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पर्सनल फाइनेंस:लोन के ब्याज पर ब्याज देने की बजाय निवेश में ब्याज पर ब्याज लीजिए, जानिए कैसे मिल सकता है आपको यह फायदा

मुंबई14 दिन पहले
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जितना जल्दी आप निवेश शुरू करेंगे, आपको लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का उतना ही फायदा मिलेगा। कंपाउंडिंग के पावर की वजह से आपको समय के साथ रिटर्न पर रिटर्न मिलता जाएगा
  • आप को ऐसी जगह पर निवेश करना चाहिए जहां आपको पहले साल में मिलनेवाले ब्याज पर अगले साल ब्याज मिल जाए
  • म्यूचुअल फंड में कंपाउंडिंग पावर बहुत ही महत्वपूर्ण होता है। यहां आपकी ब्याज की राशि फिर से निवेश कर दी जाती है

इस समय बैंकों द्वारा दिए गए कर्ज पर ब्याज पर ब्याज को लेकर चर्चा है। जिन कर्जदारों ने लोन लिया था उन्हें मोरेटोरियम के मामले में अब ब्याज पर ब्याज देना पड़ रहा है। पर क्या आप जानते हैं कि आप इसी तरह अपने निवेश पर भी ब्याज पर ब्याज ले सकते हैं? हम आपको बता रहे हैं कैसे आपको ब्याज पर ब्याज मिलता है। फाइनेंशियल सेविंग के सेक्टर में इसे कंपाउंडिंग पावर कहा जाता है।

क्या है कंपाउंडिंग पावर

कंपाउंडिंग पावर किसी भी निवेश के मामले में बहुत ही बेहतरीन साधन है। उदाहरण के लिए मान लीजिए आपने किसी म्यूचुअल फंड में एक लाख रुपए निवेश किया। अगले साल इसने 10 प्रतिशत का रिटर्न दिया तो यह आपका 1.10 लाख रुपए हो गया। लेकिन इसके अगले साल आपको अगर दस प्रतिशत रिटर्न मिलता है तो आपकी राशि बढ़कर 1.21 लाख रुपए हो जाएगी। यानी दूसरे साल आपको 10 हजार की जगह 11 हजार रुपए एक लाख के निवेश पर मिलेगा। अब यह एक हजार रुपए जो बढ़ा है यह आपके उस 10 हजार पर बढ़ा है जो पहले साल में आपको ब्याज मिला है।

हर साल आपके रिटर्न को निवेश किया जाता है

निवेश पर कंपाउंडिंग इसी को बोलते हैं। हर साल जो आपका रिटर्न होता है उसे फिर से निवेश कर उस पर भी रिटर्न मिलता है। यानी आपको चक्रवृद्धि तरीके से यहां पर रिटर्न मिलता है। वित्तीय सेक्टर में एक सफल निवेशक बनने के लिए कई सारी चीजों का ध्यान रखना होता है। लेकिन इसमें सबसे पहले ध्यान आपको वित्तीय लक्ष्यों का रखना होगा। यानी आप किसके लिए निवेश कर रहे हैं, कितना पैसा चाहिए और कितने समय में चाहिए। कोई भी सफल निवेशक इसके बिना निवेश में मास्टर नहीं बन पाता है।

लक्ष्य पहले तय करें

दरअसल लक्ष्य हर एक सेक्टर में होता है। आप पढ़ाई करें, आप नौकरी करें या बिजनेस करें, लक्ष्य ही है जो आपको वहां तक ले जाता है। अगर आप शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड या बीमा जैसे वित्तीय बचत में निवेशक बनना चाहते हैं तो आपको लंबी अवधि का नजरिया रखना होगा। लंबी अवधि से आपको यह फायदा होता है कि अगर कोई गलती हो जाती है तो उसे सुधारने में भी आपको समय मिल जाता है। कुछ असेट क्लास लंबे समय में बेहतर रिस्क एडजेस्टेड यानी जोखिम समायोजित रिटर्न देते हैं।

एक तय समय में एक तय लक्ष्य प्राप्त करने का अनुमान मिलने के बाद आपको कॉर्पस बनाने के लिए जरूरी मासिक निवेश का आंकलन करने में आसानी होती है।

