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क्रेडिट कार्ड डाटा स्टोर नहीं कर सकते ऑनलाइन मर्चेंट्स:RBI ने अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, नेटफ्लिक्स, फ्लिपकार्ट, जोमैटो की मांग खारिज की

नई दिल्ली2 महीने पहले
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एक अधिकारी के मुतााबिक नियामक का मानना है कि मर्चेंट यदि क्रेडिट कार्ड डाटा स्टोर करेंगे, तो इससे ग्राहकों के लिए साइबर सिक्योरिटी जोखिम पैदा होगा और इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि ये नियम पेमेंट एग्रीगेटर्स और गेटवे से संबंधित है - Dainik Bhaskar
एक अधिकारी के मुतााबिक नियामक का मानना है कि मर्चेंट यदि क्रेडिट कार्ड डाटा स्टोर करेंगे, तो इससे ग्राहकों के लिए साइबर सिक्योरिटी जोखिम पैदा होगा और इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि ये नियम पेमेंट एग्रीगेटर्स और गेटवे से संबंधित है
  • RBI ने जुलाई 2021 से लागू होने वाले नए पेमेंट एग्रीगेटर्स एंड पेमेंट गेटवे (PA/PG) नियमों के तहत ग्राहकों का क्रेडिट कार्ड डाटा स्टोर करने की मांग खारिज कर दी
  • मर्चेंट ने नियामक के साथ एक बैठक की मांग की थी और कहा था कि उन्हें प्रतिनिधित्व नहीं मिला, इस मांग को भी RBI ने खारिज कर दिया

अमेजन, माइक्रोसॉफ्ट, नेटफ्लिक्स, फ्लिपकार्ट और जोमैटो जैसे ऑनलाइन मर्चेंट्स ग्राहकों के क्रेडिट कार्ड का डाटा स्टोर नहीं कर सकते। जानकार सूत्रों के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जुलाई 2021 से लागू होने वाले नए पेमेंट एग्रीगेटर्स एंड पेमेंट गेटवे (PA/PG) नियमों के तहत ग्राहकों का क्रेडिट कार्ड डाटा स्टोर करने की उनकी मांग खारिज कर दी। मर्चेंट ने नियामक के साथ एक बैठक की मांग की थी और कहा था कि उन्हें समुचित प्रतिनिधित्व नहीं दिया गया है। इस मांग को भी RBI ने खारिज कर दिया।

एक अधिकारी ने कहा कि नियामक का मानना है कि मर्चेंट यदि क्रेडिट कार्ड डाटा स्टोर करेंगे, तो इससे ग्राहकों के लिए साइबर सिक्योरिटी जोखिम पैदा होगा और इस मामले से उनका कोई लेना-देना नहीं है, क्योंकि ये नियम पेमेंट एग्रीगेटर्स और गेटवे से संबंधित है। ये लेवल-1 मर्चेंट्स कुल 25 करोड़ ग्राहकों के साथ ट्र्रांजेक्शन करते हैं। इन मर्चेंट्स ने 1 फरवरी को RBI को एक पत्र में लिखा था कि मर्चेंट्स को कार्ड का डाटा स्टोर नहीं करने देने पर प्रणाली बाधित होगी। मर्चेंट्स अपने बैंक और पेमेंट एग्रीगेटर्स का भी प्रतिनिधित्व कर रहे थे और वीसा और मास्टरकार्ड जैसे नेटवर्क ऑपरेटर्स ने भी कस्टमर का डाटा स्टोर करने का समर्थन किया।

मर्चेंट अपने सर्वर पर कस्टमर के कार्ड और उससे संबंधित डाटा स्टोर नहीं कर सकेंगे

RBI के नए गाइडलाइन के तहत मर्चेंट अपने सर्वर पर कस्टमर के कार्ड और उससे संबंधित डाटा को स्टोर नहीं कर सकते। इसी गाइडलाइन के तहत पेमेंट एग्रीगेटर्स (PA) भी कस्टमर के कार्ड का डाटा उन जगहों पर स्टोर नहीं कर सते, जहां मर्चेंट की पहुंच है। उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक डाटा स्टोर नहीं करने देने से ग्राहकों की परेशानी बढ़ेगी और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम बाधित होगा।

सिस्टम के ठप होने का संकट पैदा हो सकता है

इकॉनोमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक ब्लैक डॉट पब्लिक पॉलिसी एडवाइजर्स के फाउंडर प्रिंसिपल मंदार कगड़े ने कहा कि इस मनाही के कारण मर्चेंट और PA को कस्टमर के साथ ट्रांजेक्शन के समय हर बार ऑथेंटिकेशन के लिए बैंक के API को कॉल करना होगा। इससे सिस्टम के ठप होने का संकट पैदा हो सकता है। सब्सक्रिप्शन वाली सर्विस में भी परेशानी होगी, जिसमें ग्राहकों को बार-बार बिल भेजने के लिए कस्टमर के कार्ड का डाटा स्टोर करना पड़ता है।

RBI ने अपने ही पुराने रुख को खारिज किया, यह मनमानी के समान

एक लेवल-1 मर्चेंट ने कहा कि नियामक पेमेंट कार्ड इंडस्ट्री डाटा सिक्योरिटी स्टैंडर्ड (PCI-DSS) मानक को मान्यता देता है इसलिए हम अपने इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर निवेश करते रहे थे। अब अपने ही पुराने रुख को नहीं मानना बिल्कुल मनमानी जैसा है। कार्ड के डाटा की सुरक्षाा के लिए PCI-DSS को दुनियाभर में सबसे सही तरीका माना जाता है। RBI ने भी अपने पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स इन इंडिया: विजन - 2019-2021 में इसे स्वीकार किया है।

गाइडलाइन को थोड़ा और स्पष्ट करने की जरूरत

एक पेमेंट प्लेटफॉर्म मिंटओक के CEO रमन खंडुजा के मुताबिक गाइडलाइन को थोड़ा और स्पष्ट करने की जरूरत है। खासकर इस मामले में कि क्या PG भी PA माने जाएंगे और क्या उन्हें डाटा स्टोर करने की अनुमति होगी। भारत में सिर्फ दो प्योर प्ले पेमेंट गेटवे हैं। उनका संचालन वीसा और मास्टरकार्ड करती है। यह देखना होगा कि यह नियम अन्य ऐसे गेटवे बिजनेस पर कैसे लागू होगा, जो एग्रीगेटर्स के तौर पर भी काम करते हैं।

बैंकों में टोकनाइजेशन टेक्नोलॉजी के उपयोग को बढ़ावा मिल सकता है

PWC के पार्टनर और पेमेंट ट्रांसफॉर्मेंशन लीडर मिहिर गांधी ने कहा कि इससे बैंकों में टोकनाइजेशन टेक्नोलॉजी के उपयोग को बढ़ावा मिल सकता है। इस तकनीक में नेटवर्क और एग्रीगेटर्स कार्ड के डिटेल्स स्क्रैंबल्ड फॉर्म में स्टोर कर सकते हैं जो टोकन के पीछे छुपे होते हैं। वीसा, मास्टरकार्ड और NPCI टोकनाइजेशन तकनीक का समर्थन करती है। गाइडलाइन का पालन करने का एक तरीका यह है कि सभी कार्ड डिटेल को टोकनाइज कर दिया जाए।

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