निवेश / इनकम टैक्स से वेतनभोगी और मध्यम वर्ग को राहत के लिए कई कदम



investment: relief from income tax for salaried and middle class in budget
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investment: relief from income tax for salaried and middle class in budget

Dainik Bhaskar

Feb 05, 2019, 12:02 PM IST

सरकार ने इस साल बजट में सभी क्षेत्रों खासकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और मध्यम वर्ग के लिए कदम उठाकर सबको चौंकाया है। वेतनभोगी और मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर कुछ घोषणाएं की गईं हैं। ऐसे में इन घोषणाओं का गहराई से विश्लेषण कर लेना बेहतर रहेगा, ताकि अगले वित्त वर्ष में आप इसके मुताबिक निवेश कर पाएं। अंतरिम बजट में की गई कुछ बड़ी घोषणाएं इस प्रकार हैं- 

 

  • सालाना पांच लाख रुपए तक कर-योग्य आय पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा। 
  • वेतन पर स्टैंडर्ड डिडक्शन 40,000 से बढ़ाकर 50,000 रुपए कर दिया गया है। 
  • डाकघर-बैंक एफडी के ब्याज पर टीडीएस सीमा 10,000 से बढ़ाकर 40,000 रुपए की गई है। 
  • दूसरे घर के अनुमानित किराये पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा। 
  • आइए इन घोषणाओं का विश्लेषण कर समझें कि इनका आपकी आय क्या असर होगा- 

 

आयकर छूट में बदलाव हुआ है टैक्स स्लैब में नहीं: बजट में धारा 87A के तहत आयकर छूट सीमा को 5 लाख रुपए तक बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। यानी यदि आपकी टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपए तक है तो आपको कोई आयकर नहीं देना होगा। यदि कर-योग्य आय 5 लाख से अधिक है तो आपको सिर्फ स्टैंडर्ड डिडक्शन का लाभ मिलेगा। यहां गौर करने वाली बात यह है कि इस धारा के तहत टैक्स छूट बढ़ाने का प्रस्ताव किया गया है। आयकर की टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी सालाना आय 9 लाख रुपए है। धारा 80C के तहत आपने 1.5 लाख रुपए निवेश किए है और होम लोन का ब्याज 2 लाख रुपए है तो 50,000 रुपए स्टैंडर्ड डिडक्शन घटाने के बाद आपकी टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपए होगी। इस पर कोई इनकम टैक्स नहीं देना होगा। 1.5 लाख की छूट धारा 80C में और होम लोन के ब्याज पर 2 लाख की छूट धारा 24B के तहत मिल जाएगी। 

 

वेतनभोगियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन बढ़ा: बजट में वेतनभोगियों के लिए स्टैंडर्ड डिडक्शन 40,000 से बढ़ाकर 50,000 कर दिया गया है। पिछले बजट में मेडिकल बिल और ट्रांसपोर्ट अलाउंस की जगह स्टैंडर्ड डिडक्शन को लाया गया था। इसकी सीमा 40,000 रुपए तय की गई थी। इस बार बजट में इसे 10,000 रुपए बढ़ाकर 50,000 रुपए कर दिया गया है। 

 

धारा 194A के तहत ब्याज पर टीडीएस की सीमा बढ़ी: डाकघर बचत और बैंक एफडी पर ब्याज से 40,000 रुपए तक की आय को स्त्रोत पर कर कटौती (टीडीएस) के दायरे से बाहर कर दिया है। अभी तक 10,000 रुपए से अधिक ब्याज से आय पर टीडीएस कटता था। अब 40,000 रुपए तक की ब्याज से आय पर टीडीएस नहीं कटेगा, लेकिन इससे अधिक आय पर टीडीएस कटेगा। यह उन करदाताओं के लिए बड़ी राहत है जिन्होंने बैंक एफडी और पोस्ट ऑफिस की डिपॉजिट स्कीमों में अधिक रकम जमा कर रखी है। 

 

दूसरे घर के अनुमानित किराये पर इनकम टैक्स नहीं लगेगा: ऐसे लोग जो एक से अधिक घर के मालिक हैं, बजट में उनके लिए भी राहत की घोषणा की गई है। बजट प्रस्ताव के मुताबिक उन्हें दूसरे घर के अनुमानित किराये पर कोई इनकम टैक्स देना नहीं देना होगा। 

 

(राहुल जैन, ईवीपी एड्लवाइज वैल्थ मैनेजमेंट)

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