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  • Sensex Market Crash Today | BSE Sensex Market Capitalisation Latest Updates; Sensex Down By 5,089; Rs 16 Lakh Crore Loss Since Union Budget 2020

बजट के बाद से अब तक सेंसेक्स 5,089 अंक नीचे आया, सेंसेक्स का मार्केट कैप 16 लाख करोड़ रुपए घटा

एक वर्ष पहले
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15 दिनों में जिन कम्पनियों के शेयरों में भारी गिरावट दिखी है वही कुछ समय पहले काफी तेजी में थीं - Dainik Bhaskar
15 दिनों में जिन कम्पनियों के शेयरों में भारी गिरावट दिखी है वही कुछ समय पहले काफी तेजी में थीं
  • 1 फरवरी को सेंसेक्स का मार्केट कैप 153 लाख करोड़ रुपए था जो 9 मार्च को घटकर 137 लाख करोड़ हुआ
  • रिकॉर्ड गिरावट से बाजार में लिस्टेड कम्पनियों का बाजार पूंजीकरण एक ही दिन में 6.5 लाख करोड़ रुपए घटा

मुम्बई. बाजार के निवेशकों के लिए यह शायद साल 2008 से भी बुरा समय साबित हो रहा है, जब महज एक बीमारी के नाम पर भारतीय इक्विटी बाजार एकदम बेबस हो गया है और लगातार टूटने का नया रिकॉर्ड हासिल करता जा रहा है। कुछ समय पहले तक जब वैश्विक स्तर पर बाजार गिर रहे थे, उस समय भारतीय बाजार में तेजी को लेकर बाजार का एक वर्ग बहुत ही ज्यादा वकालत कर रहा था, लेकिन किसे पता था कि बाजार में ऐसी गिरावट आएगी। 17 जनवरी 2020 को भारतीय बाजार का पूंजीकरण 160 लाख करोड़ रुपए था जो अब 137 लाख करोड़ रुपए पर है।
बजट के बाद से सेंसेक्स 5,089 अंक नीचे आया। मार्केट कैप की बात करें तो 1 फरवरी को सेंसेक्स का मार्केट कैप 153 लाख करोड़ रुपए था जो 9 मार्च को घटकर 137 लाख करोड़ रुपए हो गया। इस तरह इसमें 16 लाख करोड़ रुपए की कमी आई है। 9 मार्च को एक काले सोमवार ने होली के रंग को बेरंग करने में कोई कसर नहीं छोड़ी, जब एसएंडपी बीएसई 500 का सेंसेक्स 1,941 अंक टूटकर 35,634.95 अंक पर आ गया। यही नहीं, एक ही दिन में इस सेंसेक्स ने निवेशकों के 6.5 लाख करोड़ रुपए भी कम कर दिए। यानी बाजार में लिस्टेड कम्पनियों का बाजार पूंजीकरण एक ही दिन में 6.5 लाख करोड़ रुपए घटकर 137 लाख करोड़ रुपए पर आ गया। वैसे तो महज पिछले 15 दिनों में ही निवेशकों के 23 लाख करोड़ रुपए डूब चुके हैं। 

6 दिन में मार्केट कैप 11 लाख करोड़ रुपए घटा  
पिछले हफ्ते में 3 मार्च को बाजार पूंजीकरण 148 लाख करोड़ रुपए था जो महज 6 दिन में 11 लाख करोड़ रुपए घट गया है और यह अब सितम्बर 2017 के स्तर पर आ गया है और उस महीने में बाजार पूंजीकरण 132 लाख करोड़ रुपए से लेकर 153 लाख करोड़ रुपए था। यानी निवेशकों को लगातार बाजार से निराशा ही हाथ लगी है। जिस 25-25 स्टॉक के दम पर सेंसेक्स ने 42,000 का आंकड़ा पार किया था, वही स्टॉक ने इस सेंसेक्स को जमीन दिखाने में थोड़ी भी रहम नहीं दिखाई। 9 मार्च को जिन कम्पनियों के शेयरों में भारी गिरावट दिखी या पिछले 15 दिनों में जिन कम्पनियों के शेयरों में भारी गिरावट दिखी है वही कम्पनियां इससे पहले सेंसेक्स को तेजी का झूला झुला रही थीं। 

