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कोविड महामारी में बीमा कंपनियों की मनमानी:निजी और सरकारी बीमा कंपनियों ने मरीजों से किया खिलवाड़, बड़े पैमाने पर मेडिक्लेम खारिज, राशि में भी कटौती की

नई दिल्ली5 दिन पहलेलेखक: स्कन्द विवेक धर
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कोरोना महामारी की दूसरी लहर में बीमा कंपनियों ने मरीजों को राहत देने की जगह चोट पहुंचाई है। लोगों ने बीमारी में राहत के लिए बीमा कराया लेकिन, उन्हें क्या पता था कि जब जरूरत पड़ेगी तो ये बीमा कंपनियां हाथ खड़े कर देंगी।

कटक के बिप्लव स्वांई अपनी हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी के लिए पिछले 9 सालों से सालाना 27 हजार रुपए प्रीमियम भर रहे थे। मई में कोरोना से उनकी मौत हो गई। परिवार ने 24 हजार रुपए का क्लेम किया, लेकिन स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस सिर्फ 12 हजार रुपए देने को तैयार है।

बीमा कंपनियों ने अपने ग्राहकों लगाया चूना
यह सिर्फ एक उदाहरण है, जब कोविड की दूसरी लहर पीक पर थी, उस समय बीमा कंपनियों ने अपने ग्राहकों को खासा चूना लगाया। इसके चलते अकेले दिल्ली में 200 से अधिक मामले अदालतों में जा पहुंचे है। उपभोक्ता अधिकार के लिए काम करने वाली संस्था कंज्यूमर वॉइस में बीमा मामलों के विशेषज्ञ सुभाष तिवारी कहते हैं, बीमा कंपनियों की कोशिश रहती है कि ज्यादा से ज्यादा क्लेम खारिज कर दिए जाएं। जो आगे लड़ाई करने की हिम्मत दिखाते हैं, उन्हें कंपनियां क्लेम दे देती हैं। हालांकि 10% लोग ही इतनी जहमत उठाते हैं।

बिप्लव स्वांई की बहन बिराज स्वांई कहती हैं, कैशलेस पॉलिसी होने के बावजूद मेरे भाई से स्टार हेल्थ के नेटवर्क अस्पताल ने पहले कैश लिया और फिर भर्ती किया। शिकायत के बावजूद कंपनी ने अस्पताल पर कोई एक्शन नहीं लिया। अब कंपनी क्लेम में आधी राशि काट रही है और कटौती किस मद में की जा रही है, ये बताने को भी तैयार नहीं है।

स्टार हेल्थ एंड अलाइड इंश्योरेंस कंपनी ने कहा
कंपनी के एमडी डॉ. एस प्रकाश ने भास्कर के एक सवाल के जवाब में कहा कि हम नेटवर्क अस्पतालों को ग्राहकों से डिपॉजिट लेने से रोकते हैं। अगर कोई ग्राहक स्वीकृत कमरे की श्रेणी से महंगे कमरे में रुकना चाहता है तो अस्पताल जरूर अतिरिक्त रकम कैश में ले सकते हैं। कटौती की जानकारी न देने के आरोप के जवाब में डॉ. प्रकाश ने कहा कि हम बिल की कॉपी में कुछ आइटम्स का जिक्र करते हैं, जिनकी अनुमति है या नहीं है। कुछ अपवाद हो सकते हैं, जो छूट गए हों। लेकिन जब कस्टमर हमारे पास आते हैं तो हम उन्हें पूरी जानकारी देते हैं। हालांकि, बिराज कहती हैं कि बिप्लव स्वांई की पॉलिसी में रूम रेंट कैप का कोई जिक्र ही नहीं था। जहां तक कटौती की जानकारी देने की बात है तो स्थानीय अधिकारी कह रहे हैं कि पहले सेटलमेंट करें फिर जानकारी देंगे।

स्टार हेल्थ के एमडी ने क्लेम की राशि में कटौती के लिए अस्पतालों को जिम्मेदार बताते हुए कहा कि इंश्योरेंस रखने वाले मरीजों से कुछ अस्पताल ओवर चार्ज करते हैं। ऐसे मामलों में हमें सतर्कता बरतनी पड़ती है।

सवालों के घेरे में इरडा की चुप्पी
बीमा कंपनियों की मनमानी के बीच इरडा की चुप्पी भी सवालों के घेरे में है। भास्कर ने इरडा की मेंबर (नॉन लाइफ) से इन मामलों पर रुख जानना चाहा, लेकिन खबर लिखे जाने तक उनका कोई जवाब नहीं आया। इरडा के चेयरमैन का पद मई से ही खाली है।

केस 1: 9 लाख का बिल, 5 लाख का बीमा, कंपनी ने दिए सिर्फ 1 लाख 60 हजार रुपए
दिल्ली के अब्बास खान (परिवर्तित नाम) ने यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी से पांच लाख रुपए का कोरोना कवच ले रखा था। उनका बिल 9 लाख रुपए का बना। जब उन्होंने क्लेम किया तो कंपनी ने उन्हें सिर्फ 1.60 लाख रुपए जारी किए। अब्बास अब कोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

केस 2: बीमा 5 लाख का, कंपनी ने कहा- प्रति मरीज अधिकतम 10 हजार रुपए देंगे
इंदौर के अभय शर्मा ने स्टार हेल्थ से अपने लिए 5 लाख, पत्नी और बेटी के लिए 3-3 लाख रुपए की कोविड कवच पॉलिसी ली थी। तीनों ही संक्रमित हुए। उनका बिल 72,092 रुपए का बना, लेकिन कंपनी उन्हें बेटी के लिए अधिकतम 10 हजार, पत्नी के लिए 5,000 और उनके लिए 7,500 रु. का क्लेम दे रही है।

ऐसे करें इंश्योरेंस कंपनियों की शिकायत
कंज्यूमर वॉइस के COO असीम सान्याल कहते हैं सबसे पहले हमें बीमा कंपनियों से बात करनी चाहिए। यदि कंपनी के जवाब से संतुष्ट नहीं हैं तो IRDA के ग्रीवांस पोर्टल में शिकायत कर सकते हैं। यहां शिकायत करने से कंपनियां या तो खुद समझौते के लिए आएंगी अन्यथा मामला अपने आप बीमा लोकपाल के पास चला जाएगा। अगर हम बीमा लोकपाल के फैसले भी असंतुष्ट हैं तो कंज्यूमर फोरम जा सकते हैं।

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