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रिसर्च एंड डेवलपमेंट पर भारत में काफी कम खर्च:रेवेन्यू की तुलना में आरएंडडी पर महज 0.9 पर्सेंट ही खर्च करती हैं कंपनियां, फार्मा और ऑटो सेक्टर आगे

मुंबई8 महीने पहले
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  • किसी भी अर्थव्यवस्था में आरएंडडी पर खर्च से देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार में मदद मिलती है
  • रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड जैसी कंपनियां रेवेन्यू की तुलना में महज 0.8 पर्सेंट हिस्सा खर्च करती हैं

शेयर बाजार में लिस्टेड देश की कंपनियां रिसर्च एंव डेवलपमेंट (आरएंडडी) पर अपने रेवेन्यू का महज 0.9 पर्सेंट हिस्सा ही खर्च करती हैं। इसमें फार्मा और ऑटो सेक्टर सबसे ऊपर है। जबकि एनर्जी, सीमेंट जैसे सेक्टर काफी पीछे हैं। आरएंडडी पर खर्च न करने से देश की जीडीपी पर भी बुरा असर होता है।

409 कंपनियों ने 360 अरब रुपए किया खर्च

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की ओर से जारी रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, शेयर बाजार में लिस्टेड 409 कंपनियों ने वित्त वर्ष 2020 में 360 अरब रुपए या अपने रेवेन्यू का 0.9 पर्सेंट हिस्सा आरएंडडी पर खर्च किया। जिन सेक्टर्स ने आरएंडडी में सबसे ज्यादा खर्च किया उसमें ऑटो सेक्टर ने 111 अरब रुपए खर्च किया। फार्मा ने 106 अरब रुपए, इंडस्ट्रियल और एनर्जी ने 82 अरब रुपए और आईटी ने 23 अरब रुपए खर्च किया।

निजी सेक्टर ने 37 पर्सेंट खर्च किया

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज ने कहा कि निजी सेक्टर्स ने आरएंडडी पर केवल 37 पर्सेंट खर्च किया। जबकि सरकारी सेक्टर ने इससे काफी ज्यादा खर्च किया। भारत में अभी भी आरएंडडी पर होनेवाला खर्च काफी स्थिर है। यह साल 2014 से अब तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की तुलना में महज 0.7 पर्सेंट ही है। यही नहीं, अन्य उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में भी भारत आरएंडडी पर काफी कम खर्च करता है।

विकसित देशों में होता है आरएंडडी पर ज्यादा खर्च

रिपोर्ट कहती है कि विकसित देशों की तुलना में भारत में दो पर्सेंट कम आरएंडडी पर खर्च होता है। दरअसल विश्लेषक मानते हैं कि किसी भी अर्थव्यवस्था में आरएंडडी पर खर्च से देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार में मदद मिलती है। यह अर्थव्यवस्था में टोटल फैक्टर प्रोडक्टिविटी (टीएफपी) को सुधारता है। इससे जीडीपी की बढ़त में मदद मिलती है।

भारत में ज्यादा खर्च की है जरूरत

रिपोर्ट के अनुसार, भारत को अभी की तुलना में ज्यादा खर्च आरएंडडी में करने की जरूरत है। खासकर निजी सेक्टर को टीएफपी को बूस्ट देने के लिए कम से कम रेवेन्यू का 3 पर्सेंट खर्च करना चाहिए। अगर ऐसा होता है तो भारत की जीडीपी 8 पर्सेंट की विकास दर को हासिल कर सकती है। कंपनियों की बात करें तो देश की सबसे बड़ी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) इसमें फिसड्‌डी साबित हुई है। उसने रेवेन्यू का केवल 0.8 पर्सेंट (25 करोड़ रुपए) ही हिस्सा आरएंडडी पर खर्च किया है।

टाटा मोटर्स ने 7 प्रतिशत यानी 31 करोड़ रुपए खर्च किया है। महिंद्रा एंड महिंद्रा ने 30 करोड़ रुपए खर्च किया है।

आरएंडडी पर खर्च करनेवाले सेक्टर

सेक्टर के आधार पर बात करें तो हेल्थकेयर सबसे टॉप पर है। यह आरएंडडी पर कुल रेवेन्यू का 6.8 पर्सेंट खर्च करता है। जबकि दूसरे नंबर पर ऑटोमोबाइल कंपनियां हैं जो 2.7 पर्सेंट खर्च करती हैं। टेलीकॉम सेक्टर 3.3 पर्सेंट खर्च करता है। इसके बाद सभी सेक्टर जीरो में खर्च करते हैं। एनर्जी सेक्टर 0.2, आईटी सेक्टर 0.6, मैटीरियल सेक्टर 0.6, मेटल एवं मेटल्स प्रोडक्ट 0.2, कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी 0.4, कंज्यूमर स्टेपल्स 0.3, युटिलिटीज 0.2 और सीमेंट सेक्टर 0.1 पर्सेंट हिस्सा आरएंडडी पर खर्च करता है।

2017-18 में सरकारी कंपनियों ने 45.4 पर्सेंट खर्च किया

रिपोर्ट कहती है कि 2017-18 में निजी सेक्टर ने जहां आरएंडडी पर 36.8 पर्सेंट खर्च किया, वहीं केंद्र सरकार की कंपनियों ने 45.4 पर्सेंट खर्च किया। राज्य की कंपनियों ने 6.4 पर्सेंट और उच्च शिक्षा सेक्टर ने 6.8 पर्सेंट खर्च किया। वैश्विक स्तर की अगर बात करें तो इसमें भारत काफी पीछे है। मलेशिया, हंगरी, इटली, न्यूजीलैंड जैसे देश भी भारत से ज्यादा खर्च करते हैं।

इजरायल और कोरिया सबसे ज्यादा खर्च करते हैं

आरएंडडी पर सबसे ज्यादा खर्च करनेवाला देश इजरायल और कोरिया हैं। यह दोनों अपनी जीडीपी की तुलना में 4.5 पर्सेंट खर्च आरएंडडी पर करते हैं। जर्मनी, जापान जहां 3 पर्सेंट खर्च करते हैं वहीं चीन, फ्रांस और सिंगापुर 2 पर्सेंट खर्च करते हैं। अमेरिका ढाई पर्सेंट से ऊपर खर्च करता है तो कनाडा, यूके डेढ़ पर्सेंट से ज्यादा खर्च करते हैं। सबसे फिसड्‌डी देशों में पाकिस्तान, फिलीपींस, लंका और वेनेजुएला हैं जो आधा पर्सेट भी खर्च नहीं करते हैं।

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