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126 साल के इतिहास में पहली बार:बाटा अब दिल्ली के संदीप कटारिया के भरोसे, पहले भारतीय जो बने ग्लोबल सीईओ

मुंबई7 महीने पहले
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संदीप कटारिया अब वैश्विक संगठनों पर राज कर रहे अन्य भारतीयों में जैसे कि माइक्रोसॉफ्ट के सत्य नडेला, गूगल के सुंदर पिचाई, मास्टरकार्ड के अजय बग्गा, आईबीएम के अरविंद कृष्ण, रेकिट बेन्किज़र के लक्ष्मण नरसिम्हन, डियाजियो के इवान मैथ्यूज और नोवार्टिस के वसंत नरसिम्हन के क्लब में शामिल हो गए हैं - Dainik Bhaskar
संदीप कटारिया अब वैश्विक संगठनों पर राज कर रहे अन्य भारतीयों में जैसे कि माइक्रोसॉफ्ट के सत्य नडेला, गूगल के सुंदर पिचाई, मास्टरकार्ड के अजय बग्गा, आईबीएम के अरविंद कृष्ण, रेकिट बेन्किज़र के लक्ष्मण नरसिम्हन, डियाजियो के इवान मैथ्यूज और नोवार्टिस के वसंत नरसिम्हन के क्लब में शामिल हो गए हैं
  • कटारिया को भारत और यूरोप में यूनिलीवर, यम ब्रांड्स और वोडाफोन में 24 साल का अनुभव है
  • कटारिया की अगुवाई में बाटा इंडिया ने टॉपलाइन ग्रोथ में 10 पर्सेंट से ज्यादा की बढ़त हासिल की है
  • 1894 में टॉमस बाटा द्वारा स्थापित बाटा को अक्सर फुटवियर उद्योग का हेनरी फोर्ड कहकर बुलाया जाता है

बाटा के 126 साल के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है जब एक भारतीय इसका नेतृत्व करने जा रहा है। 49 वर्षीय संदीप कटारिया को कंपनी का ग्लोबल सीईओ नियुक्त किया गया है। वर्तमान सीईओ एलेक्सिस नैसार्ड रिटायर होने वाले हैं। कटारिया अभी बाटा इंडिया के सीईओ हैं।

कटारिया गूगल और अन्य के क्लब में शामिल

कटारिया अब वैश्विक संगठनों पर राज कर रहे अन्य भारतीयों में जैसे कि माइक्रोसॉफ्ट के सत्य नडेला, गूगल के सुंदर पिचाई, मास्टरकार्ड के अजय बग्गा, आईबीएम के अरविंद कृष्ण, रेकिट बेन्किज़र के लक्ष्मण नरसिम्हन, डियाजियो के इवान मैथ्यूज और नोवार्टिस के वसंत नरसिम्हन के क्लब में शामिल हो गए हैं।

तुरंत पदभार संभाला कटारिया ने

कटारिया ने वैश्विक सीईओ के रूप में तत्काल प्रभाव से कार्यभार संभाल लिया है क्योंकि नैसार्ड लगभग पांच साल बाद पद छोड़ रहे है। उनके बारे में कहा जा रहा है कि वे कांतार में शामिल होने जा रहे हैं। आईआईटी-दिल्ली के इंजीनियर और 1993 के पीजीडीबीएम बैच के एक्सएलआरआई में गोल्ड मेडल विजेता कटारिया को भारत और यूरोप में यूनिलीवर, यम ब्रांड्स और वोडाफोन में 24 साल का कार्य अनुभव है।

कटारिया 2017 में बाटा इंडिया में सीईओ बने

स्विट्जरलैंड-मुख्यालय वाले इस फुटवियर कंपनी के लिए भारत बहुत बड़ा बाजार है। कटारिया की अगुवाई में बाटा इंडिया ने टॉपलाइन ग्रोथ में 10 पर्सेंट से ज्यादा की बढ़त हासिल की है। इससे उसने अपने मुनाफे को दोगुना कर दिया है और ब्रांड की छवि को फिर से संवारने और युवा ग्राहकों को टारगेट कर इसे सरप्राईजिंग्ली बाटा जैसा नारा भी दिया। बाटा इंडिया ने 2019-20 में 3,053 करोड़ रुपए के राजस्व पर 327 करोड़ रुपए का शुद्ध लाभ कमाया।