रिलायंस के शेयरों का 2,000 पहुंचने का टार्गेट था, गिरकर 1,113 पर आए
उन कम्पनियों को अगर देखें तो वह सभी ब्लूचिप ही थीं। रिलायंस इंडस्ट्रीज का शेयर जहां 1,617 रुपए से टूटकर तीन महीने में 1,113 रुपए पर आ गया है, वहीं ओएनजीसी तो सोमवार को ही अकेले 16 फीसदी से ज्यादा टूटकर 74 रुपए पर आ गया। यह वही रिलायंस इंडस्ट्रीज है, जिसे लेकर दिसम्बर में विश्लेषकों ने 2,000 रुपए का लक्ष्य रखा था। लेकिन अब यह फिसलकर जमीन की ओर जा रहा है। एसीसी के शेयर को देखें तो यह 1,700 से टूटकर 1,245 रुपए पर आ गया तो निवेशकों का डार्लिंग बन चुके और महज 4 महीने में 5 गुना का रिटर्न देने वाला आईआरसीटीसी भी अब इस गिरावट के भार को थाम नहीं पा रहा है। इसका शेयर 1,995 से टूटकर महज 15 दिन में 1,290 रुपए पर आ गया है। निप्पोन इंडिया असेट मैनेजमेंट का शेयर भी कुछ ऐसा रहा है। यह शेयर 20 फरवरी को 452 रुपए पर था, लेकिन अब यह 297 के स्तर पर अपनी औकात दिखा रहा है। एक्सिस बैंक भी कम नहीं है। इस गिरावट में वह शेयर 826 से टूटकर 623 रुपए पर आ गया तो एचडीएफसी म्यूचु्अल फंड का शेयर भी 3,844 से टूटकर 2,849 रुपए पर अब अपनी राह देख रहा है। 

15 दिनों 3 बार सेंसेक्स में आई बड़ी गिरावट
कहने का मतलब तो यही है कि लंबी अवधि का नजरिया रखनेवालों को भी यह नहीं समझ आ रहा है कि अब क्या होगा? बाजार की दशा और दिशा तो इतनी बेकार हो चुकी है कि यहां से नजर फेर लेना ही मुनासिब होगा। 2 मार्च को 1,297 अंक टूटने वाला सेंसेक्स पिछले 15 दिनों में तीन बार ऐसा ही मुंह दिखा चुका है। 28 फरवरी को यह 1,448 अंक टूट कर इसकी शुरुआत कर चुका था। यानी तीन दिनों में ही यह करीबन 4,900 अंक टूटकर यह साबित कर दिया है कि मैं ही बादशाह हूं, जो निवेशकों को कहीं भी पटक सकता हूं। बात विदेशी संस्थागत निवेशकों यानी एफआईआई की करें तो इन्होंने इस महीने में अब तक 11,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी की है। यानी इस महीने में ऐसा लगता है कि जुलाई 2019 में 16,870 करोड़ की निकासी करनेवाले ये निवेशक उस रिकॉर्ड को तोड़ कर ही वापसी करेंगे। वैसे जनवरी, फरवरी में भी इन निवेशकों ने अच्छी निकासी की थी।  

गिरते माहौल में कम जोखिम वाले क्षेत्रों में निवेश बेहतर
महिन्द्रा म्यूचुअल फंड के एमडी एवं सीईओ आशुतोष बिश्नोई कहते हैं कि बाजार के अनिश्चितता के माहौल में निवशकों को म्यूचुअल फंड की ओर रूख करना चाहिए, जहां जोखिम कम है और फंड मैनेजर अनुशासित तरीके से निवेशकों की राशि का निवेश करते हैं। म्यूचुअल फँड रिटेल निवेशकों के लिए बहुत ही उत्तम साधन है। आप एक नियमित एसआईपी शुरू करें और इसे लम्बी अवधि तक रखें ताकि आपका एक छोटा सा निवेश लम्बी अवधि में जाकर एक बड़ी राशि के रूप में तब्दील हो सके। 

1991 के बाद से अब तक कैसा रहा है सेंसेक्स का हाल
आंकड़े को अगर एक बार खंगाल कर देखें तो पता चलता है कि बाजार समय समय पर अपना रंग दिखाता रहा है। इस रंग में पंटरों ने हमेशा अपना खेल खेला है। आंकड़े बताते हैं कि जनवरी 1991 में सेंसेक्स 2,329 अंक पर खुला, जबकि यह 2,302 पर बन्द हुआ। हालांकि दिसम्बर 1992 में यह 2,615 अंक पर बन्द हुआ। 1993 में यह जनवरी में 2,617 अंक पर खुला और 2,954 तक का उच्च स्तर बनाया लेकिन बन्द 2,680 पर हुआ। जबकि इसी साल दिसम्बर में यह 3,270 पर खुला और 3,346 पर बन्द हुआ। यह वह साल था, जब भारत में पहली बार सीरियल बम धमाके किए गए। यह बम धमाके 1992 के दिसम्बर में बाबरी मसजिद के विध्वंस के बाद मुम्बई में शेयर बाजार से लेकर कई मुख्य जगहों पर किए गए जिसमें 256 लोग मारे गए थे।


इसी तरह 1994 में जनवरी में सेंसेक्स की शुरुआत 3,436 अंकों के साथ हुई और यह 4,152 तक का स्तर बनाया लेकिन बन्द 3,994 पर हुआ। जबकि दिसम्बर 1994 में सेंसेक्स करीबन इसी स्तर पर बन्द हुआ जो 3,926 का था। इस पूरे साल में सेंसेक्स 4,106 से से नीचे ही रहा। जनवरी 1995 में सेंसेक्स की शुरुआत 3,910 से हुई और उच्च स्तर 3,943 का था, तथा दिसम्बर में यह करीबन 800 अंकों की साल भर की गिरावट के बाद 3,110 पर बन्द हुआ। 1996 में जनवरी में 3,114 अंकों के साथ शुरुआत करनेवाले सेंसेक्स ने दिसम्बर 1996 में भी गिरावट के साथ 3,085 अंक पर बन्द हुआ।


