महंगाई से राहत की उम्मीद नहीं:अगले साल 100 डॉलर के पार जा सकता है कच्चा तेल, इससे 10 रुपए और बढ़ जाएंगी पेट्रोल-डीजल की कीमतें

नई दिल्लीएक महीने पहले
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बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड के दाम अभी करीब 85 डॉलर प्रति बैरल हैं, जो अगले तीन से छह महीनों में 100 डॉलर प्रति बैरल तक जा सकते हैं। इसके 100 डॉलर तक पहुंचने पर घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल वर्तमान कीमतों से 8-10 रुपए प्रति लीटर और महंगे हो जाएंगे। राजस्थान और मध्यप्रदेश जैसे ज्यादा वैट वाले राज्यों में कीमतों में और इजाफा होगा।

इराक के तेल मंत्री एहसान अब्दुल जब्बारी के मुताबिक, अगले साल पहली और दूसरी तिमाही के बीच कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल का स्तर छू लेगा। ब्रेंट का वर्तमान भाव (85 डॉलर) पहले ही एक साल पहले (42.5 डॉलर) के मुकाबले दोगुना है। इससे भारत की मुश्किलें बढ़ गई हैं, जो जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा आयात करता है। यहां आयात बढ़ाना पड़ सकता है।

आने वाले दिनों में बढ़ेगी पेट्रोलियम की मांग
एसएंडपी ग्लोबल प्लैट्स एनालिटिक्स के मुताबिक, त्योहारों और शादियों के चलते अगले कुछ महीनों के दौरान भारत में पेट्रोलियम की मांग बढ़ेगी। रेटिंग एजेंसी इक्रा के वाइस प्रेसिडेंट और को-ग्रुप हेड प्रशांत वशिष्ठ के मुताबिक, कच्चा तेल 1 डॉलर प्रति बैरल महंगा होने पर देश में पेट्रोल-डीजल के दाम औसतन 55-60 पैसे प्रति लीटर बढ़ जाते हैं। ऐसे में यदि क्रूड 100 डॉलर पर पहुंचा तो पेट्रोल-डीजल के दाम 10 रुपए तक बढ़ सकते हैं।

भारत ने क्रूड आयात के लिए बनाई खास रणनीति
कच्चा तेल महंगा होने से देश में पेट्रोल के दाम 110 रुपए और डीजल की कीमत 100 रुपए प्रति लीटर से ऊपर निकलने के बाद सरकार पर दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में सरकार बेहतर भाव पर कच्चा तेल आयात करना चाहती है। इसके लिए बनाई गई रणनीति के तहत ऑयल रिफाइनिंग कंपनियां अलग-अलग नहीं, बल्कि साथ मिलकर क्रूड आयात की डील करेंगी।

पेट्रोलियम सचिव तरुण कपूर के मुताबिक, सरकार प्राइवेट और सरकारी रिफाइनिंग कंपनियों का एक ग्रुप बना रही है। चूंकि भारत दुनिया का तीसरा बड़ा क्रूड आयातक है, लिहाजा सरकार को लगता है कि सभी कंपनियां ग्रुप में डील करेंगी तो बेहतर मोल-भाव कर पाएंगी।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड महंगा होने के 4 प्रमुख कारण

  • वैश्विक अर्थव्यवस्था पूरी तरह खुलने से एनर्जी की डिमांड तेजी से बढ़ी और ठंड बढ़ने के चलते अमेरिका में शेल ऑयल का उत्पादन घट गया।
  • पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन और इसके सहयोगी देश (ओपेक+) रोजाना सिर्फ 4 लाख बैरल उत्पादन बढ़ाने जा रहे हैं।
  • ओपेक+ की तरफ से कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाए जाने के बावजूद इसकी उपलब्धता जरूरत से करीब 14 फीसदी कम ही रहेगी। इसके चलते क्रूड का सेंटिमेंट मजबूत बना हुआ है।
  • इस बीच कोयले के दाम रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने और प्राकृतिक गैस लगातार महंगा होने से क्रूड को अतिरिक्त सपोर्ट मिल रहा है। कुछ मामलों में गैस की जगह तेल इस्तेमाल होने लगा है।