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RBI की मॉनेटरी पॉलिसी:रोज की IMPS लिमिट 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए हुई; रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में नहीं किया कोई बदलाव, रेपो रेट 4% पर बरकरार

नई दिल्ली17 दिन पहले
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आज यानी 8 अक्टूबर को रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति कमिटी (MPC) की 3 दिवसीय बैठक खत्म हो गई है। RBI ने रेपो रेट 4% पर और रिवर्स रेपो रेट 3.35% पर बरकरार रखा है। यह लगातार 8वीं बार है जब दरों को जस का तस रखा गया है। इससे पहले मई 2020 में रेपो रेट को घटाया गया था। इसके अलावा RBI ने इमीडिएट पेमेंट सर्विस (IMPS) लिमिट 2 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दी है।

IMPS से 24 घंटे पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं
IMPS की लोकप्रियता काफी तेजी से बढ़ रही है। IMPS को नेशनल पेमेंट सिस्टम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) चलाता है। IMPS से 24 घंटे पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं। अभी तक IMPS के जरिए एक दिन में 2 लाख रुपए तक ट्रांसफर करने की लिमिट थी। अब इसके जरिए 5 लाख रुपए तक एक दिन में ट्रांसफर कर सकते हैं। इसे इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग ऐप, बैंक की ब्रांच, ATM, SMS और IVRS के जरिए कर सकते हैं। इसके जरिए ट्रांसफर किया गया पैसा कुछ ही देर में दूसरी पार्टी के पास पहुंच जाता है।

IPMPS के जरिए शेड्यूल पेमेंट भी कर सकते हैं। अगर आप किसी को आगे की तारीख के लिए पैसा भेजना चाहते हैं तो आप तारीख और समय सेट कर सकते हैं। फिर उस दिन उसी समय पर ऑटोमैटिक यह पैसा ट्रांसफर हो जाएगा।

RTGS और NEFT से अलग कैसे है IMPS
RTGS और NEFT से जब आप पैसा ट्रांसफर करते हैं तो इसे दूसरी पार्टी तक जाने में कुछ समय लगता है। दूसरी ओर IMPS से ट्रांसफर करने में सेकेंड भी नहीं लगता। इसीलिए IMPS का इंस्टेंट ट्रांसफर पेमेंट कहा जाता है। कुछ बैंक अभी भी IMPS पर चार्ज लेते हैं, जबकि कुछ बैंक इसकी फ्री में सुविधा देते हैं।

जुलाई-अगस्त में महंगाई दर अनुमान से कम
RBI गर्वनर शक्तिकांत दास ने कहा कि सभी MPC सदस्य दरें बरकरार रखने के पक्ष में हैं। अकोमडेटिव रुख बरकरार रखने में MPC ने 5-1 से ब्याज दरों में बदलाव नहीं करने का फैसला किया है। इसके अलावा उन्होंने कहा कि इकोनॉमी में रिकवरी के साफ संकेत दिख रहे हैं। अगस्त, सितंबर में मांग में रिकवरी दिखी है और खाद्य महंगाई दर में कमी आई है। निवेश में सुधार शुरुआती दौर में देखने को मिल रहा है। जुलाई-अगस्त में महंगाई दर अनुमान से कम है। RBI महंगाई को नियंत्रण में करने की कोशिश कर रही है। कृषि उत्पादन से ग्रामीण मांग में तेजी आएगी साथ ही उन्होंने कहा कि त्योहारों में शहरी मांग बढ़ने की उम्मीद है।

2021-22 के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 9.5% पर बरकरार
RBI ने फाइनेंशियल ईयर 2021-22 में GDP ग्रोथ के अनुमान में कोई बदलाव नहीं किया है। RBI ने GDP ग्रोथ का अनुमान 9.5% पर बरकार रखा है। RBI ने कहा कि जुलाई-सितंबर 2021 में GDP ग्रोथ 7.9%, अक्टूबर-दिसंबर 2021 में 6.8% और जनवरी-मार्च 2022 में 6.1% रह सकती है। RBI फाइनेंशियल ईयर की पहली तिमाही में रियल GDP ग्रोथ 17.2% रहने का अनुमान जताया है। उन्होंने कहा कि धीरे-धीरे महंगाई दर में कमी लाएंगे।

FY22 में महंगाई दर 5.3% रहने का अनुमान
रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि जुलाई-अगस्‍त में CPI इनफ्लेशन में नरमी आई है। डिमांड आउटलुक में सुधार हो रहा है। केंद्रीय बैंक ने फाइनेंशियल ईयर 2021-22 के लिए खुदरा महंगाई दर (CPI) का अनुमान 5.3% कर दिया है। अगस्‍त की पॉलिसी समीक्षा में RBI ने रिटेल महंगाई दर 5.7% रहने का अनुमान जताया था। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 की पहली तिमाही के लिए RBI ने रिटेल महंगाई दर का अनुमान 5.2% जताया है।

RBI ने स्मॉल फाइनेंस बैंकों के लिए स्पेशल लॉन्ग टर्म रेपो ऑपरेशन (SLTRO) की सुविधा 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है। RBI गवर्नर ने कहा कि लिक्विडिटी मुहैया कराने पर RBI का फोकस। रजिस्टर्ड NBFCs को बैंक 6 महीने और लोन दे सकेंगे।

MPC में 6 सदस्य होते हैं
MPC में 6 सदस्य होते हैं। 3 सरकार के प्रतिनिधि होते हैं। 3 सदस्य RBI का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिनमें गवर्नर शक्तिकांत दास भी शामिल हैं।

क्या होता है रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट?
रेपो रेट वह दर है जिस पर RBI द्वारा बैंकों को कर्ज दिया जाता है। बैंक इसी कर्ज से ग्राहकों को लोन देते हैं। रेपो रेट कम होने का अर्थ होता है कि बैंक से मिलने वाले कई तरह के लोन सस्ते हो जाएंगे। जबकि रिवर्स रेपो रेट, रेपो रेट से ठीक विपरीत होता है। रिवर्स रेट वह दर है, जिस पर बैंकों की ओर से जमा राशि पर RBI से ब्याज मिलता है। रिवर्स रेपो रेट के जरिए बाजारों में लिक्विडिटी यानी नगदी को ​नियंत्रित किया जाता है। यानी रेपो रेट स्थिर होने का मतलब है कि बैंकों से मिलने वाले लोन की दरें भी स्थिर रहेंगी।