बाजार / सेंसेक्स पहली बार 39 हजार पर: 4 साल में 9000 अंकों का उछाल, 1992 में ढाई महीने में दोगुना बढ़ा था



sensex crosses 39000 first time gain 9000 points in last 4 years
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sensex crosses 39000 first time gain 9000 points in last 4 years

  • लिस्टेड कंपनियों के मामले में बीएसई दुनिया का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज, इससे 5,417 कंपनियां जुड़ीं, न्यूयाॅर्क स्टॉक एक्सचेंज से 125% ज्यादा
  • सेंसेक्स में 4 साल में 9000 अंकों का उछाल; 30% रिटर्न दिया, मार्केट कैप 66% बढ़ा
  • एक रुपए की मेंबरशिप के साथ 114 साल पहले शुरू हुआ था बीएसई, 29 साल में 39000 तक पहुंचा
  • सेसेंक्स को 30 से 35 हजार तक पहुंचने में 34 महीने लगे, इसके बाद 14 महीने में 39 हजार तक पहुंचा

Dainik Bhaskar

Apr 01, 2019, 06:40 PM IST

मुंबई. नए वित्त वर्ष के पहले दिन बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 39,000 के पार पहुंचा। इससे पहले 29 अगस्त 2018 को सेंसेक्स इस आंकड़े को छूने से 11 अंक दूर रह गया था। एशिया के इस पहले स्टॉक एक्सचेंज ने अपने 144 साल के सफर में कई पड़ाव देखे। 1875 में इसमें 'द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन' के तहत ट्रेडिंग शुरू हुई थी। 1978-79 में 100 अंक को बेस वैल्यू मानते हुए शुरू हुए सेंसेक्स ने पहला बड़ा मुकाम 1990 में छुआ। तब यह पहली बार 1,000 अंकों के पार पहुंचा। इसके बाद 39,000 तक पहुंचने में इसे 29 साल लगे। सेंसेक्स में सबसे अच्छी तेजी 1992 में आई थी। तब यह ढाई महीने में ही दोगुना बढ़ गया था।


4 साल में सेंसेक्स ने 30% रिटर्न दिया, मार्केट कैप 66% बढ़ा
सेंसेक्स के लिए 2006 और 2007 सबसे तेजी वाले साल रहे। इस दौरान यह महज 19 महीने में 10,000 से 20,000 प्वॉइंट तक पहुंचा। वहीं, 30 हजार से 35 हजार तक पहुंचने में इसे 34 महीने लगे। इसके बाद सिर्फ 14 महीने में यह 39 हजार तक पहुंचा। सेंसेक्स मार्च 2015 में 30 हजार पर था। अब 39 हजार पर है। 4 साल में इसने 9 हजार अंकों का फासला तय किया है। इस दौरान इसके शेयरों ने 30% रिटर्न दिया है। मार्च 2015 में बीएसई का मार्केट कैप 101 लाख करोड़ रुपए था, जो अब करीब 153 लाख करोड़ रुपए पहुंच गया है। यानी 4 साल में इसमें 66% इजाफा हुआ है।


भारत में शेयरों की खरीद-बिक्री 1840 से शुरू हुई
भारत में 1840 के आसपास कुछ शेयर ब्रोकर बॉम्बे टाउन हॉल के सामने बने पेड़ों के नीचे बैठक किया करते थे और शेयरों की खरीद-बिक्री करते थे। ब्रोकरों की संख्या बढ़ने के बाद उन्होंने मिडॉज स्ट्रीट (अब महात्मा गांधी रोड) के पास अपना नया ठिकाना बनाया। 1874 में ब्रोकरों ने नई जगह ढूंढी, जिसे आज दलाल स्ट्रीट के नाम से जाना जाता है। यहीं पर बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज है। 1875 में ब्रोकरों ने मिलकर नया संगठन 'द नेटिव शेयर एंड स्टॉक ब्रोकर्स एसोसिएशन' बनाया। एसोसिएशन को बनाने में प्रेमचंद रायचंद की अहम भूमिका थी। उन्हें 'कॉटन किंग' कहा जाता था। आजादी के 10 साल बाद 31 अगस्त 1957 को भारत सरकार के सिक्योरिटी कॉन्ट्रैक्ट्स रेगुलेशन एक्ट के तहत बीएसई को आधिकारिक तौर पर पहले स्टॉक एक्सचेंज की मान्यता मिली। बीएसई देश का पहला इंटरनेशनल स्टॉक एक्सचेंज मार्केट है।

 

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पांच तेजी वाले दौर : 1992 में ढाई महीने में दोगुना हुआ था सेंसेक्स

