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रिटायर्ड SC जज बने एक्सपर्ट विटनेस:माल्या से बकाया वसूली के लिए लंदन की अदालत में फिर पहुंचा SBI की अगुआई वाला कंसॉर्शियम

लंदन4 महीने पहले
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  • SC के रिटायर्ड जस्टिस दीपक वर्मा ने कहा कि बैंक एक जगह पहले ही इस्तेमाल किया अपना अधिकार छोड़कर दूसरी जगह दावा नहीं कर सकते
  • बैंक पहले ही भारत की अदालतों में अपने अधिकार का इस्तेमाल करके माल्या की संपत्ति बेच चुके हैं और कुछ हजार करोड़ रुपये वसूल कर चुके हैं

देश के सबसे बड़े बैंक SBI की अगुआई में भारतीय बैंकों का कंसॉर्शियम लिकर किंग विजय माल्या को दिवालिया घोषित करने की अपील के साथ एक बार फिर लंदन हाई कोर्ट पहुंचा है। ये बैंक माल्या की दिवालिया हो चुकी किंगफिशर एयरलाइंस पर अपने हजारों करोड़ रुपये का बकाया वसूल करने की पुरजोर कोशिश में लगे हुए हैं।

क्यों पेश हुए रिटायर्ड इंडियन जज?

गौरतलब है कि चीफ इनसॉल्वेंसीज एंड कंपनीज कोर्ट (ICC) के जज माइकल ब्रिग्स की अदालत में शुक्रवार को हुई वर्चुअल सुनवाई में माल्या के खिलाफ बैंकरप्सी ऑर्डर पर दोनों पक्षों ने अपनी दलील के सपोर्ट में सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया के रिटायर्ड जजों को इंडियन लॉ के एक्सपर्ट विटनेस के तौर पर पेश किया था।

दोनों के वकीलों ने क्या दलील दी?

बैंकों ने अपनी दलील में मामले से जुड़े भारत में दिए लोन के वास्ते ली गई सिक्योरिटी छोड़ने के अधिकार का इस्तेमाल किए जाने की मांग की ताकि वे अपने कर्ज की वसूली ब्रिटेन में कर सकें। इस पर माल्या के वकीलों ने अपनी दलील में कहा कि जिस फंड की बात हो रही है, वह पब्लिक का पैसा है जो बैंकों के पास जमा था, इसलिए उसके वास्ते बॉरोअर की तरफ से दी गई सिक्योरिटी को बैंक वापस नहीं कर सकते।

माल्या के पक्ष में क्या कहा गया?

मामले में SBI और अन्य का पक्ष रख रहीं जानी-मानी वकील मार्सिया शेकरडेमियन ने कहा कि कारोबारी संस्था होने के चलते बैंकों को कारोबारी विवेक से यह निर्णय लेने का अधिकार है कि वह लोन के वास्ते बॉरोअर की तरफ से दी गई सिक्योरिटी के साथ क्या करेगा। उन्होंने माल्या के पक्ष में भारत से वीडियो लिंक के जरिए अदालत में हाजिर हुए रिटायर्ड जज दीपक वर्मा से जिरह की जो कह रहे थे कि बैंक अपने इंडियन लोन के वास्ते ली गई सिक्योरिटी नहीं छोड़ सकते और न ही ब्रिटेन के कानून के हिसाब से बॉरोअर को दिवालिया घोषित कराने की कवायद कर सकते क्योंकि भारत में चल रहे इस मामले में जनता का पैसा फंसा है और बैंक जनहित की रक्षा कर रहे हैं।

दोनों हाथ में लड्डू नहीं हो सकता

वर्मा ने कहा कि ब्रिटेन के कानूनों का फायदा उठाने के लिए बैंक इंडिया में बॉरोअर की तरफ से दी गई सिक्योरिटी नहीं छोड़ सकते। अहम बात यह है कि मामले में पब्लिक का पैसा फंसा हुआ है और जनहित भी जुड़ा हुआ। बैंक एक जगह पहले ही इस्तेमाल किया अपना अधिकार छोड़कर दूसरी जगह दावा नहीं कर सकते। वे पहले ही भारत की अदालतों में अपने अधिकार का इस्तेमाल करके माल्या की संपत्ति बेच चुके हैं और कुछ हजार करोड़ रुपये वसूल कर चुके हैं।

बैंकों के पक्ष में कहा गया, अधिकार है

रिटायर्ड जज गोपाल गौड़ा ने माल्या के वकील फिलिप मार्शल की जिरह में वर्मा से उलट बैंकों के पक्ष में तथ्य रखे और कहा कि उनको अपनी बकाया रकम की वसूली के लिए बॉरोअर की तरफ से मुहैया कराई गई सिक्योरिटी वापस करने का अधिकार है। मामले की सुनवाई के बीच दोनों पक्षों के वकीलों में कई बार हुई गरमागरमी के बाद अंतिम दलील रखने का मौका नहीं बन सका इसलिए तारीख नए साल के लिए टल गई और वह बाद में तय होगी।

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