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बिजनेस डेस्क. भारत और दुनिया के बाजार कोरोना महामारी की चपेट में हैं। बाजार में रिकॉर्ड गिरावट हो रही है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि दुनिया के बाजारों के रुख से मंदी की आहट आ गई है। 2020 के हालात 2008 की वैश्विक मंदी से खराब होते जा रहे हैं। एक जनवरी 2020 से अब तक 71 दिन में सेंसेक्स 7 बार 700 से ज्यादा अंक गिर चुका है। 3 बार एक हजार से ज्यादा अंक की गिरावट हुई। अधिकतम 2919 अंकों की गिरावट गुरुवार को रही। 2008 में 6 बड़ी गिरावटें सालभर में हुई थीं। तब सालभर में एक हजार से ज्यादा अंकों की दो ही गिरावट हुई थी। एक दिन में अधिकतम 1408 प्वाइंट्स सेंसेक्स गिरा था।
2020 में अब तक सेंसेक्स 19.60% गिर चुका है, वजह- कोरोना, क्रूड ऑयल, बैंकिंग सिस्टम, अमेरिकी बाजार हैं। गौर करने वाली बात यह है कि 2008 की 6 में से 5 बड़ी गिरावटें जनवरी से मार्च महीने (54 दिन में) के बीच हुई थीं। 2020 में अब तक की सभी बड़ी गिरावटें इन्हीं तीन महीनों (64 दिन) में हुई हैं।
क्या हुआ: इस साल 8571 प्वाइंट्स तक गिर चुका है सेंसेक्स, 2008 में 10678 अंक गिरा था
इस साल एक जनवरी को सेंसेक्स 41,349 प्वाइंट्स पर खुला था। इस दिन 43 प्वाइंट गिरकर 41,306 प्वाइंट्स पर बंद हुआ था। 9 मार्च को यह 35,300 तक पहुंच गया। 12 मार्च को यह 32,778 पर पहुंच गया, यानी इस साल 8571 प्वाइंट्स तक सेंसेक्स गिर चुका है। जबकि 2008 में 1 जनवरी को सेंसेक्स 20,325 प्वाइंट्स पर खुला था। साल के अंत 31 दिसंबर को 9,647 प्वाइंट्स पर बंद हुआ था। इस साल बाजार 10678 प्वाइंट्स गिरा था। यानी औसतन हर महीने 889 अंक बाजार गिरा था। इस साल बाजार हर महीने औसतन 3428 प्वाइंट्स गिर रहा है।
वजह: 2008 की मंदी का कारण अमेरिकी रियल स्टेट कंपनियों का दिवालिया होना था, इस बार कोरोना, अमेरिकी बाजार, क्रूड ऑयल और भारतीय बैंकिंग सिस्टम है
2008 की वैश्विक मंदी के पीछे की वजह रियल स्टेट और फाइनेंशियल सेक्टर थे। अमेरिका के सबसे बड़ी रियल स्टेट कंपनियां लीमेन ब्रदर्स, फ्रेडी मैक, फेनी-मे दिवालिया हो गई थीं। इस साल सेंसेक्स की गिरावट के पीछे चार बड़ी वजह अमेरिकी बाजार, कोरोनावायरस, क्रूड ऑयल और भारतीय बैंकिंग सिस्टम हैं।

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