महंगाई करे इंतजार:इकनॉमिक ग्रोथ में रिकवरी को टिकाऊ बनाने पर RBI का फोकस

मुंबई10 महीने पहले
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  • RBI की हालिया फॉरवर्ड गाइडेंस 2008 के बाद जारी US रेगुलेटर फेड रिजर्व की गाइडेंस जैसी है
  • कोविड-19 की दूसरी लहर के चलते दुनियाभर की वित्तीय स्थिति अनिश्चितता भरी रह सकती है

इकनॉमिक ग्रोथ में हो रही रिकवरी को टिकाऊ बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी गाइडेंस को जरूरत के हिसाब से नरम बनाए रखने के संकेतों के साथ पॉलिसी मीटिंग में रेपो रेट को उम्मीद के मुताबिक जस-का-तस रखा है। यह बात देश के सबसे बड़े बैंक (SBI) स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के ग्रुप चीफ इकनॉमिक एडवाइजर सौम्यकांति घोष ने अपनी रिपोर्ट में कही है।

2008 के बाद US फेड की गाइडेंस जैसा रुख

देश के सबसे बड़े बैंक के मुख्य आर्थिक सलाहकार घोष के मुताबिक, अक्तूबर के बाद अब दिसंबर में RBI की तरफ से जारी ऐसी फॉरवर्ड गाइडेंस 2008 के बाद जारी अमेरिका के बैंकिंग रेगुलेटर फेड रिजर्व की गाइडेंस जैसी है। इसको जाने-माने मॉनेटरी थियरिस्ट माइकल वुडफोर्ड मॉनेटरी पॉलिसी के कथन से जोड़कर देखा जा सकता है, जिन्होंने इसको जनता की आशाओं का पोषण करार दिया है, क्योंकि उनके मुताबिक मॉडर्न फाइनेंशियल सिस्टम में बाकी चीजें इसके जितनी अहमियत नहीं रखतीं।

FY21 में 7.5% रहेगी रियल GDP डीग्रोथ

RBI ने FY21 के लिए रियल GDP डीग्रोथ का अनुमान 9.5 पर्सेंट से सुधारकर 7.5 पर्सेंट कर दिया है। उसने चालू दिसंबर तिमाही में खुदरा मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित महंगाई दर 6.8 पर्सेंट रहने का अनुमान दिया है। RBI के मुताबिक मौजूदा वित्त वर्ष की मार्च वाली अंतिम तिमाही में महंगाई दर 5.8 पर्सेंट रह सकती है।

कोविड-19 की दूसरी लहर का डर

घोष के मुताबिक कुछ समय तक दुनियाभर के देशों की वित्तीय स्थिति अनिश्चितता भरी रह सकती है। दरअसल, RBI ने इसको ध्यान में रखते हुए यूरोप, अमेरिका और बड़े इमर्जिंग मार्केट में कोविड-19 की दूसरी लहर के बीच लॉकडाउन के चलते दिसंबर तिमाही में आर्थिक गतिविधियों में सुस्ती बने रहने की आशंका जताई है।

चौथी तिमाही में सुस्त रहेगी ग्लोबल ग्रोथ

घोष का कहना है कि पहले की दबी मांग पूरी होने, कच्चे माल का भंडारण पूरा होने और कोविड-19 की दूसरी लहर के साथ व्यापारिक अनिश्चितता के बीच चौथी तिमाही में वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर सुस्त रहने के आसार हैं। अक्तूबर में प्राइवेट बैंकों का नए लोन की दरें 36 बेसिस प्वाइंट (0.36 पर्सेंट) और फॉरेन बैंकों का 28 बेसिस प्वाइंट (0.28 पर्सेंट) बढ़ाना चिंता वाली बात है। अच्छी बात यह रही कि पब्लिक सेक्टर के बैंकों ने लोन की दरों में 14 बेसिस प्वाइंट (0.14 पर्सेंट) की कमी की।

मनी मार्केट एक्सेस RRB के लिए अच्छा

कोविड-19 के बाद बैंकिंग सिस्टम में नकदी बढ़ जाने के चलते RBI ने क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (RRB) को मनी मार्केट में कारोबार करने की इजाजत दी है। इससे वे अपने पास मौजूदा अतिरिक्त नकदी का इस्तेमाल बेहतर तरीके से कर पाएंगे और दूसरे स्रोतों से आमदनी बढ़ा सकेंगे।

मुसीबतजदा सेक्टरों को लोन इनोवेटिव

26 मुसीबतजदा सेक्टरों को लोन सपोर्ट के लिए ECLGS 2.0 के तहत दी जाने वाली गारंटी और खास रेपो ऑप्शन के जरिए RBI की फंडिंग को घोष ने पॉलिसी से जुड़ा इनोवेटिव कदम बताया है।

फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन सिक्योरिटी पर फोकस

पॉलिसी रिव्यू में RBI ने फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन के तौर तरीकों पर विशेष ध्यान दिया गया है, पेमेंट सिस्टम को ठोस बनाने के लिए इनके गवर्नेंस को बेहतर बनाने पर जोर दिया है। उसने फाइनेंशियल टेक प्रॉडक्ट्स में भरोसा बढ़ाने के लिए इंटरनेट, मोबाइल बैंकिंग, कार्ड पेमेंट वगैरह के लिए बेहतर सिक्योरिटी कंट्रोल के साथ डिजिटल ट्रांजैक्शन को बढ़ावा देने के उपाय किए हैं।

GDP में गिरावट ने पॉलिसी की हद बांधी

घोष के मुताबिक RBI ने इस बार भी मॉनेटरी पॉलिसी के मोर्चे पर इंतजार करना बेहतर समझा। दरअसल GDP में गिरावट और महंगाई में बढ़ोतरी के रुख के चलते मॉनेटरी पॉलिसी से जुड़ी कोशिशों के कारगर होने की गुंजाइश सीमित हो गई है। ऐसे में उसने घरेलू वित्तीय व्यवस्था के नियमन और विकास पर ध्यान दिया है। फरवरी में आम बजट को देखते हुए RBI के लिए संभवत: अप्रैल में हालात का जायजा लेना बेहतर होगा।

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