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  • Sanjay Shah, Who Quit The Job And Became The Owner Of 5100 Crore, Is Facing Trial In Many Countries After The Scam Allegations.

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बिजनेस मैन की दिलचस्पी कहानी:नौकरी छोड़ कर 5100 करोड़ के मालिक बने, घोटाले के आरोपों के बाद कई देशों में मुकदमे का सामना कर रहे हैं संजय शाह, आगे पता नहीं क्या होगा

मुंबई6 महीने पहले
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डेनमार्क में तो शाह के खिलाफ दाखिल मुकदमे ने आम जनता को भी सड़कों पर ला दिया है। यह देश पहले से ही आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा था और कोरोना महामारी ने उसकी हालत और पतली कर दी है - Dainik Bhaskar
डेनमार्क में तो शाह के खिलाफ दाखिल मुकदमे ने आम जनता को भी सड़कों पर ला दिया है। यह देश पहले से ही आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा था और कोरोना महामारी ने उसकी हालत और पतली कर दी है
  • संजय शाह के बिजनेस का फैलाव लंदन से दुबई तक है, कानूनी खामियों से उठाया फायदा
  • शाह ने कहा कि अब मैं जहां हूं, मैं बस ऊब रहा हूं और तंग आ गया हूं, पता नहीं मामला कितना लंबा चलेगा

जब संजय शाह ने एक दशक पहले आर्थिक संकट के चलते अपनी नौकरी गंवा दी थी तो उनकी गिनती सिर्फ एक छोटे स्तर के व्यापारियों में होती थी। उनका काम उनके हाथ से छिन गया था। पर संजय शाह ने वापसी करने में देरी नहीं की। उन्होंने डिविडेंड टैक्स लॉ को लेकर जल्द ही अपना एक सेटअप स्थापित कर और लिया। कुछ ही सालों के अंदर संजय शाह ने एक साधारण सी ट्रेडिंग कंपनी शुरू की। इसके जरिए वह कम से कम 70 करोड़ डॉलर(5,110 करोड़ रुपए) और एक बढ़िया प्रॉपर्टी पोर्टफोलियो के मालिक बन गए।

उनके बिजनेस का फैलाव लंदन के उनके घर से लेकर दुबई के रीजेंट पार्क तक था। उनके पास अब तक 62 फुट का एक याट आ चुका था। साथ ही ड्रेक, एल्टन जॉन, औऱ जेनिफर लोपेज जैसे कलाकारों को अपनी चैरिटी के लिए काम हेतु बुक कर लिया था।

सफलता के पीछे ये विवाद भी हैं

संजय शाह की सुनहरी कामयाबी के पीछे कुछ विवाद भी पैदा हुए हैं। हालांकि शाह हमेशा से यह कहते आए हैं कि उन्होंने कानूनी तौर तरीकों से कामयाबी पाई है। पूरे यूरोप भर में कानून की खामियों की वजह से सभी व्यापारियों को स्टार्ट के एक ही होल्डिंग पर बार-बार डिविडेंड जमा करने की परमिशन मिलती है। यह सौदा शाह जैसे लोगों के लिए बेहद ही आकर्षक साबित हुआ। हालांकि, जर्मनी के सांसदों ने तो इसे इतिहास की सबसे बड़ी टैक्स चोरी करार दी है।

डेनमार्क की जीडीपी का एक प्रतिशत है संजय का बिजनेस

डेनमार्क अपने कुल जीडीपी के 1% यानी कि कुल 2 अरब डॉलर की राशि को पाने के लिए पूरी कोशिश कर रहा है। उसने शाह के पूरे एंटरप्राइज को एक पहेली करार दिया है। इसके वकील उन बैंक रिकॉर्ड तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं जो उनकी बातों को अदालत में सही साबित कर सके। अथॉरिटीज ने शाह के फॉर्चून को करीब-करीब फ्रीज कर दिया है और अब उन्हें कई देशों में आपराधिक मुकदमों का सामना करना पड़ रहा है। उनके वकीलों ने बताया कि यदि वह यूरोप के लिए खाड़ी शहर छोड़ देते हैं तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हालांकि उनके खिलाफ अभी तक कोई चार्जशीट दायर नहीं हुई है।

