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सचिन तेंदुलकर का टैक्स विवाद:क्रिकेट के गॉड ने कहा था उनका प्रोफेशन एक्टिंग और मॉडलिंग है, वह सिर्फ एक नॉन प्रोफेशनल क्रिकेटर हैं

नई दिल्ली11 दिन पहले
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​​​​​​​सचिन आर तेंदुलकर Vs असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स मामले में टैक्स अधिकारियों ने सचिन के तर्क को खारिज कर दिया था - Dainik Bhaskar
​​​​​​​सचिन आर तेंदुलकर Vs असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स मामले में टैक्स अधिकारियों ने सचिन के तर्क को खारिज कर दिया था
  • इनकम टैक्स एपीलेट ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में माना कि सचिन तेंदुलकर एक कलाकार भी हैं
  • अपीलेट ट्रिब्यूनल ने सचिन को टैक्स डिडक्शन का लाभ भी दिया

सचिन तेंदुलकर एक क्रिकेटर हैं या एक्टर हैं या एक कलाकार? कोई भी पलभर में इस सवाल का जवाब दे देगा। लेकिन एक ऐसा भी वाकया आया, जब इस बात पर बड़ा विवाद छिड़ गया था कि वह एक क्रिकेटर हैं या एक्टर हैं या एक कलाकार।

2011 में भारत ने जब क्रिकेट वर्ल्ड कप जीता था, उसी साल टैक्स डिडक्शन के एक मामले सचिन ने खुद ही कहा था कि वह पेशेवर क्रिकेटर नहीं बल्कि एक एक्टर हैं और अगर उन्हें एक्टर नहीं माना जाता है, तो वह एक कलाकार हैं। सचिन आर तेंदुलकर बनाम असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ इनकम टैक्स मामले में टैक्स अधिकारियों ने सचिन के तर्क को खारिज कर दिया था। इनकम टैक्स एपीलेट ट्रिब्यूनल (ITAT) ने हालांकि इस विवाद का फैसला दिया और कहा कि सचिन तेंदुलकर एक कलाकार भी हैं। अपीलेट ट्रिब्यूनल ने सचिन को टैक्स डिडक्शन का लाभ भी दिया था। आइए विस्तार से जानते हैं क्या था यह मामला....

सेक्शन 80RR के तहत टैक्स डिडक्शन का विवाद

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म टैक्सगुरु के मुताबिक मोटे तौर पर यह मामला इनकम टैक्स एक्ट 1995 के सेक्शन 80RR के तहत टैक्स डिडक्शन का था। तेंदुलकर को ESPN स्टार स्पोर्ट्स, पेप्सिको और VISA के लिए किए गए विभिन्न विज्ञापनों और स्पांरशिप्स से 5,92,31,211 रुपए मिले थे। इसके बाद सचिन ने 1,77,69,363 रुपए के डिडक्शन का क्लेम किया, क्योंकि उन्हें विदेशी मुद्रा में यह रकम हासिल हुई थी। पूरा मामला दो हिस्सों में बंटा हुआ था।

  1. क्या असेसी लेखक है, प्लेराइट है या कलाकार, संगीतज्ञ, एक्टर या खिलाड़ी है?
  2. सचिन को मिली जिस रकम पर विवाद है, क्या वह उनके पेशेवर कार्यों से मिली है?

तेंदुलकर ने खुद को एक नॉन प्रोफेशनल क्रिकेटर बताया

सचिन तेंदुलकर ने दावा किया था कि वह एक एक्टर और मॉडल हैं और यही उनका बिजनेस और प्रोफेशन है। उनके मुताबिक वह सिर्फ एक नॉन प्रोफेशनल क्रिकेटर हैं। जो पैसे वह क्रिकेट खेलकर और लोगो मनी के रूप में BCCI से हाासिल करते हैं, वह अन्य स्रोतों से होने वाली आय है, क्योंकि एक्टिंग उनका पेशा है। उन्होंने यह भी कहा कि 1997 से ही उन्हें एक्टिंग के क्षेत्र में टैक्स डिडक्शन का लाभ मिल रहा है, इसलिए इसे अब भी नहीं रोका जाए। सचिन ने यह भी कहा था कि यदि उन्हें एक्टर के रूप में असेस नहीं किया जाता है, तो उन्हें आर्टिस्ट (कलाकार) के तौर पर असेस किया जाए, क्योंकि वह एक पब्लिक परफॉर्मर हैं।

असेसिंग ऑफीशर ने सवाल उठाया कि यदि सचिन क्रिकेटर नहीं होंगे तो भला और कौन क्रिकेटर होगा

