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डिजिटल करेंसी:दुनियाभर में डिजिटल करेंसी पर तेजी से हो रहा काम, 86% देशों में रिसर्च और 60% में टेस्टिंग जारी

नई दिल्ली2 महीने पहले
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चार्ली कैम्पबेल

37 साल के मी यी मध्य बीजिंग में सार्वजनिक ट्रांसपोर्ट सेवा से फाइनेंस कंपनी में अपने काम पर जाते हैं। अन्य शहरी चीनियों के समान वे भी नगद की बजाय स्मार्ट फोन के जरिये सभी भुगतान करते हैं। कुछ सप्ताह पहले मी यी ने एंट ग्रुप का अली पे मोबाइल पेमेंट एप छोड़कर चीनी करेंसी रेनमिनबी (आरएमबी) के डिजिटल वालेट से भुगतान शुरू किया है।

देश के रिजर्व बैंक- पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने पायलट प्रोजेक्ट के रूप में वालेट जारी किया है। मी के दैनिक जीवन में आया यह बदलाव जल्द ही दुनिया में बहुत लोगों के लिए पैसे के लेन-देन का तरीका बन सकता है। विभिन्न देशों के 60% रिजर्व बैंक डिजिटल करेंसी की टेस्टिंग कर रहे हैं।

दुनिया में लगभग 3.71 लाख करोड़ रुपए का नगद धन है
मी का वालेट डिजिटल करेंसी का लेन-देन करता है। यह नियामकों के दायरे से बाहर बिटकॉइन, रिपल, इथर जैसी क्रिप्टोकरेंसी नहीं है। सरकार द्वारा जारी की गई है। वैसे, डिजिटल करेंसी के कारण नोटों, सिक्कों की शक्ल में जारी भौतिक करेंसी पूरी तरह गायब नहीं होगी। आज दुनिया में लगभग 3.71 लाख करोड़ रुपए का नगद धन लोगों की जेब, सेफ और बैंकों में हैं।

घोटाले रोकने में मिलेगी मदद
डिजिटल करेंसी से सरकारों को घोटाले रोकने में मदद मिलेगी। दूसरे देशों में धन, संपत्ति का हस्तांतरण आसान हो जाएगा। संकट के समय यह ज्यादा उपयोगी होगी। फुदान यूनिवर्सिटी शंघाई में फिनटेक रिसर्च सेंटर के डायरेक्टर माइकेल सुंग कहते हैं, डिजिटल करेंसी से विश्व के मौद्रिक सिस्टम में भारी बदलाव होगा।

लिब्रा लाने की घोषणा के बाद इस पर तेजी से हो रहा काम
चीन 2014 से चुपचाप आरएमबी पर रिसर्च कर रहा था। 2019 में फेसबुक द्वारा डिजिटल करेंसी-लिब्रा लाने की घोषणा के बाद उसने तेजी से काम शुरू कर दिया। दुनिया की 33% आबादी से जुड़ी प्राइवेट कंपनी के अंतरराष्ट्रीय मौद्रिक सिस्टम को प्रभावित करने वाली घोषणा से सभी देश स्तब्ध रह गए थे।

पिछले साल फेडरल रिजर्व के प्रमुख जेरोम पॉवेल ने अमेरिकी संसद की कमेटी में कहा कि लिब्रा ने एक तरह से सचेत किया है कि डिजिटल करेंसी तेजी से आ रही है। डिजिटल करेंसी की दिशा में कुछ बैंक भी सक्रिय हैं। अप्रैल में जेपी मोर्गन और डीबीएस ने सिंगापुर की सरकारी इनवेस्टमेंट कंपनी टेमासेक के साथ मिलकर थोक डिजिटल करेंसी क्लीयरिंग हाउस बनाने का इरादा जताया है। ऐसे कुछ अन्य प्रस्तावों पर विचार हो रहा है।

86% रिजर्व बैंक डिजिटल करेंसी पर रिसर्च कर रहे
रिजर्व बैंकों के सेंट्रल बैंक के रूप में काम करने वाली स्विस संस्था इंटरनेशनल सैटलमेंट बैंक के सर्वे में संकेत मिला है कि 86% रिजर्व बैंक डिजिटल करेंसी पर रिसर्च कर रहे हैं। कोई 60% रिजर्व बैंक टेस्टिंग कर रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व इस परिकल्पना पर निश्चित राय नहीं बना पाया है। यूरोपियन सेंट्रल बैंक की प्रमुख क्रिस्टीन लेगार्ड कहते हैं, हम 2025 तक डिजिटल यूरो शुरू करना चाहते हैं।

2027 तक18 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति डिजिटल स्वरूप में होगी
कुछ अनुमानों के अनुसार रिजर्व बैंक की डिजिटल करेंसी से तीन साल के अंदर दुनिया की बीस प्रतिशत आबादी जुड़ जाएगी। विश्व में 2027 तक करीब 18 लाख करोड़ रुपए की संपत्ति डिजिटल स्वरूप में होने की संभावना है। डिजिटल करेंसी शुरू करने वाला चीन पहला देश नहीं है। बहामा ने छह माह पहले सैंड डॉलर शुरू कर दिया था। हालांकि, डिजिटल करेंसी जारी करने वाला चीन पहला प्रमुख देश है। चीन में दो करोड़ 80 लाख लोग डिजिटल आरएमबी का इस्तेमाल कर रहे हैं। उन्होंने 39 हजार करोड़ रुपए के सात करोड़ लेन-देन किए हैं।