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इवेंट / आईसीआईसीआई बैंक और दैनिक भास्कर के आपसी सहयोग से एसएमई ग्रोथ कार्यक्रम का सफलतापूर्वक हुआ समापन

उपकार सिंह आहूजा ने एमएसएमई की परिभाषा बदलने का किया आह्वान

SME growth program successfully concluded with mutual support of Dainik Bhaskar and ICICI Bank
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SME growth program successfully concluded with mutual support of Dainik Bhaskar and ICICI Bank
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Dainik Bhaskar

Dec 03, 2019, 04:04 PM IST

एसएमई सेक्टर यानी लघु और मध्यम उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था में रीढ़ की हड्डी की तरह अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। इन उद्योगों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि ये लागत और आकर में छोटे तो होते हैं लेकिन इसके बावजूद भी बहुत प्रभावशाली होते है। कई लोगों को रोजगार के नए अवसर भी देते हैं। इन सबके बावजूद भी इस उद्योग क्षेत्र में कई प्रकार की चुनौतियां हैं, जिसका कई उद्योगपति सामना कर रहे हैं। SME के महत्व और चुनौतियों को समझते हुए 27 नवंबर को दैनिक भास्कर और आईसीआईसीआई बैंक की तरफ से पंजाब के लुधियाना में एसएमई समिट का आयोजित किया गया। 

इस आयोजन को करने के पीछे मुख्य उदेश्य एमएसएमई के लिए घरेलू व वैश्विक बाजारों में व्यापार के अवसरों पर चर्चा करना था। इस मौके पर लुधियाना के कई दिग्गज उद्योगपति कार्यक्रम में शामिल हुए जिन्होंने अपने-अपने विचार साझा किए। दैनिक भास्कर ग्रुप से मनी भास्कर के एडिटर, राजीव कुमार ने इस आयोजन में मॉडरेटर की भूमिका निभाई।

मुख्य वक्ता ने एमएसएमई की परिभाषा बदलने का किया आह्वान

इस आयोजन के मुख्य वक्ता (कीनोट स्पीकर) के तौर पर लुधियाना सीआईसीयू (चैंबर ऑफ इंडस्ट्रियल एंड कमर्शियल अंडरटेकिंग) के प्रसिडेंट उपकार सिंह आहूजा ने उद्यमियों के सामने अपने विचार व्यक्त करते हुए उद्योग के दौरान आने वाली विभिन्न समस्याओं और चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की और साथ ही वहां मौजूद उद्योगपतियों को कई महत्वपूर्ण टिप्स भी दीं।

उपकार सिंह ने अपने विचारों को साझा करते हुए कहा कि उद्यमियों को सबसे पहले कॉस्ट ऑटोमेशन के लिए अपने बिजनेस के साथ ही ऑटोमेशन यूनिट भी लगानी चाहिए। उन्होंने कहा कि दुनिया समय के साथ टेक्नोलॉजी में भी निरंतर परिवर्तन लाती जा रही है। इसलिए सभी SMEs को टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। 10-15 साल पहले बड़े-बड़े टेक्नोलॉजी एक्जीबिशन में केवल एक-दो चीनी कंपनियां आती थीं। अब अधिकतर स्टॉल चीनी कंपनियों के होते हैं। ऐसे में एमएसएमई को सबसे ज्यादा नुकसान चीनी कंपनियों से पहुंच रहा है, लिहाजा टेक्नोलॉजी को अपग्रेड करने के लिए सरकार द्वारा अच्छा बजट मिलना चाहिए। अभी बजट में एक एमएसएमई को 8 रुपए ही मिलते हैं। 

इसके बाद विशाल बत्रा, रिटेल बिजनेस हेड, नॉर्थ, आईसीआईसीआई ने वहां मौजूद सभी SMEs को बैंक से मिलने वाले लाभ और समाधान बताए ताकि MSME सेक्टर से जुड़े लोगों की जिंदगी आसान हो पाए। विशाल ने बताया कि ICICI बैंक का फोकस कस्टमर, रेगुलेटर और शेयर होल्डर को साथ लेकर बेस्ट रिटेल ब्रांड ऑफ द वर्ल्ड के मुकाम तक पहुंचना है। 

पैनल चर्चा में उद्यमियों ने रखे अपने विचार

इस आयोजन में पैनल चर्चा मुख्य आकर्षण रही, जिसमें सभी पैनलिस्ट्स ने अपने विचारों को उद्यमियों के सामने रखते हुए एसएमई के विभिन्न मुद्दों पर बात की। इस चर्चा में उद्योग जगत के दिग्गजों ने SME क्षेत्र में होने वाले बदलावों के बारे में अपनी राय रखी और कुछ सुझाव भी दिए।