दुबई में 4.5 मिलियन डॉलर का है आलीशान घर

दुबई स्थित अपने 4.5 मिलियन डॉलर की कीमत वाले आलीशान घर से एक इंटरव्यू में शाह ने कहा कि उन्हें अपनी संपत्ति कमाने के तरीकों के बारे में कोई पछतावा नहीं है। बैंकर्स के पास कोई नैतिकता नहीं बची है। 50 साल के शाह ने एक वीडियो कॉल के जरिए बताया कि चाहे हेज फंड मैनेजर ही क्यों ना हो, किसी के पास कोई भी नैतिकता नहीं बची है।

सारे पैसे कानून के तहत कमाया है

मैंने अपने सारे पैसे कानून के दायरे में रहकर ही कमाया है। याद रहे कि शाह और उनके द्वारा स्थापित फर्म "सोलो कैपिटल पार्टनर्स एलएलपी" फिलहाल डेनिश कम-एक्स घोटाले में घिरी हुई है। इसके बारे में कहा गया है कि शाह की कंपनी ने निवेशकों को तेजी से शेयर बेचने और डिविडेंड टैक्स पर कई बार रिफंड का दावा करने में मदद की।

कई व्यापारियों की हो रही है जांच

वहां के अधिकारी कई देशों में फैले सैकड़ों बैंकरों, व्यापारियों और वकीलों के क्रियाकलापों की जांच कर रहे हैं और वह टैक्स देनेवालों के फंड में अरबों यूरो आने के हिसाब का पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं। परंतु शाह लगातार कहते आ रहे हैं कि उन्हें इस मामले में बलि का बकरा बनाया जा रहा है। संजय शाह ने अथॉरिटी को चुनौती देते हुए उन्हें अपराधी साबित करने को कहा है। उन्होंने कहा कि लोग साबित करें कि मैंने धोखाधड़ी से पैसा कमाया है।

सिस्टम ने पैसा कमाने का रास्ता दिया

संजय कहते हैं कि मैं तो दावे के साथ कह सकता हूं कि सिस्टम ने मुझे पैसा कमाने का रास्ता दिया। डेनमार्क की टैक्स एजेंसी स्कर्ट का कहना है कि उसने शाह की 3.5 बिलियन टेनिस कॉर्नर को फ्रीज किया है। इसमें 20 मिलियन डॉलर की लंदन की हवेली भी शामिल है, जिसे लेकर पूर्व बैंकर और उनके कथित सहयोगियों के खिलाफ मुकदमा चलाया जा रहा है।

एजेंसी ने कहा कि ट्रेड में वास्तविक शेयर शामिल नहीं हैं

एक बयान जारी कर एजेंसी ने कहा है कि इसने अभी तक ऐसे कोई साक्ष्य नहीं देखे हैं जो साबित करें कि इन ट्रेड्स में वास्तविक शेयर शामिल थे, जिनसे शाह ने डिविडेंड का रिफंड कमाया। ऐसा लगता है कि इसका किसी भी शेयरों से कोई भी वास्तविक होल्डिंग या संबंध नहीं है और यह एक तरह से सिर्फ कागज पर लेन-देन दिख रहा है। संजय शाह अभी भी अपनी संपत्तियों को किराए पर देकर 1 साल में लगभग दो लाख पाउंड कमा ले रहे हैं जो कि उनके अनुसार आधा से ज्यादा कमाई कोविड महामारी के पहले की है।

जर्मनी में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है

इन सबके अलावा संजय शाह को जर्मनी में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है जहां की अथॉरिटी उन्हें एक वांटेड की तरह देख रही हैं। उनके ऊपर आरोप है कि उन्होंने फाइनेंस इंडस्ट्री में काफी हेर-फेर कर पैसा बनाया है। डेनमार्क में तो शाह के खिलाफ दाखिल मुकदमे ने आम जनता को भी सड़कों पर ला दिया है। यह देश जो कि पहले से ही आर्थिक मंदी के दौर से गुजर रहा था और जहां पर कोरोना महामारी ने उसकी हालत और पतली कर दी है, अब इसका कहना है कि इस देश को संजय शाह जैसे व्यापारियों ने लूटा है।

डेनमार्क में कोरोना के मामले में यह गंभीर किस्म का मामला है

कोपेनहेगन विश्वविद्यालय में कानून के प्रोफेसर एलेग्जेंडर आंध्र ने कहा कि डेनमार्क जैसे शहर में और खासकर कोरोना के दौरान इस तरह का कोई भी डेवलपमेंट काफी गंभीर किस्म का हो जाता है। उन्होंने कहा कि देश के टैक्स अधिकारियों ने बड़े-बड़े फ्रॉड केस को अच्छी तरह से हैंडल किया है, पर 2 अरब डॉलर के इस अपराध के मामले में उन्हें सफलता नहीं मिली है।

