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कर्ज मुक्त होने की कवायद:रिलायंस इंडस्ट्रीज का दावा- वह अब कर्जमुक्त हो चुकी है, लेकिन टेक्निकली अभी भी कर्जदार हैं आरआईएल और जियो

2 वर्ष पहले
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  • 58 दिन में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने 1.15 लाख करोड़ रुपए जुटाए, शेयरों ने 59 दिनों में निवेशकों को दोगुना लाभ दिया
  • कंपनी के डेट फ्री होने का पता चलते ही शेयरों में उछाल आया, दिन के कारोबार में शेयर 1,788 रुपए तक पहुंचे
  • रिलायंस इंडस्ट्रीज 11 लाख करोड़ रुपए का मार्केट कैपिटलाइजेशन पार करने वाली देश की पहली कंपनी बनी

रिलायंस इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को कहा कि वह कर्जमुक्त हो चुकी है। कंपनी अपने तय समय यानी मार्च 2021 के पहले ही कर्जमुक्त हो गई है। पिछले साल 12 अगस्त को एजीएम में चेयरमैन मुकेश अंबानी ने 31 मार्च 2021 तक कर्जमुक्त होने का लक्ष्य रखा था। लेकिन हकीकत यह है कि तकनीकी रूप से कंपनी अभी कर्जमुक्त नहीं हुई है। हां, इसके कर्जमुक्त होने का रास्ता जरूर पूरा तैयार हो चुका है। 

कंपनी की जानकारी के मुताबिक, उसने 1.15 लाख करोड़ रुपए जियो में 24.70 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचकर जुटाई है। राइट्स इश्यू से 53,125 करोड़ रुपए जुटाए हैं। कुल मिलाकर 1.68 लाख करोड़ रुपए कंपनी के पास है। पिछले साल बीपी को हिस्सेदारी बेचकर 7,000 करोड़ रुपए जुटाए थे। यानी टोटल 1.76 लाख करोड़ रुपए हो गए हैं। कंपनी पर 1.61 लाख करोड़ रुपए नेट डेट है। अब इसे दूसरे तरीके से देखते हैं। 

सालाना रिपोर्ट के मुताबिक 31 मार्च 2020 तक 3,36,297 करोड़ कर्ज

रिलायंस इंडस्ट्रीज की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2020 तक उसके ऊपर करीबन 3.36 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा का कर्ज था। इसमें उसके पास कुल कैश और कैश के बराबर जो राशि थी, वह 1.75 लाख करोड़ रुपए के आस पास थी। कंपनी शुरू से ही इसे ग्रॉस और नेट डेट के रूप में बताती रही है। यानी उसके पास पैसे हैं, वह जोड़कर नेट डेट बता रही है। पर कंपनी के बुक में यह 3.36 लाख करोड़ से ऊपर ही दिखेगा। 

आनंद राठी सिक्योरिटीज के नरेंद्र सोलंकी का कहना है कि टेक्निकली यह डेट फ्री नहीं है लेकिन दूसरी भाषा में यह डेट फ्री इसलिए है क्योंकि जब हम कहते हैं कि नेट डेट तो इसका अर्थ यही होता है कि हमारे पास 10 रुपए कर्ज है और 10 रुपए कैश है। हालांकि कंपनी की बुक्स से यह डेट तभी हटेगा, जब उसके पास पूरे पैसे होंगे, पर राइट्स इश्यू का पैसा तो आएगा ही, भले वह अगले साल आए।

अभी तक मिले हैं 1.35 लाख करोड़ रुपए

कंपनी को पिछले साल बीपी को रिटेल नेटवर्क में हिस्सेदारी बेचने से 7,000 करोड़ रुपए मिले थे। 1.15 लाख करोड़ रुपए जियो में बेचकर मिले हैं। जबकि 13,000 करोड़ रुपए उसे राइट्स इश्यू के पहले चरण के पैसे मिले हैं। 53,125 करोड़ के राइट्स इश्यू का बाकी पैसा तीन चरणों में मई 2021 के बाद मिलेगा। इस तरह से अगर देखा जाए तो कंपनी ने कुल 1.15 लाख करोड़, 7 हजार करोड़ और 13 हजार करोड़ रुपए जुटाया है जो मिलाकर 1.35 लाख करोड़ रुपए होता है।

कंपनी के शुद्ध कर्ज की बात करें तो यह 1.60 लाख करोड़ है। इसमें से 1.35 करोड़ निकाल दें तो अभी भी कंपनी को 26 हजार करोड़ रुपए जुटाने होंगे। 

