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श्रीलंका की राह पर पाक:राजनीतिक संकट ने बिगाड़े हालात, IMF से फंड नहीं मिला तो कर सकता है ग्लोबल डिफॉल्ट

इस्लामाबाद3 महीने पहले
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आतंक का पनाहगार देश पाकिस्तान कंगाली की कगार पर है। महंगाई लगातार बढ़ रही है, रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोरी का रिकॉर्ड बना रहा है और राजनीतिक हालात लगातार अस्थिर। इससे उसकी इकोनॉमी रसातल में पहुंच गई है। हालात इतने बुरे हैं कि अगर उसे इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) से बेलआउट पैकेज नहीं मिला तो वह श्रीलंका की ही तरह ग्लोबल डिफॉल्ट कर सकता है। अगर ऐसा होता तो पाकिस्तान के इतिहास में दूसरी बार ऐसा होगा।

बेलआउट पैकेज को लेकर बुधवार को IMF के साथ दोहा में बातचीत हुई। अधिकारियों ने माना कि लोन के लिए पाकिस्तान को कई कठिन फैसले लेने पड़ सकते हैं, जिसमें फ्यूल प्राइस बढ़ाना भी शामिल है। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के कार्यवाहक गवर्नर मुर्तजा सैयद ने मंगलवार को ब्लूमबर्ग टीवी के साथ एक इंटरव्यू में कहा, "हमें विश्वास है कि हम फिनिश लाइन पर पहुंच जाएंगे।" पाकिस्तान IMF से 3 अरब डॉलर के बेलाउट की मांग कर रहा है।

2 महीने के इंपोर्ट के लिए भी काफी नहीं फॉरेन रिजर्व
अप्रैल 2022 में पाकिस्तान का फॉरेन रिजर्व 10.2 अरब डॉलर था। यह दो महीने के इंपोर्ट के लिए भी काफी नहीं है। अगर उसे IMF से बेलआउट पैकेज मिल जाता है तो उसके फॉरेन रिजर्व में थोड़ा इजाफा होगा। CEIC के डेटा से पता चलता है कि अक्टूबर 2016 में पाकिस्तान का फॉरेन रिजर्व 19.9 अरब डॉलर था जो कि ऑल टाइम हाई है। जनवरी 1972 में ये 96.0 मिलियन डॉलर पर पहुंच गया था, जो कि उसका सबसे निचला स्तर है।

IMF के साथ आगे की राह मुश्किल
सरकार और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बीच लड़ाई ने IMF के साथ आगे की राह को कठिन बना दिया है। हाल के हफ्तों में इमरान की पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने सत्ता पर फिर से काबिज होने के लिए एक साल पहले चुनाव कराने की मांग की है। वो अपने समर्थकों के साथ इसे लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पाकिस्तान में आर्थिक और राजनीतिक हालात लगातार बिगड़ रहे हैं।

फ्यूल कीमतों ने बढ़ाई परेशानी
अपनी छवि को ठीक करने की कोशिश में इमरान खान ने अप्रैल में कार्यालय छोड़ने से पहले, ईंधन और गैसोलीन की कीमतों को कम कर चार महीने के लिए फ्रीज कर दिया था। IMF नया फंड रिलीज करने से पहले चाहता है कि सरकार सब्सिडी खत्म कर फ्यूल प्राइस में इजाफा करे। हालांकि, नए प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ ने भी हर महीने 60 करोड़ डॉलर की सब्सिडी के बावजूद कीमतें बढ़ाने को टाल दिया।