लंदन के लिए घर से निकलने पर हो सकती है गिरफ्तारी

शाह कहते हैं कि जैसे ही वह लंदन जाने के लिए अपने घर से निकलेंगे उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। शादीशुदा और तीन बच्चों के पिता शाह दुबई में 2009 से रह रहे हैं। पिछले 5 साल उन्होंने वकीलों के साथ मुकदमेबाजी करने में बिताए हैं। कई देशों की एजेंसियाँ उनके पीछे पड़ी हुई हैं और ऐसे वक्त में वह लोगों को यही सलाह देते हैं कि आप अपने टैक्स कोड को पहचानिए। यह काफी अच्छा और आसान है कि किसी की फोटो अखबार के फ्रंट पेज पर छाप दो और कहो कि देखिए दुबई में रहने वाले इस आदमी को। यह हर दिन समुद्र के तट पर बैठकर कोलाडा को पीता है और जब कोई इससे नौकरी मांगने आता है तो उसे जवाब मिलता है कि अपने लीगल सिस्टम को पहचानो।

शाह अकेले नहीं हैं

ऐसा नहीं है कि शाह इकलौते शख्स हैं जिनके पीछे कई देशों की एजेंसियां पड़ी हुई हैं। जर्मन अधिकारियों ने डेनमार्क को पीछे छोड़, इन मामलों में लिप्त कम से कम 20 लोगों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा दायर किया है। इससे पहले यहां की कोर्ट ने एक लैंडमार्क ट्रायल में दो पूर्व यूनिक्रेडिट व्यापारियों को टैक्स चोरी के लिए दोषी ठहराया था। उनमें से एक मार्टिन शील्ड्स ने कोर्ट को बताया कि उनके पहले के अधिकारी ने किस तरह से लाखों करोड़ों डॉलर कमाए थे। अब उन्हें अपने कामों पर पछतावा हो रहा है और अब वे खुद को एक्स-कम इंडस्ट्री में शामिल करना पसंद नहीं करेंगे। शील्ड्स ने जेल जाने से परहेज किया और जांच में सहयोग किया।

एक्स-कम डील काफी लोकप्रिय है

एक दशक पहले एक्स-कम डील पूरे फाइनेंस जगत में काफी लोकप्रिय हुआ करती थी। शाह कहते हैं कि उनके दिमाग में इसका विचार तब आया जब वे लंदन में व्यापार के सिलसिले में दुनिया भर के बड़े-बड़े बैंकों की मीटिंग में शामिल हुआ करते थे। एक सर्जन के बेटे ने 1990 में अपनी मेडिकल की पढ़ाई छोड़ दी और फाइनेंस में आ गए। उन्होंने पहली बार 2000 के दशक की शुरुआत में क्रेडिट सुईस ग्रुप एजी में डिविडेंड टैक्स का फायदा उठाने वाले व्यापारियों को देखा, जिसे डिविडेंड आर्बिट्रेज के नाम से जाना जाता था।

लंदन में स्विस बैंक के प्रवक्ता विल गोविंद ने कहा कि सारे मुकदमे तब दायर किये गए, जब संजय शाह ने क्रेडिट सुईस के साथ काम किया।

राबोबैंक से निकाल दिया गया था

शाह ने तब तक एक्स-कम को नहीं अपनाया जब तक उन्हें एम्स्टर्डम स्थित राबोबैंक ग्रुप द्वारा काम से निकाल नहीं दिया गया। उस समय उद्योग पर वित्तीय संकट मंडराने लगा था। निकाले जाने के बाद शाह कहते हैं कि उन्हें कई ब्रोकरेज फर्मों से प्रस्ताव मिले जिनमें डिविडेंड बंटवारा शामिल था, लेकिन वह उनके लिए पर्याप्त नहीं था। इसलिए उन्होंने अपनी खुद की फर्म स्थापित की।

