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कोविड की दूसरी लहर से घटी आर्थिक गतिविधियां:अप्रैल के मुकाबले मई में बिजली खपत में 6.4% की गिरावट, कमर्शियल-इंडस्ट्रियल मांग में कमी का दिखा असर

नई दिल्ली5 महीने पहले
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  • मई में पूरे देश में 110.47 बिलियन यूनिट बिजली की खपत रही
  • पिछले महीने अप्रैल में बिजली खपत में 40% की ग्रोथ रही थी

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर को रोकने के लिए राज्यों की ओर से लगाए गए लॉकडाउन जैसे प्रतिबंधों का आर्थिक गतिविधियों पर असर पड़ा है। इस दौरान कमर्शियल और इंडस्ट्रियल गतिविधियों में कमी रही है। यही कारण है कि अप्रैल के मुकाबले मई में बिजली खपत में 6.4% की गिरावट आई है। बिजली मंत्रालय के ताजा डाटा के मुताबिक, मई में बिजली की खपत 110.47 बिलियन यूनिट रही है। जबकि इससे पिछले महीने यानी अप्रैल में 118.08 बिलियन यूनिट बिजली की खपत रही थी। हालांकि, मई 2020 के मुकाबले इस बार बिजली खपत में 8.2% की ग्रोथ रही है।

कमर्शियल-इंडस्ट्रियल मांग में कमी का दिखा असर

एक्सपर्ट्स का कहना है कि कोविड की दूसरी लहर को रोकने के लिए कई राज्यों ने स्थानीय स्तर पर लॉकडाउन जैसे प्रतिबंध लगाए हैं। इस कारण इंडस्ट्रियल डिमांड कम रही है। इंडस्ट्रियल डिमांड में आई कमी को रिकवरी में धीमी गति के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। इसके अलावा मई में ईस्ट और वेस्ट कोस्ट पर साइक्लोन की दो घटनाएं हुई हैं। जिनसे देश के अलग-अलग हिस्सों में बरसात की स्थिति रही है। इस कारण भी गर्मी के पीक सीजन में बिजली की खपत कम रही है।

एक्सपर्ट्स को उम्मीद- आने वाले दिनों में बढ़ेगी डिमांड

एक्सपर्ट्स का कहना है कोविड के केसों की संख्या में कमी आने लगी है। ऐसे में आने वाले दिनों में कई राज्य लॉकडाउन जैसे प्रतिबंधों में ढील देना शुरू कर सकते हैं। एक्सपर्ट्स को उम्मीद है कि प्रतिबंधों में ढील से आने वाले दिनों में कमर्शियल और इंडस्ट्रियल बिजली खपत की डिमांड बढ़ेगी। मई 2020 में 102.80 बिलियन यूनिट बिजली की खपत रही थी। मई 2019 के मुकाबले मई 2020 में बिजली खपत में 15% की गिरावट रही थी। मई 2019 में 120.02 बिलियन यूनिट बिजली की खपत रही थी।

पिछले साल लॉकडाउन के कारण घटी थी खपत

केंद्र सरकार ने कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए 25 मार्च 2020 को देशव्यापी लॉकडाउन लगा दिया था। इस लॉकडाउन को चरणबद्ध तरीके से खोला गया था। लेकिन इससे आर्थिक और कमर्शियल गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हुई थीं। इसका असर यह हुआ कि देश में कमर्शियल और इंडस्ट्रियल सेगमेंट में बिजली की खपत काफी कम रही। एक्सपर्ट्स का कहना है कि 2020 के बुरे प्रदर्शन को देखते हुए इस साल मई में बिजली खपत ज्यादा बेहतर नहीं रही है। जबकि अप्रैल 2021 में बिजली खपत में वार्षिक आधार पर 40% की ग्रोथ रही थी।

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