जल्दी निवेश करना शुरू करें

जितना जल्दी आप निवेश शुरू करेंगे, आपको लंबी अवधि में कंपाउंडिंग का उतना ही फायदा मिलेगा। कंपाउंडिंग के पावर की वजह से आपको समय के साथ रिटर्न पर रिटर्न मिलता जाएगा, जिससे कम निवेश के जरिए भी लंबी अवधि में आपको बड़ा फंड बनाने में मदद मिलेगी। उदाहरण के लिए, आपको अगर 35 साल में 2 करोड़ जुटाने हैं तो हर महीने 3,500 रुपए की एसआईपी की जरूरत होती है। यह तब होगा जब यह मान लें कि म्यूचुअल फंड सालाना 12 प्रतिशत का रिटर्न देगा। अगर यही दो करोड़ आपको 25 साल में जुटाना है तो आपको 12,000 रुपए की मासिक एसआईपी करनी होगी।

जल्दी निवेश करने के लिए कम पैसे बचाने होंगे

दरअसल जितनी देर से आप कॉर्पस या लक्ष्य को तय करेंगे, उतना ही ज्यादा आपको महीने में पैसे बचाने होंगे। इसलिए जल्दी बचत की शुरुआत आपके लिए अच्छी हो सकती है। शेयर बाजार की बात करें तो यह अभी भी 5 साल और उससे अधिक समय तक के निवेश के लिए सबसे अच्छा असेट क्लास है। कम अवधि में इसमें उतार-चढ़ाव हो सकता है, पर लंबी अवधि में यह अच्छा प्रदर्शन करता है।

डायरेक्ट या म्यूचुअल फंड के जरिए करें निवेश

आप चाहें तो शेयर बाजार में डायरेक्ट निवेश करने के बजाय म्यूचुअल फंड के जरिए निवेश कर सकते हैं। इसके लिए आपको इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश करना होगा। इससे आपको यह फायदा होगा कि आपका सारा काम फंड मैनेजर करेगा। आपको कोई चिंता करने की जरूरत नहीं है। फंड मैनेजर को इसका अनुभव होता है। वह आपके 100 रुपए को दस स्टॉक में निवेश कर के आपको बेहतर रिटर्न दे सकता है।

आपको अगर टैक्स बचाना है तो आप ईएलएसएस (इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम) का भी सहारा ले सकते हैं। इसमें आयकर की धारा 80 सी के तहत आपको टैक्स बचत का लाभ मिलता है।

एकमुश्त पैसा नहीं है तो एसआईपी करें

आपके पास एकमुश्त पैसा नहीं है तो आप एसआईपी को चुन सकते हैं। इसमें आप हर महीने एक तय राशि का निवेश कर सकते हैं। निवेशकों को इसमें एसआईपी टॉप अप कराने का भी मौका मिलता है, जहां वे ज्यादा यूनिट पा सकते हैं। ऐसा करके वे अपने वित्तीय लक्ष्य को कम समय में पा सकते हैं। जब आप लंबी अवधि के लिए निवेश जारी रखते हैं, तो सुनिश्चित करें कि आप कम से कम 6 महीने के अपने अनिवार्य मासिक खर्चों को पूरा करने के लिए एक इमरजेंसी फंड का निर्माण करें।

अनिवार्य खर्च को लक्ष्य बनाएं

अनिवार्य खर्चों में आपके दैनिक जीवन का खर्च, ईएमआई, किराया, यूटिलिटी बिल, बीमा प्रीमियम, आपके बच्चों की ट्यूशन फीस आपके महत्वपूर्ण वित्तीय लक्ष्यों में शामिल होना चाहिए। ऐसा करके आप किसी भी वित्तीय इमरजेंसी की चुनौतियों से निपट सकेंगे। कभी-कभी ऐसा भी होता है कि शानदार रिटर्न वाले फंड भी रिटर्न नहीं दे पाते हैं। ऐसी स्थिति में आप चाहें तो अपने पोर्टफोलियो से ऐसे फंड को हटा सकते हैं। दूसरे फंड में जा सकते हैँ। यह काम आपका फंड मैनेजर कर देगा। इसलिए आपको निवेश पर ध्यान भी देते रहना होगा।

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