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पूर्व नौकरशाह ने की आलोचना:मंदी के दौर में CPSE का निजीकरण एक डरावना विचार, बजट भाषण में रोजगार पर कोई बात नहीं

नई दिल्ली16 दिन पहले
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प्रोणब सेन का कहना है कि भले ही भारत का फिस्कल डेफिसिट मार्च में समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष में 3.5% से बढ़कर 9.5% हो जाएगा, लेकिन वर्तमान वर्ष में देश के खर्च में यथास्थिति बनी रहेगी। - Dainik Bhaskar
प्रोणब सेन का कहना है कि भले ही भारत का फिस्कल डेफिसिट मार्च में समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष में 3.5% से बढ़कर 9.5% हो जाएगा, लेकिन वर्तमान वर्ष में देश के खर्च में यथास्थिति बनी रहेगी।
  • प्रोणब सेन ने कहा- तेजी के दौर में प्राइवेटाइजेशन अच्छा होता है
  • सरकार ने अगले साल 1.75 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा

पूर्व नौकरशाह ने केंद्र सरकार की सरकारी कंपनियों के निजीकरण की योजना की आलोचना की है। पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद प्रोणब सेन ने कहा है कि मंदी के दौर में सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज (CPSE) की हिस्सेदारी बेचना डरावना विचार है। इसका कारण यह है कि वर्तमान आवश्यकता को पूरा करने के लिए फाइनेंशियल सेक्टर की वैध आवश्यकता आगे चलकर खत्म हो जाती है।

बजट भाषण में रोजगार शब्द का जिक्र नहीं

इंडस्ट्री बॉडी PHDCCI की ओर से आयोजित एक कार्यक्रम में बोलते हुए सेन ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 2021-22 के बजट भाषण में रोजगार शब्द का जिक्र ही नहीं किया है। उन्होंने कहा कि जब अर्थव्यवस्था में तेजी होती है तब CPSE का प्राइवेटाइजेशन अच्छा होता है। मंदी के दौर में प्राइवेटाइजेशन डरावना विचार है।

अगले साल 1.75 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने बजट में अगले साल विनिवेश के जरिए 1.75 लाख करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य तय किया है। यह पैसा पब्लिक सेक्टर कंपनीज और फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशंस की बिक्री के जरिए जुटाई जाएगी। इसमें पब्लिक सेक्टर के दो बैंक और 1 जनरल इंश्योरेंस कंपनी शामिल है।

9.5% तक पहुंचेगा फिस्कल डेफिसिट

सेन ने कहा कि भले ही भारत का फिस्कल डेफिसिट मार्च में समाप्त होने वाले चालू वित्त वर्ष में 3.5% से बढ़कर 9.5% हो जाएगा, लेकिन वर्तमान वर्ष में देश के खर्च में यथास्थिति बनी रहेगी। उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था के लिए वित्तीय प्रोत्साहन काफी कम है। सेन के मुताबिक, फिस्कल डेफिसिट में बढ़ोतरी सप्लाई साइड की ओर से हो रही है ना कि डिमांड साइड से।

बजट में बड़े प्रोजेक्ट के लिए फंड का आवंटन नहीं

पूर्व मुख्य सांख्यिकीविद ने कहा कि बजट में बड़े प्रोजेक्ट के लिए कोई फंड आवंटित नहीं किया गया है। पुराने बजट की तरह इस बार बजट भाषण में रोजगार शब्द का जिक्र नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने केवल MSME सेक्टर का जिक्र किया है। MSME के लिए इस बजट में कुछ खास नहीं किया गया है। हालांकि, उन्होंने बजट में खातों की सफाई के लिए सरकार की प्रशंसा की है।

निजीकरण सभी बीमारियों का रामबाण इलाज नहीं: पूर्व डिप्टी गवर्नर

RBI के पूर्व डिप्टी गवर्नर एसएस मुंद्रा ने हाल ही में कहा था कि निजीकरण सभी बीमारियों का रामबाण इलाज नहीं है। उन्होंने कहा था कि यदि पब्लिक सेक्टर की स्वायत्तता को बरकरार रखा जाए, ऑपरेशनल फ्रीडम दी जाए और ओनरशिप को अलग किया जाए तो अधिक प्रभावी परिणाम मिलेंगे।

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