फियो (फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गनाइजेशन) के रीजनल चेयरमैन अश्विनी कुमार ने कहा कि इस समय भारतीय SME के लिए अमेरिका में व्यापार करने का अच्छा अवसर है। स्पोर्ट्स गुड्स और गारमेंट्स, खिलौनों, स्टेशनरी, केबल, इलेक्ट्रोनिक गुड्स, केमिकल, फार्मा, आर्टिफिशियल ज्वेलरी समेत कई ट्रेड फायदे में रहेंगे। इसका कारण है अमेरिका की तरफ से चीन पर लगाई गई 25% इम्पोर्ट ड्यूटी, जिसकी वजह से दोनों के बीच ट्रेड डेफिसिट बढ़ रहा है। लिहाजा यह भारतीय इंडस्ट्री के लिए ग्रोथ करने का सही समय है। अमेरिका में व्यापार करने के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि व्यापारियों के पास पूरा डॉक्यूमेंटेशन नहीं होता है। मौजूदा समय में व्यापारियों को प्रॉडक्ट के अप्रूवल से पहले फैक्ट्री का अप्रूवल लेना पड़ता है। फियो की तरफ से हम व्यापारियों को जागरूक करने के कई कार्यक्रम चला रहे हैं। अपनी बात को साझा करते हुए उन्होंने आगे कहा कि चीन इतनी आसानी से अपने व्यापार को हाथ से नहीं जाने देगा इसलिए भारतीय SME को अपनी तैयारी पूरी रखनी होगी। लेकिन समस्या यह है कि MSME के पास पैसा नहीं है।

अश्विनी कुमार की बात पर अपनी राय रखते हुए विशाल बत्रा ने कहा कि SME की इसी समस्या को दूर करने के लिए ICICI समाधान पेश कर रहा है। सामान्य तौर पर बिना कोलैटरल के लोन नहीं मिलता है। अगर मौजूदा बैंकिंग सेक्टर को देखा जाए तो NPA इतना बढ़ गया है कि बैंक लोन देते समय किसी चीज का रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। लोन देने के लिए हर बैंक की अपनी अलग पॉलिसी होती है। इसके बावजूद ICICI बैंक यह रिस्क लेने को तैयार है। अगर कोई एसएमई ICICI बैंक से इंस्टा ओवर ड्राफ्ट की डिमांड करता है, तो बैंक लोन देने को तैयार है। भले ही यह लोन 15 लाख रुपए तक का ही हो लेकिन उससे SME को मदद मिलेगी और यह लोन कोलैटरल फ्री होगा।

अमित थापर, प्रेसिडेंट, गंगा एक्रोवूल्स लिमिटेड ने कहा कि सिर्फ अमेरिका में व्यापार के अवसरों को लेकर व्यापारियों को संतुष्ट नहीं होना चाहिए। व्यापारियों को दूसरे बाजारों को भी तलाशना होगा। कल को अगर चीन और अमेरिका के बीच व्यापार युद्ध रुक गया तो भारतीय व्यापारियों के सामने फिर संकट खड़ा हो जाएगा। ऐसे में फिर हम क्या करेंगे। इसलिए हमें खुद को नए बाजारों के लिए तैयार करना होगा। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि व्यापारियों को अपनी हर समस्या के लिए सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहराना चाहिए। हमें खुद अपनी समस्याएं सुलझाने के लिए सक्षम बनना पड़ेगा। सरकार कि नीतियों की सही ठहराते हुए उन्होंने कहा कि GST से संबंधित उन्हें कोई दिक्कत नहीं आ रही है। 

पंकज शर्मा, एमडी, ओशा टूल्स प्राइवेट लिमिटेड व जनरल सेक्रेटरी, सीआईसीयू ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सरकार की नीतियों के कारण ऑटो सेक्टर में सुस्ती छाई हुई है। सरकार इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने पर जोर दे रही है और बीएस6 श्रेणी के वाहनों को बाजार में उतारा जा रहा है, जिससे पुराने वाहन और इन्वेंट्री बिक नहीं पा रही है। इससे सेक्टर मंदी से गुजर रहा है। 

मुखिन्दर सिंह, सीईओ, स्टेट इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन ने कहा कि MSME की परिभाषा बदलनी जरूरी है। हालांकि माइक्रो इंडस्ट्री स्मॉल में नहीं बदलना चाहती और स्मॉल इंडस्ट्री मीडियम में नहीं बदलना चाहती क्योंकि वे जिस ब्रैकेट में हैं उसका उन्हें फायदा मिलता है, लेकिन ये सेक्टर के लिए अच्छा नहीं है।

जे एस भोगाल, वीपी, फार्मपार्ट्स कंपनी (यूनिपार्ट्स ग्रुप की यूनिट)  ने कहा कि इंडस्ट्री में स्किल्ड लोगों की कमी है। हमें स्टूडेंट्स को स्किल्ड बनाने पर ध्यान देना चाहिए। भोगाल ने यह भी कहा कि जीएसटी और नोटबंदी से कुछ उद्यमियों को नुकसान हुआ है तो कुछ को फायदा भी पहुंचा है। इससे उद्यमियों की बैलेंस शीट सुधर गई है और व्यापार करने में आसानी हुई है। भाेगााल की बात का समर्थन करते हुए पंकज वर्मा ने कहा कि कॉलेज और इंस्टीट्यूट के स्टूडेंट्स को हर साल दो महीने के लिए अनिवार्य रूप से किसी इंडस्ट्री मे ट्रेनिंग लेने भेजा जाना चाहिए। और यह सिर्फ डिग्री के लिए बल्कि काम सीखने के लिए किया जाना चाहिए।

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