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सेबी का बड़ा आदेश:कैट टेक्नोलॉजी के GDR में गड़बड़ी, 13.55 करोड़ रुपए की फाइन, एप्टेक पर 1 करोड़ का जुर्माना

मुंबई7 महीने पहले
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एक दूसरे मामले में भी सेबी ने 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। सेबी ने एप्टेक के मामले में यह पेनाल्टी लगाई है। जांच में सेबी ने पाया कि एप्टेक ने सूचनाओं को देने में गलती की (फाइल फोटो) - Dainik Bhaskar
एक दूसरे मामले में भी सेबी ने 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। सेबी ने एप्टेक के मामले में यह पेनाल्टी लगाई है। जांच में सेबी ने पाया कि एप्टेक ने सूचनाओं को देने में गलती की (फाइल फोटो)
  • कैट के एमडी, डायरेक्टर पर भी सेबी ने फाइन लगाया
  • जुर्माने की रकम आदेश जारी होने के 45 दिनों के अंदर भरना होगा

रेगुलेटर सेबी ने कैट टेक्नोलॉजी के ग्लोबल डिपॉजिटरी रिसिप्ट (GDR) के मामले में बड़ी कार्रवाई की है। इसने कुल 13.55 करोड़ रुपए की फाइन लगाई है। बुधवार को 140 पेज के आदेश में सेबी ने यह जानकारी दी।

कैट पर 12.15 करोड़ का जुर्माना

सेबी ने इस आदेश में कहा कि कैट टेक्नोलॉजी पर 12.15 करोड़ रुपए, धीरज कुमार जायसवाल पर 1.10 करोड़ रुपए, दिनेश जायसवाल पर 10 लाख, डी. वेंकटराम पर 10 लाख, एम प्रसाद पर 10 लाख रुपए की पेनाल्टी लगाई गई है। यह सभी रकम 45 दिनों के अंदर भरनी होगी।

सिस्टम पर मिली थी जानकारी

सेबी ने कहा कि उसके अलर्ट सिस्टम पर जानकारी मिलने के बाद उसने ढेर सारे GDR की जांच की थी। इसमें पाया गया कि कैट टेक्नोलॉजी ने पहली बार 27 जुलाई 2007 को और दूसरी बार 14 नवंबर 2009 को GDR लाया था। इसका बुक रनिंग लीड मैनेजर्स पैन एशिया था। पैन एशिया के डायरेक्टर अरुण पंचारिया थे और साथ ही इसकी 100% हिस्सेदारी भी उन्हीं के पास थी।

अरुण पंचारिया ने किया काम

सेबी की जांच में पता चला कि GDR का पूरा काम अरुण पंचारिया ने किया और विंटेज ने इस GDR में शेयर खरीदे। बाद में पता चला कि अरुण पंचारिया ही विंटेज में भी डायरेक्टर और मालिक थे। वे ही विंटेज के साइनिंग अथॉरिटी भी थे। इसके बाद पंचारिया ने ढेर सारे विदेशी निवेशकों को मिलाकर GDR को शेयर में बदल लिया और इसे भारतीय बाजार में कुछ घरेलू संस्थानों की मदद से बेच दिया।

मालिक और डायरेक्टर भी शामिल

जांच के आधार पर सेबी ने पाया कि कैट के MD धीरज जायसवाल, डायरेक्टर दिनेश जायसवाल, डायरेक्टर D वेंकटरमन, के प्रसाद, डायरेक्टर नम्रता, प्रमोटर निशा जायसवाल, डायरेक्टर लक्ष्मी जायसवाल और अशोक कुलकर्णी ने इसमें फ्रॉड किया। इन लोगों ने सेबी के नियमों का भी उल्लंघन किया। हालांकि इसमें लक्ष्मी जायसवाल की 2018 में मौत हो गई थी जबकि अशोक कुलकर्णी का 2014 में निधन हो गया था।

जानकारी देने में फेल रहे

सेबी ने कहा कि इस मामले में धीरज और दिनेश जानकारी देने में भी फेल रहे। साथ ही इन्होंने काफी सारी गलत सूचनाएं दीं। सेबी ने कहा कि 28 मार्च 2019 को इस मामले में कारण बताओ नोटिस जारी की गई। सेबी ने पाया की दो GDR इश्यू में पहला इश्यू 60.46 लाख डॉलर का था जो 2007 जुलाई में आया था। दूसरा इश्यू 1 करोड़ डॉलर का था जो 2009 में आया था।

लोन एग्रीमेंट किया गया

जांच के अनुसार, औरम बैंक और विंटेज के साथ अरुण पंचारिया ने लोन एग्रीमेंट किया। इसके तहत औरम बैंक इस बात पर राजी हुआ कि वह 1 करोड़ डॉलर का लोन विंटेज को देगा। इसी तरह 27 अक्टूबर 2009 को कैट और औरम बैंक के बीच एक गिरवी एग्रीमेंट हुआ। इसमें कैट की ओर से अरुण पंचारिया ने साइन किया। सेबी ने पाया कि जो बैंक खाता इसमें दिया गया था, वह GDR इश्यू खरीदने और बेचने के लिए था।

सेबी ने जांच में पाया कि इसमें ढेर सारी गड़बड़ी की गई। साथ ही इन लोगों ने इसकी सूचना BSE को भी नहीं दी। इसके बाद इन लोगों ने GDR के कैंसल की प्रक्रिया शुरू कर दी और इसे 2007 से 2009 के बीच कैंसल कर दिया।

पहला इश्यू 43 लाख शेयरों का था

इसके मुताबिक, पहला GDR इश्यू जो 43 लाख शेयरों का था, उसमें से 25.80 लाख शेयर कैंसल कर दिए गए। यानी यह 59.99% था। दूसरे GDR में भी यही किया गया पर इसमें केवल 0.85% शेयर कैंसल हुए। सेबी ने पाया कि जिन लोगों को शेयर बेचे गए उन सभी से अरुण पंचारिया कनेक्शन में थे।

एप्टेक पर 1 करोड़ का जुर्माना

इसी तरह एक दूसरे मामले में भी सेबी ने 1 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है। सेबी ने एप्टेक के मामले में यह पेनाल्टी लगाई है। जांच में सेबी ने पाया कि एप्टेक ने सूचनाओं को देने में गलती की। इसलिए बुधवार को एक 14 पेज के आदेश में सेबी ने उस पर भी पेनाल्टी लगा दी।