भारत में फुटवियर सेक्टर की अच्छी बढ़त

बाटा इंडिया के चेयरमैन अश्वनी विंडलास ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत की टीम ने फुटवियर वॉल्यूम, राजस्व और मुनाफे में असाधारण वृद्धि दर्ज की है। अत्यधिक प्रतिस्पर्धी फुटवियर बाजार में बाटा ने अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराइ है। बाटा ग्रुप और बाटा इंडिया दोनों ही संदीप के व्यापक अनुभव से लाभ लेने वाले हैं।

आगे की यात्रा से उत्साहित हैं कटारिया

कटारिया ने एक बयान में कहा कि मैं इस नई नियुक्ति को स्वीकार कर खुद को सम्मानित महसूस कर रहा हूं और आगे की यात्रा से उत्साहित हूं। बाटा एक ब्रांड है जो कम कीमत और अच्छी क्वालिटी वाले जूतों के लिए जाना जाता है। मुझे भारत में बाटा की सफलता का हिस्सा होने का सौभाग्य मिला है। मैं दुनिया के शू-मेकर्स के रूप में 120 साल के इतिहास को और भी गौरवशाली बनाने की आशा करता हूं।

हालाँकि साल 2020 ने हमारे समक्ष बड़ी चुनौतियां पेश की हैं, पर हमारे ब्रांडों की अपील और हमारे लोगों का जुनून आने वाले वर्षों में हमारी संभावनाओं को और भी मजबूत बना रहा है।

1984 में टॉमस बाटा ने शुरू किया था बाटा को

1894 में टॉमस बाटा द्वारा स्थापित बाटा को अक्सर फुटवियर उद्योग का हेनरी फोर्ड कहकर बुलाया जाता है। बाटा दुनिया की अग्रणी जूता बनाने वाली कंपनियों में से एक है, जो काफी सस्ती कीमतों पर स्टाइलिश फुटवियर डिजाइन करता है। एक परिवार के मालिकाना हक वाली यह कंपनी का 5,800 दुकानों के जरिये सालाना 18 करोड़ से अधिक जूते बेचती है। इसका नेटवर्क पांच महाद्वीपों में फैला है। इसमें 22 बाटा की खुद की मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी है। बाटा 70 से अधिक देशों में काम करता है और इसके 35,000 कर्मचारी हैं।

देश के हर कोने में बाटा स्टोर

भारतीय ग्राहकों के लिए इस ब्रांड का देश के हर कोने में बाटा स्टोर है और संभवत: एकमात्र फुटवियर ब्रांड है जिसके पास सभी पूरी रेंज उपलब्ध हैं। बाटा सबसे बड़ा फुटवियर रिटेलर है, जो हर साल लगभग 5 करोड़ जोड़े बेचता है और हर दिन 1 लाख 20,000 से अधिक ग्राहकों को सेवा प्रदान करता है। हश पप्पीज, पावर, मैरी क्लेयर और शोल जैसे इसके ब्रांड घरेलू नाम हैं।

ई-कॉमर्स में भी है बाटा

यह ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस और पैन-इंडिया के हजारों मल्टी-ब्रांड फुटवियर डीलर स्टोरों में भी उपलब्ध है। अपने उत्पादों को लाखों भारतीयों के लिए सुलभ बनाने के लिए, बाटा ने अपने चैनल विकसित किए हैं। हाल ही में बाटा चैट शॉप, बाटा होम डिलीवरी और बाटा स्टोर-ऑन-व्हील जैसे नए चैनल लॉन्च किए हैं।

चीन के बाद भारत फुटवियर का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक

इस साल जुलाई की एक रिपोर्ट के अनुसार, चीन के बाद भारत फुटवियर का दूसरा सबसे बड़ा ग्लोबल उत्पादक है, जो 22 अरब जोड़े के वार्षिक वैश्विक उत्पादन का 10% है। भारतीय फुटवियर का बाजार वित्त वर्ष 2020 तक 600 अरब रुपए होने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2023 तक इसके लगभग 720 अरब रुपए तक पहुंचने का अनुमान है। भारत में फुटवियर की खपत चीन और अमेरिका के बाद तीसरे स्थान पर है। वर्तमान में, देश में उत्पादित फुटवियर का 90% उत्पादन घरेलू बाजार में ही खप जाता है। वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा फुटवियर बाजार होने के बावजूद, भारत में प्रति व्यक्ति फुटवियर की खपत दुसरे देशों के मुकाबले सबसे कम है।

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