मैं हिस्सा बनने की बजाय कुछ बनाना चाहता हूं

शाह ने कहा कि मैं एक हिस्सा नहीं बनना चाहता। मैं बहुत कुछ बनाना चाहता हूं। शाह की महत्वाकांक्षा को उनकी अपनी कंपनी के नाम "सोलो कैपिटल पार्टनर्स" से पहचाना जा सकता है। शाह ने कहा कि जब उन्होंने सोलो शुरू किया तो उनके पास लगभग आधा मिलियन पाउंड थे। आधे दशक के भीतर, उनकी कुल संपत्ति कई गुना बढ़ गई। उनके अनुसार, जेपी मॉर्गन चेज़ एंड कंपनी ने भी उन्हें मदद करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई क्योंकि वे फर्म के पहले कस्टोडीयन बैंक थे।

शाह की योजनाएं गजब थीं

शाह ने कथित रूप से जो भी योजनाएं बनाई थी, वह दुस्साहसी प्रकृति की थी। सैकड़ों विदेशी संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने का दावा करते हुए यूके में एजेंटों के एक छोटे समूह ने 2012 और 2015 के बीच स्काट को लिखा कि उन्हें डेनिश शेयरों से डिविडेंड प्राप्त हुआ था और वे टैक्स रिफंड के हकदार थे। उन्हें मिले प्रमाण से संतुष्ट होकर डेन्स ने बताया कि उन्होंने कुल 2 बिलियन डालर सौंप दिए। लेकिन अधिकारियों का कहना है कि ज्यादातर पैसा सीधे शाह की जेब में गया।

दर्जनों एजेंट और सैकड़ों विदेशी संस्था तो केवल शाह के नेटवर्क का एक हिस्सा थी। यू के की कोर्ट में पेश दावे के अनुसार शाह ने अवैध रिफंड रिक्वेस्ट जनरेट करने के लिए दिखावे के लेनदेन की एक चेन बनाया था।

जनवरी 2014 से शुरू हुई शाह की 5,110 करोड़ रुपए की यात्रा

जनवरी 2014 से शुरू होकर 700 मिलियन डालर से अधिक की राशि शाह के खातों में आ गई। उन्होंने लंदन, हांगकांग, दुबई और टोक्यो में अपनी संपत्ति बनाई। उन्होंने 2014 में 5 लाख पौंड में 36-फुट की याट खरीदी और इसे सोलो नाम देकर 20 लाख डॉलर से अपग्रेड किया। शाह के वकीलों ने पिछले महीने लंदन मुकदमे में अपनी नई फाइलिंग में कहा कि सोलो 2016 में प्रशासन के हाथ में चला गया। उन्होंने कहा कि डिविडेंड आर्बिट्राज ट्रेडिंग पूरी तरह से वैध ट्रेडिंग है।

शाह के वकील की दलील है कि क्या डेनमार्क के पास ब्रिटिश अदालतों में चल रहे दावे को आगे बढ़ाने का अधिकार है या नहीं। शाह को आपराधिक जाँच का सामना करते हुए पांच साल हो चुके हैं।

शाह की कानूनी समस्याएं अभी तो शुरू हो रही हैं

शाह ने कहा कि 2015 में उनके वकील जेफ्री कॉक्स ने आश्वासन दिया था कि उन्हें डरने की कोई बात नहीं है और यह सब जल्द ही खत्म हो जाएगा। लेकिन शाह की कानूनी समस्याएं अभी तो शुरू हो रही हैं। शाह के खिलाफ स्काट के आरोपों को कवर करने वाला एक सिविल ट्रायल अगले साल लंदन में शुरू होगा।

जर्मनी, डेनमार्क में जांच जारी है

जर्मनी और डेनमार्क में आपराधिक जांच अभी भी जारी है। एक तरफ शाह ने कहा कि उन्हें यू. के. फाइनेंशियल कंडक्ट अथॉरिटी द्वारा संपर्क नहीं किया गया है, जबकि दूसरी तरफ अथॉरिटी ने फरवरी में कहा था कि वह लंदन के बाजारों में पर्याप्त और संदिग्ध अपमानजनक शेयर ट्रेडिंग की जांच कर रही है। यह कम-एक्स स्कीम से जुड़ी है। दुबई की एक कोर्ट ने अगस्त में शाह के खिलाफ डेनमार्क के मुकदमे को खारिज कर दिया। हालांकि इस निर्णय की अपील की जाने वाली है।

दुबई में शाह ने कहा कि बच्चों और परिवार के साथ समय बिताना काफी अच्छा रहा है, लेकिन अब मैं जहां हूं, मैं बस ऊब रहा हूं और तंग आ गया हूं। पाँच साल हो गए हैं मुझे पता नहीं है कि मामलों को समाप्त होने में कितना समय लगेगा।

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