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  • Mukesh Ambani Bank Balance | RBI VS Banks; Tata Birla Bank Balance Supreme Court RTI Hearing On July 22

बैंकों और RBI में ठनी:बैंकों की दलील- टाटा, बिड़ला, अंबानी की बैंक डीटेल कैसे आम जनता के सामने रख दें; 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई

मुंबई2 महीने पहले
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देश के किसी अमीर व्यक्ति का बैंक बैलेंस कितना है? क्या इसकी जानकारी राइट टू इंफॉर्मेशन यानी RTI से जरिए जान सकते हैं? तो अंबानी, टाटा और बिड़ला जैसे देश के सबसे बड़े धनकुबेरों का भी बैंक बैलेंस और उन पर कर्ज की भी जानकारी पता कर सकेंगे।

इस पर रिजर्व बैंक ने भी बैंकों से कहा है कि वे अपने ग्राहकों से जुड़ी गोपनीय जानकारियों को साझा कर सकते हैं। लेकिन SBI ने सुप्रीम कोर्ट से कहा कि हम ग्राहकों की निजी जानकारी साझा कर उनका भरोसा कैसे तोड़ सकते हैं। मुकुल रोहतगी ने HDFC बैंक की ओर से कहा कि RTI कानून केवल सरकारी दफ्तरों पर लागू होता है, प्राइवेट बैंकों पर नहीं।

मामले पर 22 जुलाई को होगी सुनवाई

SBI की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और HDFC बैंक की ओर से मुकुल रोहतगी कोर्ट में पक्ष रख रहे हैं। इन दोनों बैंकों के अलावा एक्सिस बैंक, कोटक बैंक और इंडसइंड बैंक भी गोपनीय जानकारी साझा करने के खिलाफ हैं। मामले पर LN राव की अगुवाई वाली बेंच 22 जुलाई को सुनवाई करेगी। इसी तरह के मामले पर कोर्ट ने 29 अप्रैल को SBI और HDFC बैंक की एक याचिका को खारिज कर दिया था।

निजी जानकारी साझा करने पर बिजनेस पर बुरा असर पड़ेगा

दरअसल, RBI ने बैंकों को सूचना के अधिकार कानून के तहत बड़े डिफॉल्टर्स और वित्तीय रूप से गोपनीय डाटा की जानकारी साझा करने का निर्देश दिया था। इस पर बैंकों ने आपत्ति जताई है।

SBI की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि लोगों ने RTI कानून को बिजनेस बना लिया है। HDFC बैंक ने कहा कि निजी जानकारी साझा करने से कंपनियों के बिजनेस पर बुरा असर पड़ेगा। बैंक ने एपेक्स कोर्ट से पूछा कि 14 बैंकों की निरिक्षण रिपोर्ट की जरूरत आम आदमी को क्यों है?

इसी साल जुलाई में PNB और UBI की याचिका खारिज हुई थी

पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (UBI) ने इसी मामले में जुलाई 2021 में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। लेकिन कोर्ट ने बैंक की याचिका खारिज कर दी थी। दोनों बैंकों ने डिफॉल्टर्स की लिस्ट और निरीक्षण रिपोर्ट समेत अन्य से जुड़ी जानकारी का खुलासा करने के लिए RBI की तरफ से जारी नोटिस पर रोक लगाने की मांग की थी।

पहले भी कोर्ट में पहुंचे हैं इस तरह के मामले

सुप्रीम कोर्ट ने पहले रिजर्व बैंक को ऐसी जानकारी साझा करने पर रोक लगाई। लेकिन बाद में कोर्ट ने अपना फैसला बदल दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी आधार पर जयंतीलाल एन मिस्त्री मामले में 2015 के अपने आदेश के रिव्यू करने से भी इनकार कर दिया था, जिसमें कहा गया था कि RBI को पारदर्शिता कानून के तहत बैंकों और फाइनेंशियल इंस्टिट्यूशन के बारे में जानकारी देनी होगी।