  • ढाई महीने में दोगुना बढ़त : 15 जनवरी से 30 मार्च 1992 के बीच यह 2,000 से 4,000 अंकों पर आया।
  • 25 महीने में 4000 अंकों की बढ़त : 2 जनवरी 2004 से 6 फरवरी 2006 के बीच सेंसेक्स 6 हजार से बढ़कर 10 हजार के पार पहुंचा।
  • 19 महीने में दोगुनी बढ़त : 6 फरवरी 2006 से 29 अक्टूबर 2007 के बीच यह 10 हजार से 20 हजारी हुआ।
  • 11 महीने में 8 हजार अंकों का उछाल : 24 मार्च 2014 से 4 मार्च 2015 के बीच सेंसेक्स 22 से 30 हजार पहुंचा।
  • 15 महीने में 8 हजार अंकों का उछाल : 26 अप्रैल 2017 से 9 अगस्त 2018 के बीच यह 30 हजार से 38 हजार के पार हुआ।

एक्सपर्ट व्यू : चुनावों के चलते शेयर बाजार में तेजी बनी रहने की उम्मीद
शेयर बाजार के जानकार गौरांग शाह के मुताबिक विदेशी निवेशकों की खरीदारी की वजह से बाजार में तेजी बनी हुई है। आने वाले समय में राजनीतिक घटनाएं बाजार की चाल को प्रभावित करेंगी। चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ ही बाजार में उठापटक तेज हो सकती है। बाजार के विश्लेषक कुणाल सरावगी का कहना है कि स्पष्ट चुनावी नतीजे आने की उम्मीद के तचले विदेशी निवेशकों ने खरीदारी तेज की है। चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद निफ्टी भी 12,500 तक पहुंच सकता है।  


दुनिया के 10 बड़े स्टॉक एक्सचेंज
बीएसई दुनिया में सबसे ज्यादा लिस्टेड कंपनियों के मामले में पहले नंबर पर है। इसमें 5,417 कंपनियां लिस्टेड हैं। 153 लाख करोड़ रुपए मार्केट कैप के साथ यह 10वां सबसे बड़ा मार्केट कैप वाला स्टॉक एक्सचेंज भी है।

 

न्यूयाॅर्क स्टॉक एक्सचेंज से 125% ज्यादा कंपनियां बीएसई में लिस्टेड

एक्सचेंज मार्केट कैप लिस्टेड कंपनियां
न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज, अमेरिका 22.9 ट्रिलियन डॉलर 2,400
नैस्डेक स्टॉक एक्सचेंज, अमेरिका 10.8 ट्रिलियन डॉलर 3,300
टोक्यो स्टॉक एक्सजेंच, जापान 5.67 ट्रिलियन डॉलर 2,300
शंघाई स्टॉक एक्सचेंज, चीन 4.02 ट्रिलियन डॉलर 1,000
हॉन्गकॉन्ग एक्सचेंज 3.93 ट्रिलियन डॉलर 2,000
यूरोनेक्स्ट, यूरोप 3.92 ट्रिलियन डॉलर 1,300
लंदन स्टॉक एक्सचेंज, यूके 3.76 ट्रिलियन डॉलर 3,000
शेनझेन स्टॉक एक्सचेंज, चीन 2.5 ट्रिलियन डॉलर 2,151
टोरंटो स्टॉक एक्सचेंज, कनाडा 2.1 ट्रिलियन डॉलर 2,207
बीएसई, भारत 2.05 ट्रिलियन डॉलर (153 लाख करोड़ रु) 5,417


चुनावी नतीजे सेंसेक्स पर असर डालते रहे हैं

  • 25 जुलाई 1990 : अच्छे मानसून ने पहली बार सेंसेक्स को 1000 के पार पहुंचाया।
  • 11 अक्टूबर 1999 : आम चुनाव में एनडीए की जीत और आईटी सेक्टर में बूम से सेंसेक्स 5000 पार पहुंचा।
  • 6 फरवरी 2006 : कमोडिटी प्राइस में उछाल से सेंसेक्स पहली बार 5 अंकों पर आया। इसके एक दिन बाद ही यानी 7 फरवरी 2006 को सेंसेक्स 10,000 के ऊपर बंद हुआ।
  • 6 जुलाई 2007 : सेंसेक्स 15,000 पर बंद हुआ।
  • 29 अक्टूबर 2007 : रिटेल में जोरदार खरीदी के चलते यह 20,000 के पार पहुंचा।
  • 16 मई 2014 : आम चुनाव में एनडीए की जीत से बाजार 25,000 के पार पहुंचा। 5 जून 2014 को यह पहली बार 25,000 से ऊपर बंद हुआ।
  • 4 मार्च 2015 : रिजर्व बैंक के रेपो रेट कट करने के ऐलान के बाद यह 30,000 के पार पहुंचा। 26 अप्रैल 2017 को यह इस आंकड़े के पार बंद हुआ।
  • 17 जनवरी 2018 : बजट 2018 रैली के चलते यह 35,000 के पार बंद हुआ।
  • 1 अप्रैल 2019 : एशियाई बाजारों में तेजी और बाहरी निवेश ने सेंसेक्स को 39,000 पार पहुंचाया।
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