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रिटेल इन्फ्लेशन / महंगाई दर साढ़े पांच साल में सबसे ज्यादा, दिसंबर में 5.54% से बढ़कर 7.35% हुई; कांग्रेस बोली- मोदी देश को 30 दिन का रोडमैप बताएं

Retail Inflation December 2019 Latest News and Updates: December India’s Retail inflation Hits to years High
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Retail Inflation December 2019 Latest News and Updates: December India’s Retail inflation Hits to years High
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  • खुदरा महंगाई दर आम लोगों की जरूरत से जुड़ी चीजों की कीमतों में बदलाव से तय होती है
  • इससे पहले जुलाई 2014 में यह दर 7.39% थी, जुलाई  2019 में यह 3.15% थी
  • सब्जियों की महंगाई दर नवंबर में 26% थी, दिसंबर में यह बढ़कर 61% हो गई

Dainik Bhaskar

Jan 14, 2020, 07:29 PM IST

नई दिल्ली. खुदरा (रिटेल) महंगाई दर दिसंबर में बढ़कर 7.35% पहुंच गई। यह साढ़े पांच साल में सबसे ज्यादा है। खुदरा महंगाई दर उन्हीं स्तरों पर पहुंच गई जितनी मोदी सरकार के आने के वक्त थी। जुलाई 2014 में यह दर 7.39% थी। पिछले नवंबर में 5.54% रही थी। सांख्यिकी कार्यालय ने सोमवार को आंकड़े जारी किए। सब्जियों खासकर प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी की वजह से दिसंबर में खुदरा महंगाई दर ज्यादा प्रभावित हुई। सब्जियां दिसंबर में 60.5% महंगी हुईं। खाद्य वस्तुओं की महंगाई दर बढ़कर 14.12% रही। नवंबर में 10.01% थी। मंगलवार को कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौनव्रत धारण कर जनता को भ्रम में नहीं डाल सकते। वे सामने आएं और महंगाई कम करने के लिए अगले 30 दिन का रोडमैप बताएं।

वस्तु दिसंबर में महंगाई दर
सब्जियां 60.5%
फल 4.45%
धान एवं संबंधित उत्पाद 4.36%
मांस-मछली 9.57%
अंडा 8.79%
दालें एवं संबंधित उत्पाद 15.44%
मसाले 5.76%
बिजली-ईंधन 0.70%

विशेषज्ञों ने कहा- 2-3 महीने में हालात सुधरने की उम्मीद

  • अर्थशास्त्रियों का कहना है कि सही वक्त पर ध्यान नहीं दिया गया तो देश स्टैगफ्लेशन में जा सकता है। बेरोजगारी में बढ़ोतरी, ऊंची महंगाई दर और मांग घटने को स्टैगफ्लेशन कहते हैं। 
  • बैंक ऑफ बड़ौदा के चीफ इकोनॉमिस्ट समीर नारंग ने कहा- खुदरा महंगाई दर अगले तीन महीनों में 6% और इसके बाद के तीन महीनों में 5% तक आ जाएगी। सब्जियों के दाम अभी से गिरने लगे हैं। उम्मीद है कि दो-तीन महीनों के भीतर खाद्य महंगाई सुविधाजनक स्तर तक आ जाएगी। आरबीआई 6 फरवरी को जब अपनी सालाना मौद्रिक नीति की समीक्षा करेगा, तब महंगाई पर यथास्थिति बनाए रखेगा। 
  • क्रिसिल के चीफ इकोनॉमिस्ट डीके जोशी ने कहा- खाद्य महंगाई का सबसे ज्यादा असर आम आदमी पर पड़ेगा। लेकिन, यह मौसमी घटना है और अगले 2-3 महीने में यह कम हो जाएगी। अगर महंगाई कम करने की बात है तो आने वाले बजट से किसी को बहुत ज्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए।

खुदरा महंगाई बढ़ने से रेपो रेट में कटौती की उम्मीद कम

आरबीआई मौद्रिक नीति की समीक्षा में ब्याज दरें तय करते वक्त खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखता है। आरबीआई का लक्ष्य रहता है कि खुदरा महंगाई दर 4-6% के दायरे में रहे। यह जुलाई 2016 के बाद पहली बार 6% से ज्यादा यानी आरबीआई के अधिकतम लक्ष्य से ऊपर पहुंची है। बैकिंग सेक्टर के एक्सपर्ट आरके गौतम का कहना है कि खुदरा महंगाई 6% से ऊपर जाने की वजह से आरबीआई द्वारा प्रमुख ब्याज दर रेपो रेट में कटौती की गुंजाइश काफी कम रहेगी। आरबीआई 6 फरवरी को मौद्रिक नीति की समीक्षा के बाद ब्याज दरों का ऐलान करेगा। केंद्रीय बैंक ने पिछले साल रेपो रेट में 1.35% कमी की थी।

इकोनॉमी के लिए खुदरा महंगाई दर के आंकड़े कितने अहम : 2 वजह
खानपान से जुड़ी चीजें कितनी किफायती : यह दर बताती है कि आम आदमी के खानपान से जुड़ी चीजें महंगी हो रही हैं या सस्ती? क्योंकि खुदरा महंगाई दर में खाने-पीने की चीजों की हिस्सेदारी 50% के आसपास है। जैसे- सब्जियां, फल, धान, मांस-मछली।

महंगाई भत्ता : केंद्र सरकार खुदरा महंगाई दर बताने वाले कंज्यूमर प्राइज इंडेक्स के आधार पर ही महंगाई भत्ते (डीए) की सालाना दर तय करती है। डीए में बढ़ोतरी का फायदा 50 लाख कर्मचारियों और 62 लाख पेंशनरों को मिलता है।

खुदरा महंगाई दर : 157 देश इसी आधार पर नीतियां तय करते हैं
चुनिंदा वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में कमी या बढ़ोतरी से महंगाई दर तय होती है। रिटेल इन्फलेशन यानी खुदरा महंगाई दर वह दर है जो जनता को सीधे तौर पर प्रभावित करती है। खुदरा महंगाई दर को बताने वाला सूचकांक कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स होता है। यह इंडेक्स उपभोक्ताओं द्वारा किसी भी वस्तु या सेवा के लिए किए जाने वाले औसत भुगतान पर आधारित होता है। 157 देश खुदरा महंगाई दर के आधार पर ही नीतियां तय करते हैं। भारत में खुदरा महंगाई दर में खाद्य और पेय पदार्थ से जुड़ी चीजों और एजुकेशन, कम्युनिकेशन, ट्रांसपोर्टेशन, रीक्रिएशन, अपैरल, हाउसिंग और मेडिकल केयर जैसी सेवाओं की कीमतों में आ रहे बदलावों को शामिल किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों की 448 और शहरी क्षेत्रों की 460 चीजों और सेवाओं को कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स में शामिल किया जाता है। दूसरी तरह की महंगाई दर को थोक महंगाई दर कहते हैं। इसे होलसेल प्राइस इंडेक्स के आधार पर तय किया जाता है। इस इंडेक्स में 697 वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव के आधार पर बदलाव होता है।

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