असेसिंग ऑफीशर (AO) और CIT सचिन के तर्क को स्वीकार नहीं कर पा रहे थे। AO ने ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी की मदद से पेशेवर क्रिकेटर की परिभाषा तय की। इसके मुताबिक पेशेवर क्रिकेटर वह है, जो क्रिकेट के पेशा से जुड़ा है, दूसरा यह कि वह पेड जॉब के तौर पर क्रिकेट खेलता हो न कि शौकिया तौर पर। दूसरी तरह से यह कहा जा सकता है कि क्रिकेट खेलना उसकी जीविका है और इसलिए यह उसका पेशा है। AO ने यह भी सवाल उठाया कि यदि सचिन क्रिकेटर नहीं हैं, तो भला और किसे क्रिकेटर माना जाए।

CIT ने आर्टिस्ट माने जाने के तर्क को भी खारिज कर दिया

AO ने यह भी कहा कि सचिन ने अभिनय कला के बल पर इन विज्ञापनों में काम नहीं किया, बल्कि क्रिकेट में मिली सफलता और सोहरत के बल पर यह काम किया। इसलिए सिर्फ अभिनय के आधार पर टैक्स डिडक्शन का लाभ नहीं दिया जा सकता है और विवादित आय क्रिकेट से जुड़ी आय है। CIT ने भी AO की राय से सहमति जताते हुए कहा कि जब भी सचिन टीवी कमर्शियल, स्पांसरशिप शो से पैसे कमाते हैं, तो यह सहायक गतिविधियों से जुड़ी आय मानी जाएगी न कि क्रिकेट के पेशे की आय। CIT ने इस तर्क को भी खारिज कर दिया कि सचिन एक आर्टिस्ट हैं, क्योंकि वह विज्ञापनों या शो में सिर्फ अपीयर होते हैं। इसलिए उन्हें आयकर अधिनियम के सेक्शन 80RR का लाभ नहीं दिया जा सकता है।

टैक्स विभाग के वकील ने कहा कि सचिन आईडेंटिटी क्राइसिस का शिकार हैं

सचिन के वकील ने दलील दी कि भले ही सचिन को क्रिकेट के कारण ही विज्ञापन मिलते हैं, लेकिन सेक्शन 80RR में कहीं भी कलाकार के परफॉर्मेंस के लिए कोई क्षमता तय नहीं की गई है। साथ ही एक व्यक्ति एक साथ दो पेशे में हो सकता है। विरोधी पक्ष के वकील ने हर्ष भोगले बनाम AO मामले का उदाहरण दिया, जिसमें फैसला दिया गया था कि प्रजेंटर या कमेंटेटर सेक्शन 80RR का लाभ नहीं ले सकता, क्योंकि वह कलाकार नहीं होता है। विरोधी पक्ष के वकील ने यहां तक कह दिया कि असेसी (सचिन तेंदुलकर) आइडेंटिटी क्राइसिस के शिकार हैं। उन्हें पता नहीं कि वह क्रिकेटर हैं या कलाकार हैं या अभिनेता हैं। इसलिए उन्हें किसी भी तरह का टैक्स लाभ नहीं देना चाहिए।

ITAT ने कहा कि एक से अधिक पेशा रखने पर कोई पाबंदी नहीं

ITAT ने हालांकि AO और CIT दोनों के फैसले को रद कर दिया। उसने कहा कि सचिन वास्तव में कलाकार हैं। ITAT ने कहा कि बेशक सचिन क्रिकेटर हैं, लेकिन जब वह लाइट और कैमरा के सामने होते हैं, तब उन्हें एक कलाकार की तरह से अपनी रचनात्मकता, कल्पना और हुनर का उपयोग करना होता है। विज्ञापन में काम करने के लिए उनके पास अपना अलग हुनर है। इसलिए ITAT ने उन्हें एक कलाकार भी मानते हुए टैक्स डिडक्शन का लाभ दिया। ITAT ने कहा कि एक से अधिक पेशा रखने पर कोई पाबंदी नहीं है। इस तरह इस टैक्स विवाद में भी सचिन जीत गए। लोग कहते हैं कि सचिन चाहे मैदान पर हों या मैदान से बाहर, उनके लिए कुछ भी असंभव नहीं।

इनकम टैक्स एक्ट का सेक्शन 80RR क्या कहता है

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म इंडियनकानून डॉट ऑर्ग के मुताबिक इनकम टैक्स एक्ट, 1995 के सेक्शन 80RR के तहत भारतीय निवासी लेखक, प्लेराइट, आर्टिस्टस्ट, संगीतज्ञ, अभिनेता या खिलाड़ी (एथलीट सहित) को कुछ स्थितियों में टैक्स डिडक्शन का लाभ मिलता है। यह लाभ तब मिलता है, जब दूसरे देश की सरकार या विदेशी व्यक्ति से उन्हें पेशेवर आय होती है। ग्रॉस इनकम की गणना करते समय ऐसी आय के एक हिस्से को कुल आय में से डिडक्ट किया जा सकता है।

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