सरकार को इस दौरान इस मद में एक लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का राजस्व मिला, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 67,895 करोड़ रुपए था। वित्त वर्ष 2020-21 में सरकार को पेट्रोल-डीजल से मिला टैक्स 88% उछलकर 3.35 लाख करोड़ रुपए हो गया था।

केंद्र और राज्य सरकारों का कुल राजस्व करीब 1 लाख करोड़ रुपए घटेगा

SBI के इकोनॉमिक रिसर्च डिपार्टमेंट ने इसी साल मार्च में एक रिपोर्ट जारी की थी, जिसमें उसने कहा था कि पेट्रोलियम प्रॉडक्ट्स को जीएसटी के दायरे में लाने से केंद्र और राज्य सरकारों के राजस्व में करीब 1 लाख करोड़ रुपए की कमी आएगी। यह रकम GDP के 0.4% के बराबर होगी।

GST सिस्टम में पेट्रोल 75 रुपए, डीजल 68 रुपए तक आने का अनुमान दिया था

SBI ने तब कहा था कि जीएसटी के दायरे में लाए जाने पर देशभर में पेट्रोल की कीमत 75 रुपए जबकि डीजल की कीमत 68 रुपए प्रति लीटर तक आ सकती है। उस समय दिल्ली में पेट्रोल 91.17 रुपए जबकि डीजल 81.94 रुपए प्रति लीटर की दर से मिल रहा था। SBI ने कीमतों का आंकड़ा 60 डॉलर प्रति बैरल के क्रूड और 73 रुपए प्रति डॉलर के एक्सचेंज रेट के हिसाब से निकाला था।

लगातार नौवें दिन पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं

गौरतलब है कि मंगलवार को लगातार नौवें दिन देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं हुआ। दिल्ली में पेट्रोल का प्राइस 101.19 रुपए जबकि डीजल का दाम 88.62 रुपए प्रति लीटर रहा।

पेट्रोल-डीजल की कीमतें कैसे तय होती हैं?

जून 2010 तक पेट्रोल की कीमत सरकार तय करती थी और उसे हर 15 दिन में बदलती थी। 26 जून 2010 के बाद उसने उसकी कीमत तय करने का जिम्मा ऑयल कंपनियों को दे दिया। इसी तरह, सरकार अक्टूबर 2014 तक डीजल की भी कीमत तय करती रही। उसने यह काम 19 अक्टूबर 2014 को ऑयल कंपनियों को दे दिया। ऑयल कंपनियां इंटरनेशनल मार्केट में क्रूड की कीमत, एक्सचेंज रेट, टैक्स, ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट वगैरह के हिसाब से पेट्रोल-डीजल की कीमत रोजाना तय करती हैं।

GST के दायरे में लाने में क्या परेशानी?

किसी भी सामान या सेवा पर GST तय करने से पहले देखा जाता है कि उससे पहले की व्यवस्था में केंद्र, राज्य और केंद्रशासित प्रदेश कुल कितना टैक्स लगा रहे थे, ताकि उनको किसी तरह का नुकसान नहीं उठाना पड़े। तकनीकी भाषा में इसे रेवेन्यू न्यूट्रल रेट (RNR) कहते हैं जो पेट्रोल-डीजल पर GST नहीं लागू करने में सबसे बड़ी बाधा है।

पेट्रोल-डीजल महंगा होने की वजह क्या है?

पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों की सबसे बड़ी वजह टैक्स है। केंद्र सरकार पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी लेती है। फिर राज्य सरकारें अपने हिसाब से अलग-अलग रेट से वैट और सेस वसूलती हैं। इससे पेट्रोल-डीजल का दाम बेस प्राइस से 3 गुना तक बढ़ जाता है।

सरकार की कमाई का बड़ा जरिया पेट्रोल-डीजल

2014 में मोदी सरकार बनने के बाद वित्त वर्ष 2014-15 में पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर एक्साइज ड्यूटी से 1.72 लाख करोड़ रुपए की कमाई हुई थी। यह आंकड़ा 2020-21 में 4.54 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया, यानी सिर्फ 6 साल में एक्साइज ड्यूटी से केंद्र सरकार की कमाई करीब तीन गुना बढ़ गई।

किन राज्यों को नुकसान, किन्हें फायदा?

SBI की इकोनॉमिक रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक, पेट्रोल-डीजल को GST के दायरे में लाने पर सबसे ज्यादा नुकसान महाराष्ट्र को होगा। उसके राजस्व में 10,424 करोड़ रुपए की कमी आ सकती है। राजस्थान की कमाई 6,388 करोड़ और मध्य प्रदेश की आमदनी 5,489 करोड़ रुपए घट सकती है। लेकिन उत्तर प्रदेश को 2,419 करोड़, हरियाणा को 1,832 करोड़, पश्चिम बंगाल को 1,746 करोड़ और बिहार को 672 करोड़ रुपए ज्यादा का टैक्स मिल सकता है।

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