इसका एक पहलू और देख सकते हैं। कंपनी ने पिछले साल अप्रैल से दिसंबर के बीच 50 हजार करोड़ रुपए का कैश जनरेट किया था। अगर इसे पकड़ लें तो इस दिसंबर तक यह कर्ज मुक्त हो सकती है। या इसे दो तिमाहियों में बांट दें तो कंपनी सितंबर की तिमाही तक भी कर्जमुक्त हो सकती है। हालांकि इसका शुद्ध लाभ मार्च 2020 की तिमाही में बुरी तरह गिरा है। यह 2,580 करोड़ रुपए रहा है। दिसंबर तिमाही में शुद्ध लाभ 9,585 करोड़ रुपए रहा है। 

रिलायसं के ऊपर नहीं है पूरा कर्ज

पूरा 1.60 लाख करोड़ का कर्ज केवल आरआईएल पर नहीं है। इसमें से 1.16 लाख करोड़ रुपए आरआईएल पर बाकी जियो और दूसरी सब्सिडियरी पर है। यही नहीं, सीएलएसए और अन्य रिसर्च एजेंसियों की रिपोर्ट देखें तो उनके मुताबिक 2.40 से 2.60 लाख करोड़ रुपए का कर्ज है। लेकिन कंपनी इसमें स्पेक्ट्रम के कर्ज को अलग करके देखती है। 

इसके मुताबिक आरआईएल पर 1.16 लाख करोड़, जियो पर 15,600 करोड़ रुपए और अन्य सब्सिडयिरी पर 29,400 करोड़ रुपए का कर्ज है। जियो स्पेक्ट्रम की लाइबिलिटी 26,500 करोड़ रुपए, कैपेक्स के लिए जियो क्रेडिटर्स के रूप में 4,500 करोड़ रुपए और कैपेक्स (पूंजी निवेश) के लिए स्टैंडअलोन क्रेडिटर्स का 45,500 करोड़ रुपए है। इस तरह से कुल कर्ज 2.40 से 2.60 लाख करोड़ रुपए होता है। 

58 दिन में 1.15 लाख करोड़ जुटाए, 59 दिन में शेयर दोगुना बढ़ गया

इन सबके बीच रिलायंस और उसके निवेशकों के लिए खुशी की बात है। जब से जियो में हिस्सेदारी बेचनी शुरू हुई, तब से रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों ने उड़ान भरी। गुरुवार को जियो की अंतिम डील हुई और शुक्रवार को शेयर दोगुना बढ़कर 1,759 रुपए पर पहुंच गया। कंपनी के शेयर ने निवेशकों की संपत्तियों को महज दो महीने में ही दोगुना कर दिया है। 23 मार्च को यह शेयर 867 रुपए पर पहुंच गया था। शुक्रवार को यह 6.23 प्रतिशत बढ़कर 1,759 रुपए पर बंद हुआ।

इसी दौरान कंपनी का मार्केट कैप 11 लाख करोड़ रुपए को पार कर गया। इस तरह से 150 अरब डॉलर या 11 लाख करोड़ रुपए के मार्केट कैप वाली यह पहली कंपनी बन गई। वैश्विक स्तर की बात करें रिलायंस इंडस्ट्रीज अब मार्केट कैप के मामले में टोटल एसए, रॉयल डच शेल और बीपी से आगे निकल गई है। हालांकि यह एक्सन मोबाइल, शेवरॉन और सउदी अरामको से पीछे है। 

11.15 लाख करोड़ रुपए पर पहुंचा रिलायंस का मार्केट कैप

शुक्रवार को बाजार बंद होने पर कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन 11.15 लाख करोड़ रुपए रहा। हालांकि इसके अगर राइट्स इश्यू का मार्केट कैपिटलाइजेशन पकड़ लें तो कुल आंकड़ा 11.50 लाख करोड़ रुपए के करीब हो जाता है।  

दरअसल जैसे ही शुक्रवार को कंपनी के डेट फ्री की बात चली इसके शेयरों में अच्छा खासा उछाल देखा गया। दिन के कारोबार में यह शेयर 1,788 रुपए तक जा पहुंचा था। एंजल ब्रोकिंग के डीवीपी ज्योति राय के मुताबिक कंपनी रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स, टेलीकॉम और रिटेल बिजनेस में अच्छी मौजूदगी दर्ज की है। हमारा विश्वास है कि आगे चलकर यह डिजिटल और रिटेल बिजनेस कंपनी की वृद्धि में प्रमुख भूमिका निभाएगा। यही नहीं, रिटेल और टेलीकॉम की लिस्टिंग से यह एक अलग ही ग्रुप के रूप में तैयार होगा। हमारा अनुमान है कि कंपनी डिजिटल बिजनेस में आरआईएल की तरह आगे बढ़ेगी।

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