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RBI का कमाल:देश की वित्तीय स्थिति तेज सुधार के साथ कोविड-19 के पहले से भी बेहतर हुई: क्रिसिल

10 महीने पहले
  • क्रिसिल रिसर्च के मुताबिक, देश की वित्तीय स्थिति में बड़े सुधार की सबसे बड़ी वजह रिजर्व बैंक
  • RBI के उपायों से घटे मनी मार्केट और डेट मार्केट के रेट, बैंकों की ब्याज दरों में भी दिखा असर

भारत की वित्तीय स्थिति में कोविड-19 के चलते आई लड़खड़ाहट के बाद बड़ी तेजी से सुधार हुआ है। यह अब तो कोरोना वायरस के चलते फैली महामारी के पहले से भी बेहतर हो गई है। इन बातों का पता क्रिसिल रिसर्च के फाइनेंशियल कंडिशन इंडेक्स से चलता है। क्रिसिल रिसर्च के मुताबिक देश की वित्तीय स्थिति में बड़ा सुधार होने की सबसे बड़ी वजह भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) है।

RBI के कदमों से इकनॉमी पर बना शॉर्ट टर्म प्रेशर घटाने में मदद मिली

क्रिसिल ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि RBI ने देश की इकनॉमी को सपोर्ट देने के लिए दूसरे देशों के केंद्रीय बैंकों के साथ कदमताल किया है। उसके उठाए गए कदमों से कोविड-19 के चलते हुए व्यापक आर्थिक नुकसान की भरपाई हो गई है। क्रिसिल के मुताबिक, भारत को दुनियाभर के ग्लोबल इकनॉमी को बढ़ावा देने वाली मॉनेटरी पॉलिसी से फायदा हुआ है। RBI ने जो कदम उठाए हैं उससे इकनॉमी पर बना शॉर्ट टर्म प्रेशर घटाने में मदद मिली है।

पॉलिसी रेट में कटौती और नकदी के बढ़े स्तर से हुआ बड़ा फायदा

देश की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाने में इस साल पॉलिसी रेट में हुई कटौती, बाजारों में ज्यादा नकदी और निवेश, विदेशी मुद्रा के बढ़े प्रवाह और अनुकूल वैश्विक स्थितियों का अहम रोल रहा। रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने अक्टूबर 2020 की शुरुआत में कहा था कि RBI नकदी तक मार्केट पार्टिसिपेंट्स की पहुंच और वित्तीय स्थितियों को आसान बनाए रखने के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार है।

उदार मॉनेटरी पॉलिसी से मनी और डेट मार्केट को मिला सपोर्ट

RBI मार्च से अब तक रेपो रेट को 115 बेसिस प्वाइंट और रिवर्स रेपो को 155 बेसिस प्वाइंट घटा चुका है। (100 बेसिस प्वाइंट 1 पर्सेंटेज प्वाइंट के बराबर होता है।) उसने सितंबर तक नेट बेसिस पर 1.9 लाख करोड़ रुपये की गवर्नमेंट सिक्योरिटीज भी खरीदी। उसने पिछले फाइनेंशियल ईयर में इस दौरान 0.9 लाख करोड़ रुपये की गवर्नमेंट सिक्योरिटीज खरीदी थी। क्रिसिल के मुताबिक, RBI के इन उपायों से मनी मार्केट और डेट मार्केट के इंटरेस्ट रेट में कमी आई है। इसका असर कुछ हद तक बैंकों की ब्याज दरों में भी गिरावट के तौर पर देखने को मिला है।

बैंकों की लोन ग्रोथ कई दशक के निचले स्तर पर आ सकती है

देश के फाइनेंशियल सेक्टर में अब भी कुछ बड़ी बाधाएं बनी हुई हैं। कोविड-19 के पहले से ही घटती रही बैंकों की लोन ग्रोथ हाल के महीनों में और कम हुई है। क्रिसिल का अनुमान है कि उनकी लोन ग्रोथ मौजूदा फाइनेंशियल ईयर में कई दशकों के निचले स्तर 0-1 पर्सेंट पर आ सकती है। सरकार की बढ़ी उधारी और कॉरपोरेट बॉन्ड मार्केट में बना दबाव भी फाइनेंशियल सेक्टर की समस्या बढ़ा रहा है।

IL&FS के डिफॉल्ट के बाद से बिगड़ रही है देश की वित्तीय स्थिति

देश की वित्तीय स्थिति 2018 में IL&FS के डिफॉल्ट के बाद से ही बिगड़ रही है। उस संकट के चलते देश के नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनियों (NBFC) को नकदी की कमी हो गई थी। NBFC सेक्टर की इस समस्या में कोविड-19 के चलते इजाफा ही हुआ था। लॉकडाउन शुरू होने के बाद इस साल अप्रैल में देश की वित्तीय स्थिति एक दशक में सबसे ज्यादा कमजोर हो गई थी।

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