1997 जनवरी में बढ़त के साथ सेंसेक्स 3,713 अंक पर खुला और 3,360 के स्तर पर बन्द हुआ, जबकि दिसम्बर में यह 3,658 पर बन्द हुआ। 1,998 जनवरी में सेंसेक्स 3,658 पर खुला तथा 3,224 अंक पर बन्द हुआ, लेकिन दिसम्बर तक इसमें गिरावट दिखी और 3,055 पर बन्द हुआ। साल 1999 में भी यह इसी स्तर के करीब तो रहा पर दिसम्बर 1999 में यह बढ़त के साथ 5,005 अंक पर बन्द हुआ। इस तरह से 1991 से 1999 के दशक को देखें तो सेंसेक्स ने करीबन 50 फीसदी की वृद्धि हासिल की, लेकिन उसके बाद इसने रफ्तार पकड़ी और पूरा परिदृश्य ही बदल दिया। 


साल 2000 जनवरी में 5,209 के साथ शुरुआत करनेवाला सेंसेक्स दिसम्बर में हालांकि फिर भारी गिरावट के साथ 3,972 अंक पर बन्द हुआ, और यह सिलसिला दिसम्बर 2003 तक चला जब सेंसेक्स 5,838 अंक पर बन्द हुआ। दरअसल इसी दौरान केतन पारेख का घोटाला उजागर हुआ था। 1996 से लेकर 2003 तक भाजपा के गठबन्धन वाली राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार थी जिसमें आज की ही तरह विनिवेश को लेकर वाजपेयी सरकार ने बहुत सक्रियता दिखाई थी। आज भी राजग सरकार विनिवेश को लेकर काफी आक्रामक है। 


2004 में कांग्रेस गठबन्धन वाली संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के आने के बाद बाजार ने फिर तेजी पकड़ी। जनवरी 2004 में सेंसेक्स 5,872 के साथ खुला और दिसम्बर 2004 में यह 6,602 के साथ बन्द हुआ तो दिसम्बर 2005 में यह 9,397 के आंकड़े को पार कर गया। 2006 जनवरी में यह 9,954 के साथ खुला और फरवरी महीने में 10,000 के आंकड़े को पार कर गया। जबकि दिसम्बर 2006 में यह 14,035 का आंकड़ा तो छुआ लेकिन बन्द 13,786 पर हुआ। 2007 में भयानक तेजी बाजार में रही और दिसम्बर में यह 20,286 के आंकड़े को पार कर गया, लेकिन 2008 में एक बार फिर से लेहमन ब्रदर्स के डूबने के बाद सेंसेक्स धराशाई हो गया। जनवरी 2008 में 21,206 का स्तर छूने के बाद यह इसी महीने में 17,648 पर आ गया जबकि उसके बाद इसमें भारी गिरावट दिखी और साल 2008 के पूरे साल में यह गिरावट के दौर में रहा। नतीजा यह हुआ कि दिसम्बर 2008 में सेंसेक्स का स्तर 9,647 पर आ गया जो 2006 का स्तर था। 


2009 से सेंसेक्स फिर तेजी की रफ्तार भरा और यह जनवरी में 9,424 तक पहुंचने के बाद दिसम्बर 2009 में 17,464 पर पहुंच गया। 2010 में इसने दिसम्बर में 19,20,509 के आंकडे को फिर पार किया, तथा 20111 जनवरी में यह गिरकर 17,193 अंक पर आ गया। अक्टूबर 2013 तक सेंसेक्स 21,164 के आंकड़ो को छुआ और मई 2014 में आम लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंन्द्र मोदी के नेतृत्व में राजग की सरकार आने पर सेंसेक्स ने फिर छलांग लगाई और यह 2014दिसम्बर में 27,499 के आंकड़े पर बन्द हुआ। 2015 में इसने 29,143 से शुरुआत की तथा दिसम्बर में यह गिरावट के साथ 26,117 पर पहुंच गया, पर 2016 में इसने एक बार फिर वापसी तो की, पर दिसम्बर में 26,662 अंक पर गिरावट के साथ बन्द हुआ। 


साल 2017 में जनवरी में सेंसेक्स ने 26,711 से शुरुआत की और मई तक इसने 31,145 के आंकड़े को पार कर लिया। जबकि दिसम्बर 2017 में यह 34,056 के स्तर पर बन्द हुआ। 2018 जनवरी में 35,000 के आंकड़े को पार करने के बाद इसने इसी साल दिसम्बर में 36,037 के आंकड़े को पार किया और 2019 में इसने रिकॉर्ड बनाकर 41,253 के आंकड़े को पार कर लिया। हालांकि साल 2020 में जनवरी में इसने अब तक का सर्वोच्च स्तर 42,273 अंक का स्तर छुआ, लेकिन 9 मार्च 2020 को यह गिरावट के साथ 35,634 अंक पर बन्द हुआ है।

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