रिटेल निवेशकों के साथ धोखाधड़ी:अब सोशल मीडिया पर शेयर बाजार का टिप्स देनेवालों की खैर नहीं, सेबी ने बनाया टीम

मुंबईएक महीने पहले
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भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने एक टीम का गठन किया है। यह टीम वॉट्सऐप और टेलीग्राम जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फैलाए जा रहे गैर कानूनी टिप्स के खिलाफ कार्रवाई करना शुरू किया है। पिछले हफ्ते अहमदाबाद और मेहसाणा में सेबी की छापेमारी में इस नई टीम ने काफी मदद की थी।

सोशल मीडिया पर दिए जा रहे हैं टिप्स

दरअसल सोशल मीडिया के जरिए शेयर खरीदी और बिक्री के टिप्स इन दिनों जमकर दिए जा रहे हैं। ये लोग न तो सेबी के रजिस्टर्ड एनालिस्ट हैं और न ही इन्हें इस तरह का काम करने की मंजूरी है। ये लोग ऐसे टिप्स देकर निवेशकों को घाटा देते हैं। यह छापेमारी टेलीग्राम पर अवैध और फर्जी टिप्स के प्रसार के सिलसिले में की गई थी।

छोटे शहरों तक फैला है जाल

जानकारी के मुताबिक, सोशल मीडिया फैलाई जाने वाली गैर कानूनी टिप्स सिर्फ बड़े शहरों तक ही सीमित नहीं है। उनके इस काम का जाल छोटे शहरों तक भी आसानी से फैल जाता है, क्योंकि सोशल मीडिया से देश भर के लोग जुड़े होते हैं। देश भर में ऐसे तमाम सोशल मीडिया चलाए जा रहे हैं।

छापे और बड़े होने चाहिए

जानकारों का मानना है कि ये छापे और बड़े चाहिए जैसा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) या टैक्स एजेंसियों द्वारा छापे मारे जाते हैं। इन मामलों में डिजिटल सबूत महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए यह सुनिश्चित करना होगा कि छापे के दौरान लैपटॉप और मोबाइल फोन जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को उचित प्रक्रिया के माध्यम से जब्त कर लिया जाए।

अब नई योजना के तहत, सेबी के अधिकारियों को सुरक्षा मुहैया कराने के लिए स्थानीय पुलिस थानों को सूचित किया जाएगा। साथ ही, मोबाइल फोन जैसी निजी संपत्ति के मामले में किसी भी जब्ती के लिए अदालती वारंट की आवश्यकता होगी।

रेगुलेटर्स के साथ साझा नहीं होती है जानकारी

वॉट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म अपने यूजर्स की विशेष जानकारी रेगुलेटर्स के साथ साझा नहीं करते हैं। इसलिए सोशल मीडिया ग्रुप्स के बारे में सबूत इकट्ठा करने का एकमात्र तरीका आरोपी के फोन को जब्त करना और फिर हैंडसेट से डेटा प्राप्त करना है। सेबी को 2014 में सरकार द्वारा तलाशी और जब्ती का अधिकार दिया गया था पर उनका उपयोग बहुत ही कम किया जाता है।

2017 में भी की थी छापेमारी

पिछले हफ्ते ऑपरेशन से पहले, सेबी ने आखिरी बार 2017 में तथाकथित वॉट्सऐप लीक मामले में बड़े पैमाने पर छापेमारी की थी। सेबी को सूचना मिली थी कि कुछ वॉट्सऐप ग्रुप को टॉप लिस्टेड कंपनियों की कमाई की जानकारी सबसे पहले ही प्राप्त हो जा रही थी और बाद में लोगों को पता चलता था। रेगुलेटर ने ऐसे दो सोशल मीडिया ग्रुप्स पर नकेल कसी और प्रमुख ब्रोकरेज कर्मचारियों के परिसरों पर छापा मारा था।

रिटेल निवेशकों को आकर्षित किया है शेयर बाजार

हाल के दिनों में भारतीय शेयर बाजारों में तेजी ने रिटेल निवेशकों को आकर्षित किया है। इससे नए डीमैट खाते खोले जाने में लगातार वृद्धि हुई है। हालांकि, इन ग्रुप्स पर साझा की जा रही हर चीज सटीक नहीं होती है और कुछ कम जानकारी वाले निवेशक इसके शिकार भी हो रहे हैं। कुछ ग्रुप्स तो 10,000 रुपए से 1 लाख रुपए तक की एंट्री फीस भी लेते हैं। इससे मेम्बर्स को वादा किया जाता है कि उन्हें एक्सक्लूसिव टिप्स और ट्रेडिंग टिप्स दिए जाएंगे।