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परिवारों पर दोतरफा मार:पहले कोविड से हुए जॉब लॉस और सैलरी कट, अब महंगाई बढ़ा रही परिवारों की मुसीबत

एक महीने पहले
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महंगाई की मार पूरे देश की जनता झेल रही है, जो कहीं थोड़ी कम, तो कहीं थोड़ी ज्यादा है। सब्जियों और फलों में महंगाई और ट्रांसपोर्ट का बढ़ा खर्च परिवारों का मंथली बजट बिगड़ रहा है। कोविड के चलते हुए जॉब लॉस, सैलरी कट और इनकम लॉस उनकी मुसीबतें बढ़ा रही है। दरअसल हाल की स्ट्रॉन्ग इकोनॉमिक रिकवरी के बावजूद लॉकडाउन का असर बना हुआ है।

फरवरी में खुदरा महंगाई थी 5%, तीन महीने में सबसे ज्यादा

सरकार की तरफ से जारी हालिया आंकड़े खुदरा और थोक महंगाई बढ़े होने का इशारा कर रहे हैं। फरवरी में खुदरा महंगाई 5% पर पहुंच गई थी, जो तीन महीने में सबसे ज्यादा थी। उस महीने थोक महंगाई भी 4.2% पर चली गई थी जो 27 महीने में सबसे ज्यादा थी। महंगाई इतना बढ़ने की सबसे बड़ी वजह ईंधन और खाने-पीने के सामान वगैरह के दाम में उछाल रही।

मंथली बजट में हेल्थ सेफ्टी आइटम के एक्सट्रा खर्च जुड़ गए हैं

कोविड के चलते मंथली बजट में हेल्थ सेफ्टी आइटम के कुछ एक्सट्रा खर्च जुड़ गए हैं। एक तरफ हैंड सैनिटाइजर और मास्क का खर्च ऐड हुआ है तो दूसरी तरफ ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बढ़ा है। परिवारों की परेशानी बढ़ाता रहा इंधन का खर्च हाल के दिनों में कम हुआ है। वैसे NDA सरकार महंगाई को काबू में रखने में कमोबेश कामयाब रही है लेकिन कोविड के चलते दाम में आए उछाल ने मामला बिगाड़ दिया है।

मटन 50-60% तक महंगा, मछली की कीमत 11.30% बढ़ी

फरवरी में खुदरा महंगाई के आंकड़े बताते हैं कि घरेलू उपभोग की कौन सी चीज कितनी महंगी हुई है। पिछले साल जितने मांस-मछली के लिए 100 रुपए लगते थे, उतने के लिए इस साल फरवरी में 111.30 रुपए लग रहे थे।

इसी तरह जितने अंडों के लिए 100 रुपए देने पड़ते थे, वे दो महीने पहले 111.10 रुपए में मिल रहे थे। साल भर पहले जितने खाने के तेल पर 100 रुपए लगते थे उतने 120.8 रुपए में आ रहे हैं। इसी तरह 100 रुपए की दाल 112.5 रुपए की हो गई है। कोविड से पहले 500 रुपए प्रति किलो का मटन आजकल 750-800 रुपए का हो गया है।

सरसों तेल 36% और सनफ्लावर ऑयल 70% महंंगा हुआ

दिल्ली में पिछले साल अप्रैल में 95 रुपए/ किलो की तूर यानी अरहर दाल अभी 108 रुपए/ किलो की हो गई है। दिल्ली के अलावा मुंबई और कोलकाता में उड़द और मूंग जैसी दालों का भी यही हाल है। इसके अलावा खाने के तेल का दाम भी तेज हुआ है। मुंबई में पिछले साल 114 रुपए/ किलो का सरसों तेल 155 रुपए का हो गया है। तब कोलकाता में 105 रुपए/ किलो बिकने वाला सनफ्लावर ऑयल 179 रुपए का हो गया है।

मकान मालिकों पर बना है किराया कम करने का दबाव

जरूरत का सामान महंगे होने और दूसरे खर्च में हो रही बढ़ोतरी से लोग डाइन आउट जैसे खर्चों पर लगाम लगा रहे हैं। कुछ परिवारों का ग्रोसरी, फल और सब्जियों पर होने वाला खर्च बढ़ा है लेकिन उसकी वजह महंगाई नहीं बल्कि ज्यादा मात्रा में होनेवाली खरीदारी है।

लेकिन स्कूल यूनिफॉर्म और ट्रांसपोर्ट कॉस्ट बंद होने के अलावा खेलकूद और फील्ड ट्रिप नहीं होने से भी खर्च घटा है। रिवर्स माइग्रेशन के चलते भरने से ज्यादा मकान खाली होते रहने से किराएदार मकान मालिक से बात करके किराया कम करा रहे हैं।

ज्यादातर परिवारों को अगले एक साल में महंगाई तेज रहने का डर

सब्जियों की सप्लाई बढ़ने पर कीमत में उछाल पर लगाम लगेगा, लेकिन महंगाई का दबाव कुछ समय तक बना रह सकता है। महंगाई के अनुमान को लेकर रिजर्व बैंक की तरफ से कराए गए हालिया सर्वे के मुताबिक, ज्यादातर परिवारों को लगता है कि अगले एक साल में महंगाई तेज रह सकती है। उनका मानना है कि इस दौरान सर्विसेज के दाम भी तिमाही दर तिमाही आधार पर तेज रहेंगे।

घर पर ज्यादा समय बिताने से बढ़ी सब्जियों और फलों की खपत

कोविड के चलते रहन-सहन के तरीकों में बदलाव आने से भी लोगों का खर्च बढ़ रहा है। लोगों के घर पर ज्यादा समय बिताने के चलते सब्जियों और फलों की खपत बढ़ी है। हालांकि लॉकडाउन के बाद लोगों ने बाहर निकलना शुरू किया है तो पहले के दूसरे खर्च फिर से शुरू हो गए हैं।

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