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ई-कॉमर्स से जुड़े नए नियम:गैर-भाजपा सरकारों समेत कई राज्यों ने जताई चिंता, कहा- नौकरियों और एमएसएमई पर नेगेटिव असर पड़ेगा

नई दिल्ली3 महीने पहले
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केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तावित ई-कॉमर्स से जुड़े नए नियमों पर कई राज्यों ने चिंता जताई है। इसमें गैर-भाजपा सरकारों समेत कई अन्य राज्य शामिल हैं। इन राज्यों का कहना है कि नए कानूनों से नौकरियों और एमएसएमई के लिए मार्केट में पहुंच पर नेगेटिव असर पड़ेगा। एमएसएमई ने हाल के वर्षों में विभिन्न प्लेटफॉर्म्स के जरिए मार्केट में पहुंच बनाई है। हाल ही में उपभोक्ता मामलों के केंद्रीय मंत्रालय ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के बोगस ऑफर और गलत बिक्री पर रोक लगाने के लिए नए नियमों का मसौदा पेश किया है।

केंद्र सरकार को सुझाव देंगे राज्य

नए नियमों पर चिंता जताने वाले राज्यों का कहना है कि वे कंज्यूमर प्रोटेक्शन (ई-कॉमर्स) रूल्स-2020 में सुरक्षा के मजबूत उपायों को शामिल करने को लेकर केंद्र सरकार को सुझाव देंगे। इन राज्यों के अधिकारियों का कहना है,''हम केंद्र को सुझाव देंगे कि नए नियमों में बदलाव से उनका इकोनॉमिक ग्रोथ इंजन और रेवेन्यू कलेक्शन प्रभावित नहीं होना चाहिए''। हालांकि, इस बात का ख्याल रखा जाएगा कि उनके सुझाव उपभोक्ताओं के सुरक्षा फ्रेमवर्क के लिए प्रस्तावित रूल्स में अड़चन पैदा ना करें।

यह बेहद संवेदनशील मामला

नाम ना प्रकाशित करने की शर्त पर राज्यों के अधिकारियों ने कहा कि यह एक बेहद संवेदनशील मामला है। उपभोक्ताओं के हितों के साथ नौकरियों, एमएसएमई और लाखों सेल्फ एंप्लॉयड कारीगरों, बुनकरों, कृषि और इससे जुड़े कामगारों की सुरक्षा के लिए इस मामले को सावधानी से निपटाने की आवश्यकता है। अधिकारियों ने कहा कि सभी हितधारकों से सलाह के बाद राज्य केंद्र के पास औपचारिक सुझाव भेजेंगे। मंत्रालय ने प्रस्तावित नियमों पर सभी हितधारकों से 6 जुलाई तक सुझाव मांगे हैं।

घरेलू और विदेशी निवेशकों ने भी जताई चिंता

कुछ प्रस्तावित नियमों पर ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स में निवेश करने वाले विदेशी और घरेलू निवेशकों ने भी चिंता जताई है। इन निवेशकों ने फ्लैश सेल, बड़े डिस्काउंट और डाटा शेयरिंग से जुड़े प्रस्तावित नियमों पर चिंता जताई है। निवेशक वस्तुओं और सेवाओं की बिक्री पर ऑनलाइन रिटेलर की जिम्मेदारी से जुड़े नियम पर भी चिंता जता रहे हैं। निवेशकों का कहना है कि इस नियम से भविष्य में ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की धन जुटाने की क्षमता प्रभावित होगी। साथ ही ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स को अपने मौजूदा और संभावित निवेशकों के रिटर्न की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त उपाय करने होंगे। दिग्गज ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन, फ्लिपकार्ट समेत अन्य इंडस्ट्री बॉडी प्रस्तावित नियमों पर जल्द ही अपने सुझाव जमा करेंगी।

राज्यों के बिजनेस इकोसिस्टम में गड़बड़ी पैदा करेंगे नए नियम

एक बड़े गैर-भाजपा सरकार वाले राज्य के अधिकारी का कहना है कि प्रस्तावित नियम राज्यों के बिजनेस इकोसिस्टम में गड़बड़ी पैदा करेंगे। खासतौर पर एमएसएमई और स्मॉल एंटरप्रेन्योर पर असर पड़ेगा। इसके अलावा यह नियम उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा करने के बजाए उनके विकल्पों को भी सीमित कर देंगे। अधिकारी ने कहा कि अमेजन और फ्लिपकार्ट के सालाना रेवेन्यू में एमएसएमई का दो-तिहाई योगदान है। यह राशि हजारों करोड़ रुपए होती है। इस पूरे बिजनेस इकोसिस्टम में कारोबारों, सेल्फ-एंप्लॉयड इंडिविजुल्स, वेयरहाउस, किसानों की बड़ी चेन शामिल हैं। इन प्लेटफॉर्म्स ने हाल के वर्षों में लाखों नौकरियां पैदा की हैं।

क्या कहते हैं प्रस्तावित नियम?

  • परंपरागत ई-कॉमर्स फ्लैश सेल पर कोई रोक नहीं होगी। स्थानीय उत्पादों की बिक्री को प्राथमिकता देनी होगी।
  • खास तरह की फ्लैश सेल पर रोक होगी। एक के बाद एक आयोजित होने वाली सेल पर रोक रहेगी।
  • ग्राहकों की पसंद सीमित करने, कीमत बढ़ाने और व्यापार के समान अवसर कम करने वाली सेल पर रोक होगी।
  • कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 के अनुपालन के लिए एक चीफ कम्प्लायंस ऑफिसर की नियुक्ति करनी होगी।
  • ई-रिटलर्स को उद्योग और आंतरिक व्यापार विभा के पास रजिस्ट्रेशन अनिवार्य रूप से कराना होगा।
  • ई-कॉमर्स कंपनियों को किसी भी कानून के तहत अपराधों की रोकथाम, जांच करने और सरकारी एजेंसी से आदेश मिलने के 72 घंटे के भीतर सूचना मुहैया करानी होगी।
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